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निगम ने कई सालों का बिल एक साथ भेजा:कई साल मुफ्त पिया पानी, एक साथ आए बिल ने छुड़ाए पसीने

अम्बाला4 दिन पहले
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कई साल के पानी के बिल एक साथ भेजे गए। - Dainik Bhaskar
कई साल के पानी के बिल एक साथ भेजे गए।
  • 2009 में निगम में शामिल हुए थे गांव, 2014 में शहरी तर्ज पर पानी के चार्ज लगे, अब एक साथ भेजे जा रहे बिल
  • जलापूर्ति विभाग की मजबूरी- बिल न चुकाने पर पानी का कनेक्शन नहीं काट सकते, नोटिस भी तभी दे सकते हैं जब बकाया 20 हजार रुपए से ज्यादा हो

कैसा लगेगा सालों से जो पानी फ्री पी रहे थे, अब उसका पिछले कई सालों का बिल एक साथ चुकाना पड़ जाए? ये सवाल पसीने छुड़ाने वाला है। जिन घरों में हजारों रुपए के बिल एरियर समेत पहुंच रहे हैं, उनके पसीने छूट भी रहे हैं। लोगों का कहना है कि पानी का 40 से 100 रुपए तक मंथली बिल चुकाना मुश्किल नहीं लेकिन एक साथ इतने साल का बिल भेजना कहां का न्याय है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन गांवों में है, जो 2009 से पहले तक पंचायतों के अधीन थे लेकिन बाद में नगर निगम में शामिल हो गए। इन इलाकों पर अप्रैल 2014 से शहरी तर्ज पर पानी के चार्ज लगा दिए गए। अब एक साथ इतने साल का बिल भेजा जा रहा है।

पूर्व पार्षद एवं नागरिक मंच अम्बाला के प्रधान ओंकार नाथी बताते हैं उनके पास 9,792 रुपए का बिल भेज दिया गया है। जबकि उनके पास पहले कभी मासिक बिल नहीं भेजा गया। बब्याल और आसपास की कॉलोनियों में ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जो भारी बिलों से सहमे हैं। हालात ये हो गए हैं कि गांव में लोग बिल लेने से भी बचते फिर रहे हैं। लोग कहते हैं कि मासिक बिल मिले होते तो चुकाने में दिक्कत नहीं थी। अब गृह एवं स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज से मांग की है कि जनहित में पुराने बिलों को माफ किया जाए।

साथ ही जलापूर्ति विभाग के ऐसे कर्मचारियों व अफसरों पर कार्रवाई है, जिन्होंने मासिक बिल भेजने की बजाय सालों का बिल इकट्ठा भेज दिया। दूसरी तरफ जलापूर्ति विभाग अम्बाला कैंट की बिलिंग ब्रांच की इंचार्ज कम जेई सोनिया इस बात से साफ इंकार करती हैं कि उनके डिवीजन में एक भी केस ऐसा नहीं है, जिसे कई साल का बिल एक साथ भेजा हो।

उनका तर्क है कि वर्ष 2014 में सरकार ने पानी के बिल लेने के आदेश जारी कर दिए गए थे। जिसके बाद से विभाग ने सर्वे करके लोगों से उनका डाटा इकट्ठा किया है। 2016 के बाद से सभी लोगों के पास बिल पहुंच रहे हैं। विभाग 6 माह का बिल भेजता है जो लोग बिल जमा नहीं कराते उनका बिल पेंडिंग होता चला जाता है। बिल ज्यादा हो जाने पर विभाग को दोषी ठहराना गलत है। विभाग 20 हजार से अधिक पेंडिंग बिल होने पर नोटिस देता है और कोर्ट में केस दायर करता है। हम किसी का पानी का कनेक्शन नहीं काट सकते।

कैंट के पुराने 9 वार्डों पर ही 1.53 करोड़ बकाया
जलापूर्ति विभाग की रिकॉर्ड की बात करें तो विभाग द्वारा बिलिंग नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक तैयार होती है। पहले एक से लेकर 11 नंबर वार्ड तक का एरिया नगर निगम अम्बाला सिटी के दायरे में था और 12 से लेकर 20 नंबर वार्ड का एरिया नगर निगम सदर जोन अम्बाला कैंट के अधीन था। कैंट के पुराने 9 वार्ड की बात करें तो जलापूर्ति विभाग को 1 करोड़ 53 लाख 49 हजार 168 रुपए पानी के बिल के रुपए में वसूलने हैं, जिसमें 20 हजार से अधिक की रकम वाले लोगों की संख्या 183 है। जिनसे पानी के बिल की वसूली के लिए विभाग ने नोटिस थमाए थे और कोर्ट में केस दायर किया हुआ है।

पानी का कनेक्शन कैसे वैध या रेगुलर करवाया जा सकता है?
कनेक्शन रेगुलर कराने की फीस 50 रुपए है। एक आईडी देनी होगी और वाटर मीटर खरीदना होगा। सदर नगर परिषद कैंट में सदर जोन व गांवों में कुल 44 हजार 893 पानी के कनेक्शन हैं। 14 हजार 412 पानी के कनेक्शन मीटर वाले हैं और 25 हजार से कनेक्शन बिना मीटर के चल रहे हैं, जिन्हें फ्लैट रेट के मुताबिक पानी के चार्जेस देने पड़ रहे हैं।

मीटर और फ्लैट बिल में क्या फर्क है?
जलापूर्ति विभाग मीटर वाले कनेक्शन धारक को 60 रुपए प्रति माह के हिसाब से 360 रुपए छमाही बिल भेजेगा। यदि मीटर नहीं होगा तो यह बिल दोगुना यानी फ्लैट रेट के मुताबिक सालाना 1,440 रुपए का भुगतान करना होगा।

शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के क्या अलग नियम हैं?
जलापूर्ति विभाग शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों से अलग-अलग स्लैब के मुताबिक पानी का बिल तैयार करता है। गांव में 40 रुपए प्रति माह तो शहरी क्षेत्र क्षेत्र में 60 रुपए के हिसाब से पानी का बिल बनता है।

लोगों को जागरूक नहीं कर पाया विभाग, 1 साल में सिर्फ 929 कनेक्शन रेगुलर हुए
जलापूर्ति विभाग ने 1 अगस्त 2020 से लेकर 10 सितंबर 2021 तक पानी का कनेक्शन रेगुलर कराने की स्कीम तो चलाई थी लेकिन लोगों को इसके लिए जागरुक नहीं कर पाया। स्कीम में छूट दी गई थी कि जिन लोगों ने पेंडिंग पानी का बिल नहीं चुकाया है, उन्हें 25 प्रतिशत की छूट मिलेगी। यदि कनेक्शन रेगुलाइज नहीं है तो कनेक्शन निशुल्क में रेगुलाइज कर दिया गया है। इस स्कीम का फायदा सिर्फ 81 कॉमर्शियल व 762 घरेलू कनेक्शन धारकों ने उठाया।

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