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निगम वसूलेगा विकास शुल्क:ओल्ड सिटी की 8 हजार दुकानों से निगम वसूलेगा 28 करोड़ विकास शुल्क

अम्बाला3 दिन पहलेलेखक: उज्ज्वल शर्मा
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  • जिन दुकानदारों ने नक्शा पास करा रखा या जिन्होंने दुकान दोबारा बनाई, उन्हें भी देना होगा डेवलपमेंट चार्ज; पुराने शहर के रिहायशी एरिया को छूट रहेगी

सिटी नगर निगम के एनडीसी पोर्टल से पुराने शहर के दुकानदारों को विकास शुल्क जमा कराने के बाद ही अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनडीसी) मिलेगा। फिर चाहे किसी दुकानदारा का नक्शा पास हो या चाहे नहीं। नगर निगम ऐसे 8000 से ज्यादा दुकानदारों से लगभग 28 करोड़ रुपए वसूल करने की तैयारी में है। हालांकि नगर निगम के खाते में यह पैसा तभी आएगा जब कोई दुकानदार एनडीसी लेने नगर निगम पहुंचेगा।

अहम बात ये भी है कि अंग्रेजों ने जो शहर बसाया था, उसे 1937 में लाल डोरा (कोर एरिया) घोषित किया गया था। लाल डोरे में होने के कारण नगर निगम ने भी इन घरों को विकास शुल्क से फ्री किया है। पुराने शहर में जितने भी घर हैं, उनका किसी का खसरा नंबर नहीं है। नगर ने सभी घरों को मकान नंबर अलॉट किए हुए हैं। पुराने एएमसी नंबर के बाद सभी घरों को नए नंबर दिए गए थे। आज भी इन घरों पर नगर निगम का नंबर लगा हुआ है। उसी हाउस नंबर पर सारे सरकारी दस्तावेज बनते हैं।

पुराना शहर मोहल्लों में बसा, नए में कॉलोनियां कटी
पुराना शहर मोहल्लाें में बसा हुआ है। यहां पर कोई काॅलोनी नहीं है। इस पुराने शहर में लगभग 42 हजार घर हैं, लेकिन जैसे-जैसे निगम का एरिया बढ़ता गया तो निगम में 92,596 घर हो गए। रेलवे स्टेशन तक, जैन काॅलेज तक, पॉलिटेक्निक चौक तक, मंजी साहिब गुरुद्वारा तक पुराना शहर ही गिना जाता है, जिसे कोर एरिया कहते हैं। इसके अलावा लगभग 320 के करीब काॅलोनियां बस चुकी हैं। उन्हें कोर एरिया में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए उनसे विकास शुल्क पहले की तरह ही निगम वसूल कर रहा है।

2004 से पहले नक्शे पास तो भी देना होगा विकास शुल्क
नगर निगम ने 2004 से पहले जितने भी नक्शे पास हैं और उस समय विकास शुल्क जमा भी कराया हो, उनसे भी निगम विकास शुल्क वसूल करेगा, क्योंकि एनडीसी पोर्टल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी का विकास शुल्क माफ किया जा सके। इसलिए जो भी दुकानदार दुकान बनाने के लिए नक्शा पास कराने या फिर दुकान बेचने के लिए एनडीसी लेने आएगा, उससे विकास शुल्क निगम वसूल करेगा।

दुकानदारों का ये दर्द-

दुकान गिराकर दोबारा बनवाई, 62 हजार विकास शुल्क मांग रहा निगम : आकाश
आकाश ने कहा कि उनकी पटेल रोड पर दुकान है। उन्होंने उसे गिराकर नई दुकान बनानी है। इसलिए वह निगम से नक्शा पास कराने गए, लेकिन उनकी दुकान का साइज 14 गुना 45 है। निगम विकास शुल्क के लिए 62 हजार रुपए मांग रहा है। उन्होंने कहा कि जब उनकी 100 साल से ज्यादा पुरानी है, फिर भी विकास शुल्क मांगा जा रहा है। आकाश ने कहा कि वह इस संबंध में स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों से पंचकूला में मिले। वहां से इस पर विचार करने का आश्वासन तो दिया गया।

नक्शा पास फिर भी मांगे 32 हजार रुपए: हेमंत
कोतवाली बाजार के दुकानदार हेमंत ने कहा कि उन्होंने अपनी दुकान बनानी है। उनके पास दुकान का नक्शा भी पास है, लेकिन जब वह निगम में दोबारा बनाने के लिए फिर से नक्शा पास कराने के लिए गए तो उन्हें कहा गया कि 32 हजार रुपए विकास शुल्क जमा कराना होगा। जब तक विकास शुल्क जमा नहीं होगा तब तक नक्शा पास नहीं होगा।

अर्बन डेवलपमेंट डायरेक्टर ने 2003 में स्पष्ट किया था
हरियाणा अर्बन डिवेलपमेंट के डायरेक्टर ने 11 जुलाई 2003 में पुराने शहर के बारे में स्पष्ट किया था कि पुराने शहर को लाल डोरा माना जाता है। इसलिए वहां पर किसी प्रकार का विकास शुल्क नहीं लगेगा। उन्होंने अपने लेटर में कॉमर्शियल और रेजिडेंशियल का कहीं भी जिक्र नहीं किया है। सिर्फ लाल डोरे का जिक्र किया है।

एनडीसी पोर्टल में पुराने शहर के रेजिडेंशियल एरिया में विकास शुल्क लेने का कोई खाना नहीं है। सिर्फ काॅमर्शियल का खाना है। जिसके तहत दुकानों के मालिक से विकास शुल्क लिया जाएगा।-विपिन बूरा, एमई, नगर निगम, सिटी

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