आज डॉक्टर्स व वर्ल्ड सीए-डे / डॉक्टर्स ने साझा किए वे खास पल जिन्हें याद कर उन्हें अपने पेशे पर गर्व होता है

X

  • शहर के कई परिवार इस प्राेफेशन से जुड़े, ऐसे डाॅक्टर्स और सीए से खास बातचीत

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 07:18 AM IST

अम्बाला. सफेद एप्रन और गले में स्टैचेस्काेप। ये हैं डाॅक्टर्स जाे मरीज को दूसरा जन्म देकर उम्मीद खो चुके उनके परिवार वालों को एक नया सवेरा देते हैं। इनका यही सेवाभाव इन्हें लोगों की श्रद्धा का पात्र बना देता है। हममें से ही एक, हम जैसे ही, किंतु जीवन देने का काम इन्हें दैवीय बना जाता है। डॉक्टर्स डे पर शहर के डाॅक्टर्स ने उन पलों को साझा किया, जिन्हें याद कर ये खुद भी डॉक्टरी के पेशे पर गर्व करते हैं।

बचपन से टीचर बनने का सपना था, पर बन गई डाॅक्टर : डाॅ. वीनू अराेड़ा
मम्मी विमल सेठी स्कूल प्रिसिंपल थीं। उनकाे देखकर बचपन से ही मन बना लिया था कि मैं टीचर बनूंगी। पेरेंट्स से साेच रखा था कि दाेनाें बेटियों काे डॉक्टर ही बनाना है। पेरेंट्स के सपने काे साकार करने के लिए मैंने डॉक्टर प्रोफेशन काे चुना। 1992 से इस प्रोफेशन में हूं। अगले साल अप्रैल में रिटायरमेंट है। राेजाना 10 से 12 जिंदगियों मेरे हाथाें से इस दुनिया में आती हैं। गर्व फील हाेता है कि किसी मां की आंखाें में खुशी देखकर। महीने में 300 से ज्यादा डिलीवरी हाेती है‌ं, जिनमें से लगभग 100 सीजेरियन हैं।

कई बार ऐसा हाेता है कि इमरजेंसी पाेस्ट ब्लीडिंग हाे जाती है या पेशेंट एनिमिक है ताे मैटरनल डेथ के चांसेज ज्यादा हाेते है। ऐसे में मेरे लिए चुनाैती हाेती है कि मरीज काे बचाना। कुछ समय पहले ऐसा केस आया था कि पेशेंट काे पाेस्ट ब्लीडिंग हाेने लगी ताे उसकाे जल्द ही फ्लूड व मेडिसन देकर स्टेबल किया। उसे हाई सेंटर भेज दिया। एक दिन बाद ही उस पेशेंट काे वहां से भेज दिया गया। वाे पेशेंट ठीक थी क्याेंकि यहां से 99 परसेंट उसकी हालत काे स्टेबल कर दिया गया था।

मुझे खुशी और गर्व भी महसूस हाेता है कि मैं लाेगाें की जिंदगियां बचाने में समर्थ हूं। अब साेचती हूं कि टीचर बनती ताे शायद ऐसे रोज चैलेंज लेने का मौका कम मिलता। (डाॅ. वीनू अराेड़ा, हेड ऑफ डिपार्टमेंट, गाइनाकाॅलाेजिस्ट, सिविल अस्पताल अम्बाला सिटी)

डाॅक्टर बनने का सपना हुआ सार्थक : डाॅ. प्रकाशपुंज
2 महीने पहले की बात है मेरे पास केस आया (एनसीएस न्यूट्रीशियन ट्रेमल सिंड्राेम का)। इस बीमारी में हाेता यह है कि बच्चे के जन्म के बाद बच्चा चलना, बैठता सिखता है और अचानक कुछ दिन के बाद वह लेट जाता है और उसका शरीर पीला पड़ने लगता है। अचानक से हाथ-पैर हिलने लग जाते है। अम्बाला के पास लगते किसी गांव की फैमिली थी जाे अपने बच्चे काे लेकर मेरे पास आए। मैंने उसकाे डाइगनाेस किया ताे यह सिंड्राेम निकला।

पेरेंट्स बेहद घबराए हुए थे कि हंसते-खेलते बच्चे काे अचानक क्या हाे गया। बच्चे काे एडमिट करके उसका 10 दिन इलाज किया ताे बच्चा बिल्कुल ठीक हाे गया। पेरेंट्स के लिए यह चमत्कार से कम नहीं था। उनका बच्चा पहले जैसा हंसना व खेलना शुरू कर दिया। लेकिन डॉक्टर हाेने के नाते मुझे पता था कि समय के साथ यह ठीक हाे जाता है। पेरेंट्स ने मुझे बेहद शुक्रिया किया। साल में ऐसे दाे पेशेंट आते हैं। 25 सालाें से मेडिकल के प्रोफेशन में हूं। अच्छा लगता है कि जब काेई पेशेंट ठीक हाेता है ताे खुशी मिलती है कि डाॅक्टर बनने का सपना मेरा सार्थक हुआ। (डाॅ. प्रकाशपुंज शुभज्याेति, चाइल्ड स्पेशलिस्ट, सिविल अस्पताल, अम्बाला सिटी)

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना