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  • Former Minister Nirmal Singh's Haryana Democratic Front On Internal Politics Boom, Himmat Singh Did Not Clarify Stand

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भास्कर खास:पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट में भीतरी राजनीति उफान पर, हिम्मत सिंह ने नहीं स्पष्ट किया स्टैंड

अम्बाला11 दिन पहले
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अम्बाला सिटी | बैठक के बाद समर्थकों से बात करते हिम्मत सिंह।
  • कोर टीम की राय ली, 3 दिसंबर को हो सकता है ‘हिम्मतवाला’ फैसला

पिछले करीब दो माह से पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट के कार्यक्रमों से दूरी बनाने वाले हिम्मत सिंह ने अपनी अलग राजनीतिक खिचड़ी पकानी शुरू कर दी है। बुधवार को समर्थकों की कोर टीम के साथ सेक्टर-8 स्थित अपने दफ्तर में बैठक की। बैठक के बाद हिम्मत ने कोई स्टैंड स्पष्ट नहीं किया। इतना जरूर कहा कि अभी समर्थकों से चर्चा चल रही है। 3 दिसंबर को भी मीटिंग होनी है, उसी के बाद डेमोक्रेटिक तरीके से कोई फैसला होगा।

वहीं बैठक में शामिल सूत्रों के अनुसार समर्थकों के बड़े धड़े ने फ्रंट से अलग होकर नगर निगम चुनाव लड़ने की मांग उठाई है। कुछ ने कांग्रेस में वापसी की बात कही। हिम्मत की नाराजगी उस वक्त सामने आ रही है जब फ्रंट के अध्यक्ष यूपी में गायों पर फायरिंग के मामले में सुर्खियों में हैं। सिटी नगर निगम के लिए अमीशा चावला को मेयर पद का प्रत्याशी घोषित कर चुके फ्रंट ने 20 वार्डों में पार्षद उम्मीदवार चयन करने के लिए जो स्क्रीनिंग कमेटी बना रखी है, हिम्मत उसके अध्यक्ष हैं।

शहर की राजनीति में इस हलचल से 3 वजहों से इंपेक्ट

  • 2019 के विधानसभा चुनाव प्रचार में हिम्मत हरदम निर्मल के साथ खड़े नजर आए। अब दोबारा अलग अस्तित्व साबित करने की कोशिश है।
  • निगम चुनाव में फ्रंट का अच्छा या बुरा जो भी प्रदर्शन रहेगा, उससे फ्रंट और उससे जुड़े नेताओं का राजनीतिक भविष्य प्रभावित होगा।
  • पूर्व मंत्री विनोद शर्मा के दोबारा सक्रिय होने और हिम्मत के कदम की शुरू हुई हलचल से शहर की राजनीतिक में समीकरण बनेंगे-बिगड़ेंगे।

कांग्रेस का हाथ छोड़ने वाले 3 नेताओं की दोबारा पांव जमाने की कोशिश

विनोद शर्मा : दो बार सिटी से कांग्रेस के विधायक रहे। 2005 में 50,618 और 2009 में 69,435 वोट मिले। कांग्रेस का हाथ छूटने के बाद 2014 में हरियाणा जनचेतना पार्टी बना मैदान में उतरे। 36,964 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। अब अम्बाला की राजनीतिक में वापसी की कोशिश है।

निर्मल सिंह: दो बार मंत्री और 4 बार विधायक रहे। 2004 में आखिरी बार नग्गल हलके से विधायक बने थे। उसके बाद तीन बार विधानसभा और एक बार लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। 2019 में कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय लड़े। सिटी हलके से 55,944 हजार वोट मिले तो यह हलका मन को भा गया। अब लोकल चुनाव के बहाने शहर में पकड़ बनाने का अवसर देख रहे हैं।

हिम्मत सिंह: 2014 के चुनाव में सिटी हलके से कांग्रेस के टिकट पर 34,658 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे। 2019 के विधानसभा चुनाव में भी प्रचार शुरू कर दिया था। ऐन मौके पर कुमारी सैलजा ने पूर्व विधायक जसबीर मलौर को टिकट दिलाया। कांग्रेस से बगावत करने वाले पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के साथ आए।

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