मंत्री गुर्जर ने वर्करों को पिलाई घुट्टी:शादी-ब्याह में जाएं और लोग कहें कि तुम लोगों ने बेड़ा गर्क कर दिया तो चार बातें

अम्बालाएक महीने पहले
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शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर - Dainik Bhaskar
शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर
  • अम्बाला कैंट के फारुखा खालसा स्कूल में भाजपा का जिला प्रशिक्षण शिविर शुरू

शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने पार्टी वर्करों को सलाह दी कि शादी-बयाह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों में जाएं तो वहां सरकार की बुराई सुनने की बजाय जवाब में चार बातें सुनाएं। हो सकता है वहां कोई कांग्रेसी कहे कि आप लोगों ने बेड़ा गर्क कर दिया, पेपर लीक करवा दिया, नौकरियां बेच दीं। जवाब नहीं दिया तो सरकार पर लगे आरोप लोगों को सच लगेंगे।

गुर्जर ने मंगलवार को अम्बाला कैंट के फारुखा खालसा स्कूल में शुरू हुए भाजपा के दो दिवसीय जिला प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र पर वर्करों को यह घुट्टी पिलाई। मंत्री बोले- किसी भी मंत्री या विधायक को समाज के लोग बुलाते हैं तो यही बोलते हैं आओ जी, बैठो जी, चाय पियो जी और बाकी कोई डिस्कशन नहीं करते, लेकिन आम कार्यकर्ता को रोज समाज में उठना-बैठना है और लोग उनके सामने मन की बात करते हैं।

मंत्री कंवरपाल ने बताए.... वो जवाब जो वर्करों को जनता के सामने देने हैं

1. हुड्डा पैसे देकर नौकरी लगवाकर दिखाएं
पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा बयान दे रहे हैं कि भाजपा सरकार ने पैसे देकर नौकरी देने की दुकान खोल रही है। हुड्डा पैसे देकर नौकरी लगवा कर दिखा दें। हुड्डा सरकार में ही पेपर लीक का सिस्टम बना था। एचपीएससी मामले में सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारी सरकार के पास जांच का
पूरा सिस्टम है।
2. सैलजा ने बोर्ड लगवा दिए थे लेकिन सड़क नहीं बनीं
विकास कार्य भी उन्हीं के होते थे, जिनके किसी से संबंध अच्छे होते थे। पूर्व में मुख्यमंत्री स्टेज पर ही बोल देते थे कि आपने मुझे दिया ही क्या है, जो उम्मीद करते हो। हुड्डा सरकार में कुमारी सैलजा ने रोड बनने से पहले ही बोर्ड लगवा दिए थे, लेकिन काम नहीं हुए। भाजपा ने बोर्ड लगाने की बजाए रोड बनवाए हैं।
3. तीनों कानूनों में किसान गलती नहीं बता सके
एक पूर्व मुख्यमंत्री का उदाहरण देकर गुर्जर बोले कि पहले के एक मुख्यमंत्री में ऐंठ थी और इसी ऐंठ के चलते रास्ता नहीं बदला। रास्ते पर किसानों के विरोध के चलते एसपी को कार्रवाई करने के आदेश दिए। गोली चली और 9 किसान मारे गए थे। भाजपा ने सहनशीलता रखी। तीनों कृषि कानूनों में किसान एक साल तक गलती नहीं बता सके।

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