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डेंगू डेंजर्स:11 नए केसों के साथ डेंगू केस का शतक, बीपीएल कैटेगरी से बाहर के मरीज को प्लेटलेट्स के लिए चुकाने पड़ रहे 11 हजार, अस्पतालों के वार्ड हाउसफुल, सरकारी रिकाॅर्ड में 103 की ही पुष्टि

अम्बाला2 महीने पहले
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सिटी के सिविल अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में बनाए गए डेंगू वार्ड में दाखिल मरीज। - Dainik Bhaskar
सिटी के सिविल अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में बनाए गए डेंगू वार्ड में दाखिल मरीज।
  • सिर्फ 2 प्राइवेट अस्पतालों में ही सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की सुविधा
  • सिटी सिविल के डेंगू वार्ड में जितने बेड, उससे ज्यादा पहुंच रहे मरीज

वीरवार को 11 नए केसों के साथ डेंगू मामलों का शतक पूरा हो गया। अब तक जिले में 103 डेंगू मरीज मिल चुके हैं। वीरवार को अम्बाला सिटी, अम्बाला कैंट व पीएचसी अंबली से 2-2 केसों समेत नारायणगढ़, पीएचसी समलेहड़ी, नुरपुर व सीएचसी चौड़मस्तपुर के एरिया में मिले हैं। वीरवार दोपहर तक सिटी सिविल अस्पताल स्थित ट्रॉमा सेंटर में ही 23 मरीज एडमिट थे। डेंगू वार्ड के नर्सिंग स्टाफ के मुताबिक वार्ड को 12 अक्टूबर को ही खोला गया है। सेंटर में सबसे कम 15 हजार प्लेटलेट्स यहां एडमिट बलदेव नगर के रहने वाले मरीज के थे।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यहां एडमिट किसी मरीज को अभी प्लेटलेट्स की जरूरत नहीं पड़ी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संजीव सिंगला का कहना है कि पीजीआई की गाइडलाइन के मुताबिक 10 हजार प्लेटलेट्स रहने पर ही प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है लेकिन उनकी कोशिश रहती है कि 15 हजार से नीचे आने पर प्लेटलेट्स चढाएं जाएं। प्लेटलेट्स की डिमांड फिजिशियन के माध्यम से भेजी जाती है। सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए एमएम अस्पताल मुलाना, संजीवनी अस्पताल व हीलिंग टच सेंटर बनाए गए हैं। जहां से सिंगल डोनर के साथ बीपीएल मरीजों को प्लेटलेट्स सरकार की पॉलिसी के तहत फ्री मिलते हैं।

प्लेटलेट्स की एवज में 11 हजार रुपए सरकार चुकाती है। हीलिंग टच अस्पताल के डॉ. जगमोहन ओबराय ने बताया कि सिंगल डोनर के लिए अभी उनके पास किट नहीं है। उनके पास रोजाना 2 से 3 मरीज आते हैं वे अभी आदेश अस्पताल से प्लेटलेट्स मंगवा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि शुक्रवार तक सिंगल डोनर किट आ जाएगी। डॉ. ओबराय के मुताबिक जिस सिंगल डोनर के प्लेटलेट्स 2 लाख से ऊपर होते हैं उससे ही लिए जाते हैं।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में डेंगू के एलाइजा टेस्ट की जांच सिटी के सेक्टर-10 स्थित मॉलिक्यूलर लैब में की जा रही है। लेकिन प्लेटलेट्स जांच सिटी सिविल अस्पताल, कैंट अस्पताल, नारायणगढ़ अस्पताल, सीएचसी बराड़ा व मुलाना में भी की जा रही है। इन अस्पतालों में डेंगू मरीजों को एडमिट भी किया जा रहा है। सिटी सिविल अस्पताल स्थित ट्रॉमा सेंटर में 2 कमरों में बनाए डेंगू वार्ड में 21 वार्ड लगाए गए हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की संख्या बढ़ने पर और बेड लगाए जाने की व्यवस्था है।

