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  • In The Case Of Molestation In Which Anticipatory Bail Was Not Received From The High Court, The Women's Police Station Granted Bail Without Giving Notice To The Victim.

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल:छेड़छाड़ के जिस केस में हाईकोर्ट से भी अग्रिम जमानत नहीं मिली, उसमें महिला थाने ने बगैर पीड़िता को नोटिस दिए जमानत दे दी

अम्बाला11 दिन पहले
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  • महिला थाना प्रभारी की सफाई- पीड़िता को फोन मिला रहे थे लेकिन स्विच ऑफ था, इसलिए आरोपी को बेल दे दी
  • पीड़िता ने अब गृहमंत्री विज से की शिकायत

छेड़छाड़ के एक मामले में पीड़िता को नोटिस दिए बिना अम्बाला महिला पुलिस थाना ने आरोपी को जमानत दे दी। जबकि 4 अगस्त काे हाईकाेर्ट ने महिला द्वारा दर्ज इसी एफआईआर पर आराेपी नरेंद्र शर्मा उर्फ अमित शर्मा की जमानत याचिका काे खारिज कर दिया था। अब महिला ने गृहमंत्री अनिल विज से शिकायत की है। महिला ने विज को भेजी शिकायत में बताया कि वह हरियाणा सरकार के राजस्व विभाग में कार्यरत है।

पहले वह कैंट के नरेंद्र शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज नहीं कराना चाहती थी, क्याेंकि उसे जब पता चला था कि उसके खिलाफ पहले ही केस दर्ज हैं। महिला का आराेप है कि आराेपी नरेंद्र शर्मा महिलाओं काे किसी न किसी बहाने फंसाकर पैसे ऐंठता है। वह किसी के सैलरी से लोन करवाकर या उनके नाम से फाइनांस करवाकर व नकद राशि लेकर उसे वापस नहीं देता। किसी न किसी तरीके से उनके साथ संबंध बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता है।

पीड़िता का कहना है कि उसने नरेंद्र के खिलाफ 9 अप्रैल को केस दर्ज कराया था। नरेंद्र ने उसे बातों में फंसाकर उससे लोन करवा लिया। जब पिछले साल दिसंबर में उसके पति को लोन के बारे पता चला तो उन्होंने नरेंद्र से पैसे वापस लाने के लिए कहा। वह मार्च में नरेंद्र से पैसे लेने गई तो उसके छेड़छाड़ की और अपशब्द बोले। आराेप है कि जब उसने विरोध किया तो वह माफी मांगने लगा। वह शर्मिंदा होकर वहां से चली गई।

इसके बाद नरेंद्र उसके ऑफिस में आया तथा दो चेक दिए। आरोपी ने जो चेक दिए थे वह बाउंस हो गए। महिला ने कहा कि आरोपी की सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट में जमानत जब्त हो चुकी है, लेकिन पुलिस ने उसे नोटिस दिए बिना जमानत दे दी। महिला ने कहा कि वह अब गृहमंत्री विज के समक्ष पेश होगी, क्योंकि पुलिस ने आईजी और एसपी के गिरफ्तार करने के निर्देश के बाद भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है।

हाईकोर्ट में पहले से आरोपी के खिलाफ धारा 376 के तहत जमानत के लिए मामला विचाराधीन था। पीड़िता का मामला पहुंचने के बाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपी ने पहली पीड़ित महिला से समझौता कर लिया। इसके बाद हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हो गई। पीड़िता के छेड़छाड़ मामले में आरोपी को पुलिस जांच के लिए बुलाया गया था। पीड़िता को फोन किया गया, लेकिन फोन स्विच आॅफ था। इसलिए आरोपी को जमानत दे दी गई, क्योंकि 7 साल तक की सजा वाले केस में थाने में जमानत दी जा सकती है।-देवेंद्र कौर, महिला थाना प्रभारी, अम्बाला।

पीड़ित महिला चार माह से आरोपी की हाईकोर्ट से जमानत खारिज कराने के लिए भाग रही थी। पुलिस ने उस समय आरोपी को जमानत क्यों नहीं दी। जमानत देने से पहले आरोपी के कंडक्ट को देखना चाहिए तथा जमानत देने से पूर्व शिकायतकर्ता को भी नोटिस दिया जाना चाहिए ताकि वह भी जमानत न देने के बारे अपना पक्ष रख सके, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया।-एडवोकेट नवीन मेहता, अम्बाला

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