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  • Disaster Not Only Scares, It Also Teaches; Sikh Sangat And Police Anchor On The Road, Eyes Of Satsang Bhavan Were Filled

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इन किस्सों का सबक:आपदा डराती ही नहीं, सिखाती भी है; सिख संगत व पुलिस का रोड पर लंगर, सत्संग भवन की सेवा से आंखें भर आईं

अम्बाला2 महीने पहले
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कोरोना से जुड़े कई किस्से हम सभी के जेहन में हैं। यकीनन अधिकांश कड़वे ही अनुभव से भरे होंगे। हमारे खुद के घर में या आस पड़ोस में हमने संकट का सामना किया ही है, लेकिन आप यदि गौर करेंगे तो इसी कोरोना ने हमें कुछ अच्छा भी सिखाया है। कुछ ऐसी बातें जो हमें दूसरों से जोड़ती हैं। यह कुछ ऐसे शब्द हैं जो बरसों से हमारे इर्द गिर्द ही रहे, लेकिन हमने इनको गहराई से पहली बार समझा। पूरे कोरोनाकाल के दौरान इन्हीं शब्दों ने हमारे जीवन को बदल दिया। दैनिक भास्कर आज आपको कोरोनाकाल की कुछ घटनाएं इन्हीं शब्दों के साथ बता रहा है।

मार्च से शुरू हुए पलायन के बाद पंजाब से बॉर्डर पार कर रोजाना पैदल श्रमिक आने लगे। बॉर्डर पर पुलिस उन्हें रोकती लेकिन ये खेतों व दूसरे रास्ते से होकर बॉर्डर पार कर निकल गए। अम्बाला में कई जगह इनकी सेवा की गई। कैंट में जगाधरी हाईवे पर सिख संगत और पुलिस के सहयोग से लंबे समय तक लंगर चलाया गया। यहां रोजाना एक से डेढ़ हजार लोगों को भोजन कराया गया।

लॉकडाउन के दौरान बहुत सी संस्थाओं ने पलायन कर रहे श्रमिकों और जरूरतमंदों की सेवा की। राधा स्वागत सत्संग भवनों में मिला सत्कार हमेशा याद रखा जाएगा। यहां इतना अपनापन मिला कि जब श्रमिकों को अपने घरों को वापस भेजा जा रहा था बहुतों की आंखें नम हो गईं थी। डेरा ब्यास के सत्संग भवनों में कोरोना काल के दौरान 10 हजार से ज्यादा लोगों को आश्रय मिला।

पहले मरीज के लिए वॉरियर्स की ताली

28 मार्च को जिले में पहला कोरोना पॉजिटिव केस आया। नेपाल से आया पंजाब के गांव रामनगर का युवक सिटी सिविल अस्पताल पॉजिटिव पाया गया। कई दिन तक इलाज चला और आखिर में कोरोना को हराया। अस्पताल स्टाफ ने तालियां बजाकर युवक के हौसले को सराहा। अम्बाला में अब तक एक लाख से ज्यादा टेस्ट हो चुके हैं और 11 हजार लोग कोरोना को हरा चुके हैं।

समय की जरूरत बनी

लाॅकडाउन का पालन कराने के लिए पुलिस ने कई बार सख्ती भी बरती। इस दौरान बिना वजह बाहर घूमने वालों को सजा के रूप में दंड-बैठक कराई गई। प्रशासन ने 2 करोड़ से ज्यादा के चालान भी किए।

शादियों में बड़ा बदलाव

कोरोना ने एक बड़ा बदलाव शादियों पर किया। जब सबकुछ बंद था तो कई लोगों ने साधारण तरीके से बिना ज्यादा खर्च के शादियां की और करवाई। शिव प्रताप नगर के मनीष और ट्यूबवेल कॉलोनी की प्रिया की शादी में 8 बाराती-घराती शामिल हुए। बाकी रिश्तेदारों ने ऑनलाइन तरीके से नवदंपती को आशीर्वाद दिया।

सुरक्षा की पहल

19 अक्टूबर : गृह मंत्री अनिल विज ने पहल करते हुए कैंट सिविल अस्पताल में कोरोना की स्वदेसी वैक्सीन को-वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रॉयल का टीका लगवाया। वे देश के पहले मंत्री थे जिन्होंने खुद काे स्वदेशी वैक्सीन के लिए वॉलिंटियर घोषित किया। हालांकि दूसरी डोज से पहले वे कोरोना पॉजिटिव हो गए। अब मेदांता अस्पताल में उनकी सेहत में सुधार हो रहा है।

पलायन के लंबे सफर ने छीनी पहली बार मां बनने की खुशी

बिंदिया देवी अपने पति जितिन राम के साथ। ये वाे मां है जिसने 2020 में अपने पहले बच्चे काे ही खाे दिया। कहर तब टूटा जब यह अपने बच्चे काे देख भी नहीं पाई। लाॅकडाउन में शुरू हुए पलायन में 9 माह की गर्भवती बिंदिया अपने पति जितिन के साथ लुधियाना से औरंगाबाद का 1350 किलाेमीटर का सफर पैदल करने काे मजबूर हाे गई। अम्बाला सिटी में लेबर पेन शुरू हुई और थकान व स्ट्रेस के कारण मृत बच्चे काे जन्म दिया। फिर इसी दर्द और तकलीफ में उसने आगे का सफर तय किया।

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