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सीएम विंडो पर शिकायत:जिस बच्ची को कोख से जना, उसे गलत हाथों में कैसे जाने दूं, मेरी बेटी दिलाओ: कुंती

अम्बाला2 महीने पहले
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बिहार से अम्बाला आकर अपनी 13 साल की बेटी पाने के लिए संघर्ष कर रही मां - Dainik Bhaskar
बिहार से अम्बाला आकर अपनी 13 साल की बेटी पाने के लिए संघर्ष कर रही मां
  • बिहार से अम्बाला आकर अपनी 13 साल की बेटी पाने के लिए संघर्ष कर रही मां
  • चाइल्ड हेल्पलाइन, बाल संरक्षण आयोग या प्रशासन बच्ची की काउंसलिंग कराए तो सच आ सकता है सामने

बिहार से आई कुंती देवी अपनी 13 साल की बेटी को गलत हाथों से बचाने के लिए 20 दिन से संघर्ष कर रही है। सेक्टर-9 और महिला थाने में जाने कितने चक्कर काट लिए। लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। कुंती हर किसी को अपनी कहानी सुनाती हैं, इस उम्मीद में कि बच्ची वापस दिलवा देंगे।

कुंती बताती हैं कि उनकी 5 बेटियां व 1 बेटा है। 5 बेटियों का लालन-पालन नहीं कर पा रही थी। इसलिए मदद के इरादे से 6-7 साल पहले भाई अनिल 6 साल की भांजी को बिहार से अम्बाला ले आया था। अनिल अम्बाला में रहकर टाइल्स-मार्बल लगाने का काम करता है। अनिल यहां बच्ची को पढ़ा-लिखा रहा था। इसी बीच दो महिलाओं ने बच्ची को गलत इरादे से बहकाया और अपने कब्जे में ले लिया।

भांजी को इन महिलाओं की चंगुल से बचाने के लिए मामा (अनिल) ने संघर्ष शुरू किया। दोनों महिलाओं ने बच्ची को बहला-फुसला कर पुलिस के सामने बयान दिलवा दिए कि मामा उसके साथ छेड़छाड़ करता है। पोक्सो एक्ट में अनिल अब जेल में है। अब बेटी को वापस पाने और भाई को बचाने के लिए कुंती ने बिहार से आकर संघर्ष शुरू किया है। कुंती का कहना है कि दोनों महिलाओं, जिनमें एक आंगनबाड़ी वर्कर है, ने उनकी बेटी को किसी दबाव या बहकावे में रखा हुआ है। बच्ची उसे भी अपनी मां मानने को तैयार नहीं। कुंती ने सीएम विंडो और एसपी को शिकायत देकर बेटी वापस दिलाने की मांग की है।

मां बोली - बच्ची की शक्ल बिल्कुल मेरे जैसी है, कोई भी देखकर बता सकता है कि मेरी बेटी है

मेरा भाई अनिल करीब 15 साल से अम्बाला में रह रहा है। 12 साल पहले वह चंडीगढ़ में काम कर रहा था। तब बिहार की एक महिला जिसके 3 बेटियां व एक बेटा है, ने उससे यह कहकर मदद मांगी थी कि उसका पति नशा करता था और मार-पिटाई करता था और लापता हो गया है।

अनिल ने इस महिला को बिहार के भागलपुर उसकी ससुराल पहुंचाने में मदद की। कुछ समय बाद महिला बिहार से अम्बाला आ गई और अनिल के साथ रहने लगी। 6 साल पहले अनिल मेरी 6-7 साल की बेटी को अपने साथ अम्बाला ले आया। यहां अनिल के साथ रह रही महिला ने बच्ची को स्कूल में डाल दिया और पिता के तौर पर अनिल का और मां के तौर पर खुद का नाम लिखवा दिया। कुछ साल ठीक चला।

करीब सवा साल पहले इस महिला के संपर्क में एक आंगनबाड़ी वर्कर आई। उस आंगनबाड़ी वर्कर की नजर इस बच्ची पर पड़ी। फिर दोनों ने इस बच्ची को गलत काम में धकेलने की साजिश शुरू की। दोनों महिलाओं ने मिलकर अनिल को उसके घर से निकाल दिया और बच्ची अपने पास रख ली। अनिल ने फोन करके मुझे सारी बात बताई तो मैं 5 अप्रैल को बिहार से यहां आई।

महिलाओं में चंगुल में फंसी मेरी बेटी ने मुझे मां मानने से इंकार कर दिया। 6 अप्रैल को दोनों महिलाओं ने हमारे साथ मारपीट की और धमकाया कि बिहार वापस चले जाओ, बच्ची नहीं मिलेगी। यही नहीं पुलिस में शिकायत कर दी। पुलिस ने हमारी तो सुनी नहीं बल्कि मेरे भाई अनिल को अंदर कर दिया। मैंने सारी रात पुलिस चौकी के सामने आंधी-बरसात में काटी और अगले दिन कोर्ट से भाई की जमानत कराई। कई दिन हम इधर-उधर भटकते रहे। फिर बेटी दिलाने के 13 अप्रैल को सीएम विंडोपर शिकायत दी।

15 अप्रैल को शिकायत थाने पहुंची। आरोपी महिलाओं ने बच्ची को ले जाकर महिला थाने में शिकायत दे दी। मेरी बच्ची मुझे दिलवाने की बजाय 19 अप्रैल को पुलिस ने मेरी भाई को फिर गिरफ्तार कर दिया। दोनों महिलाओं ने मेरी बच्ची से ये बयान दिलवा दिया कि मामा उसके साथ छेड़छाड़ करता है। महिला थाने में हमारे बयान हुए।

मैंने उन्हें बताया कि ये मेरी बच्ची है। जबकि उस महिला ने कहा कि मैंने उसे यह बच्ची गोद दे रखी है। उनके कहे पर बच्ची भी मुझे मां नहीं मान रही। मैंने उसे कोख से पैदा किया है, उसकी शक्ल भी मुझसे मिलती है....कोई भी देखकर बता सकता है कि वो मेरी बेटी है। वो मेरी बच्ची को नरक में धकेलना चाहते हैं, उसे बचा लो साहब...।
-जैसा मां कुंती ने सीएम विंडो पर दी शिकायत में लिखा।

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