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  • Estate Officer's Notice To The Bihari Lal Trust In Which 144 Shops, Clear The Notice, Reply Of The Trustee Case Pending In The High Court

विवाद:जिस बिहारी लाल ट्रस्ट में 144 दुकानें, उसे इस्टेट ऑफिसर का नोटिस- खाली करो, ट्रस्टी का जवाब- मामला हाईकोर्ट में लंबित

अम्बालाएक महीने पहले
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  • स्वयं को बिहारी लाल ट्रस्ट का ट्रस्टी बताने वाले अजय जायसवाल ने कहा- अगले हफ्ते मामले की सुनवाई

रेलवे रोड पर प्राइम लोकेशन पर 5.99 एकड़ पर स्थित बिहारी लाल ट्रस्ट की जमीन पर अब इस्टेट ऑफिसर कम डीसी ने पूरा कब्जे लेने की कार्रवाई को आरंभ कर दिया है। स्वयं को ट्रस्टी बताने वाले अजय जायसवाल को इस्टेट |ऑफिसर ने नोटिस देकर जगह खाली करने को कहा है। जायसवाल ने हाईकोर्ट में केस का हवाला देकर कहा कि मामले की अगले हफ्ते को हाईकोर्ट में सुनवाई है।

नोटिस में कहा है कि 25 जनवरी 2008 में प्रशासन ने इस भूमि पर कब्जा कर लिया था, मगर अजय जायसवाल व उनके भाई ने ट्रस्ट की जमीन पर बने दो मकानों पर कब्जा किया है। इस कब्जे को खाली करने की बात नोटिस में कही गई थी। इस मामले को लेकर अजय जायसवाल द्वारा जवाब फाइल किया है। अजय जायसवाल ने बताया कि जमीन को लेकर हाईकोर्ट में अभी केस चल रहा है। अदालत द्वारा स्टेट्स-को लगाया है।

वहीं, बिहारी लाल ट्रस्ट का मामला अदालत में अभी भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है इसको लेकर अभी भी अधिकारियों व स्टाफ को जानकारी नहीं है। साफ है कि केस का स्टेट्स प्रशासन को सही से नहीं पता तो फिर कैसे नोटिस दिए गए। वहीं नगर परिषद के सचिव राजेश कुमार ने कहा कि एक्साइज आॅफिसर के निर्देशों पर नोटिस दिए गए हैं। केस की जानकारी उनके पास नहीं है।

यह विवाद ट्रस्ट की जमीन का  साल 1921 में रेलवे रोड पर बिहारी लाल ट्रस्ट को 5.99 एकड़ जमीन सामाजिक कार्यों के लिए लीज पर दी गई थी। शर्त थी कि ट्रस्ट द्वारा यहां पर अस्पताल, प्याऊ और धर्मशाला को चलाया जाएगा। मगर समय साथ-साथ यह तीनों सामाजिक कार्य यहां समाप्त हो गए और ट्रस्ट ने दुकानें व मकान बनाकर किराए पर दे दिए।

साल 2002 में ट्रस्ट की लीज रद्द हुई तो जमीन पर कब्जा करने का नोटिस दिया गया, जिसके बाद ट्रस्टी ने अदालत की शरण ली। केस जीतने के उपरांत प्रशासन ने 25 जनवरी 2008 को यहां कब्जा ले लिया। तब तक यहां अवैध तरीके से होटल व कई निर्माण हो चुके थे। मगर ट्रस्टी ने मामले को हाईकोर्ट में चैलेंज किया और कोर्ट से स्टेट्स-को मिला था।

असमंजस में किरायेदार
ट्रस्ट की जमीन पर करीब 144 किरायेदार हैं। नगर निगम पहले यहां किरायेदारों से किराया वसूल कर रहा था। मगर 2-3 वर्षों से किराया नहीं वसूला जा रहा है। किरायेदार असमंजस में हैं, न तो इस्टेट ऑफिसर जमीन पर पूरा कब्जा ले रहे हैं और न ही किरायेदारों को कोई स्पष्ट जानकारी दी जा रही है। वहीं, अजय जायसवाल अब भी स्वयं को ट्रस्टी बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस्टेट ऑफिसर के नोटिस का जवाब दिया है, जमीन पर स्टेट्स-को है, आगामी सुनवाई के बाद ही कोई निर्णय होने की उम्मीद है।

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