जिला महामारी नियंत्रक डॉ. सुनील हरि ने बताया कि अब तक 6750 लोगों को डेंगू के मद्देनजर नोटिस दिए गए हैं। हालांकि जिले में किसी पर जुर्माना नहीं लगाया गया। मलेरिया और डेंगू की जांच के लिए 6975 ब्लड स्लाइड बनाई गई हैं। जिले में मलेरिया का कोई मरीज सामने नहीं आया है। डेंगू के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने 50 ब्रीडिंग चेकर शहरी इलाकों में लगाए हैं। ग्रामीण इलाकों में मलेरिया विभाग की टीम, एमपीएचडब्ल्यू व आशा वर्कर डोर-टू डोर सर्वे कर रही हैं। एंटी लारवा एक्टिविटिज, नालों में काला तेल, कूलर व फ्रिज आदि चेक कर रही हैं।

मशीनें पर्याप्त नहीं, इसलिए फोगिंग नहीं पकड़ रही स्पीड

सिटी एरिया में नगर निगम के पास पर्याप्त फोगिंग मशीनें नहीं हैं। यहां एक रोजाना एक वार्ड कवर करने के लिए 4 बड़ी व 2 छोटी मशीनें चाहिए जबकि दो छोटी मशीनें हैं। फोगिंग 4 दिन पहले शुरू हुई है। निगम के अफसरों का दावा है कि नई फोगिंग मशीनें खरीदी जाएंगी। वहीं, कैंट में 3 अक्टूबर को एक एक बड़ी व दो छोटी मशीनों से फोगिंग शुरू की गई है। जबकि स्वास्थ्य विभाग 15 नवंबर तक ही फोगिंग सीजन मानकर चलता है। ऐसे में शहरी एरिया में इस अवधि में फोगिंग होती नजर नहीं आ रही है। गांवों में बीडीपीओ फोगिंग समय पर नहीं करवा पा रहे बल्कि सरपंच व लोग स्वास्थ्य विभाग को लिख रहे हैं। जिससे फोगिंग के मामले में लगातार परेशानी बनी हुई है।

पिछले 6 साल से अब तक आए डेंगू के केस

साल केस
2015 552
2016 582
2017 328
2018 110
2019 124
2020 42
2021 अब तक 103

डेंगू को लेकर ये सावधानियां जरूर बरतें

सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि अपने घर के आस-पास कहीं पर भी पानी जमा न होने दें, फ्रीज की जो ट्रे है उसे साफ करें, कूलर के पानी को बदलें, गमलों में पानी न खड़ा न होने दें, घर की छत के उपर यदि कोई टायर या अन्य कोई ऐसी वस्तु है जिस पर पानी जमा होता है उसे जमा न होने दें, हो सके तो उसे वहां से हटा लें। उन्होंने कहा कि ऐसी सावधानियां बरतकर हम डेंगू बुखार के साथ-साथ अनावश्यक बीमारियों से बच सकते हैं।

ठहरे हुए पानी में अंडे देते हैं मच्छर : डॉ. सुनील

डॉ. सुनील हरि ने बताया कि मच्छर ठहरे (एकत्रित) हुए पानी मे अंडे देते हैं, जिससे मलेरिया व डेंगू की बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की बढ़ोतरी तेजी से होती है। इसलिए तुरंत प्रभाव से मच्छर मारने के लिए ठहरे हुए पानी में काला तेल व टेमिफोस की दवाई का छिड़काव जरूरी है। जिससे मच्छर का लारवा खत्म हो सके और जानलेवा बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की उत्पत्ति पर पूर्ण रूप से रोक लग सके। डेहर गांव में सर्वे के दौरान सामने आया कि लोगों ने घरों में खाली बर्तनों में पानी स्टोर किया हुआ था। विशेषतौर पर पशुओं के लिए होदी में पानी जमा किया हुआ था। एक घर में बाल्टी के दौरान लारवा मिला। इस मौसम में लोग पानी को जमा न करें और पशुओं को साफ पानी पिलाएं।

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