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मानवता मरी:कोरोना पेशेंट को पीजीआई ले जाने का पहले 4 गुना अधिक किराया मांगा, रास्ते में एंबुलेंस की ऑक्सीजन खत्म होने से मरीज की माैत

अम्बालाएक महीने पहले
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अम्बाला | एंबुलेंस में पड़ा सुमित कुमार का शव। - Dainik Bhaskar
अम्बाला | एंबुलेंस में पड़ा सुमित कुमार का शव।
  • कैंट सिविल अस्पताल में एंबुलेंस छोड़कर फरार हुआ चालक
  • परिजन बोले- ऑक्सीजन नहीं थी तो हमें मना कर देता

पालम विहार डी के रहने वाले कोरोना मरीज सुमित कुमार की शुक्रवार काे तबीयत ज्यादा बिगड़ी ताे परिजन उसके पीजीआई चंडीगढ़ लेकर जाने लगे। एंबुलेंस वाले ने पहले 4500 रुपए का किराया मांगा। बाद में किराया 2500 रुपए में तय होने पर परिजन प्राइवेट एंबुलेंस में लेकर सिविल अस्पताल कैंट से निकले।

अभी 10 किलोमीटर दूर बलदेव नगर ही पहुंचे थे कि मरीज ने दम तोड़ दिया। मरीज के भाई विशाल ने आरोप लगाया है कि सिलेंडर से ऑक्सीजन खत्म हो गई थी, जिससे भाई की मौत हुई है। एंबुलेंस चालक को जब उसने बताया था तो उसने कहा कि आगे से सिलेंडर ले लेंगे।

विशाल ने बताया कि सुमित के शरीर में कोई हरकत नहीं दिखी तो वह उसे लेकर जेपी अस्पताल में पहुंचे। जहां पर डाॅक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों के कहने पर एंबुलेंस चालक वापस आने के लिए काफी देर तक टालमटोल करता रहा। बाद में एंबुलेंस कैपिटल चौक पर पहुंची तो परिजनों से पेट्रोल डलवाने के नाम पर दो हजार रुपए की डिमांड की गई। लेकिन परिजनों ने सिविल अस्पताल कैंट में पहुंचने पर ही पेमेंट देने की बात कही। अस्पताल में पहुंचने पर जब परिजनों ने ऑक्सीजन सिलेंडर के बारे पूछना शुरू किया तो वह मौके से फरार हो गया। मामले की सूचना मिलते ही बीसी बाजार चौकी पुलिस मौके पर पहुंची।

पुलिस ने डाॅक्टरों से मृतक का चेकअप कराया। जिसके बाद डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा मृतक के भाई विशाल के बयान दर्ज कर एंबुलेंस को कब्जे में ले लिया है। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक यह प्राइवेट एंबुलेंस रवि कश्यप के नाम रजिस्टर्ड है। भाई का आरोप है कि एंबुलेंस का इंश्योरेंस भी नहीं कराया गया है। उधर, जांच करने पहुंचे एएसआई कुशलपाल राणा ने बताया कि एंबुलेंस को सेनिटाइज कराने के बाद शनिवार को उसकी जांच होगी और इसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।

तीन मई को पॉजिटिव आई थी सुमित की रिपोर्ट

कोरोना मरीज के भाई विशाल ने बताया कि उसका भाई वेस्टर्न यूनियन में जॉब करता था लेकिन लॉकडाउन के चलते जॉब छूट गई थी। अब बैंकों से जुड़ी एक कंपनी में काम कर रहा था। एक मई को उसके भाई को सांस लेने में दिक्कत हुई तो उसने कैंट सिविल अस्पताल कैंट में चेकअप कराया और कोविड टेस्ट कराया था। तीन मई को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सांस लेने में कठिनाई हो रही थी इसलिए उसका भाई अस्पताल में भर्ती था। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो अस्पताल से उसकाे पीजीआई रेफर किया जा रहा था।

विशाल ने बताया कि उसने कैंट की एक संस्था के सदस्य को फोन किया और एंबुलेंस पूछी। एक एंबुलेंस से बातचीत की तो उसने 4500 रुपए मांगे। बाद में वह 2500 रुपए में मान गया। फोन पर एंबुलेंस वाले ने बताया कि उसकी एंबुलेंस में ऑक्सीजन पूरी है। इसलिए बात तय होने के बाद एंबुलेंस शुक्रवार शाम को अस्पताल पहुंची। यहां से कोरोना मरीज को लेकर एंबुलेंस पीजीआई लेकर रेफर हो गई थी लेकिन करीब 15 मिनट के सफर के बाद ही एंबुलेंस से ऑक्सीजन खत्म हो गई।

चंडीगढ़ 60 किमी दूर, किराया ‌‌840 बनता है, लेकिन 2500 लिए

कैंट सिविल अस्पताल से पीजीआई सेक्टर-12 चंडीगढ़ करीब 60 किलोमीटर दूर है। ऐसे में तय रेट के मुताबिक 60 किलोमीटर है जिसके मुताबिक बेसिक लाइफ एंबुलेंस का किराया 840 रुपए बनता है। कोरोना मरीज सुमित के भाई विशाल का कहना है कि उससे 2500 रुपये लिए गए हैं। यह किराया तीन गुना अधिक है।

एआरएचएम ने तय कर रखे हैं किराये के रेट

नेशनल हेल्थ मिशन ने तय रेट से अधिक किराया वसूलने वाले प्राइवेट एंबुलेंस चालकों पर शिकंजा कसने के 3 मई को परिवहन विभाग हरियाणा के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। एनएचएम के डायरेक्टर के आदेशों के आधार पर जिला परिवहन अधिकारियों ने रेट तय कर दिए थे और आदेश दिए थे कि यदि तय रेट से अधिक किराये का मामला सामने आता है तो उस पर कार्रवाई होगी। आदेशों के मुताबिक बेसिक लाइफ स्पोर्ट एंबुलेंस का किराया 7 रुपए प्रति किलोमीटर और एडवांस लाइफ स्पोर्ट एंबुलेंस 15 रुपए प्रति किलोमीटर तय किया था।

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