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आज इंटरनेशनल लेफ्ट हैंडर्स-डे:लेफ्ट हैंडर होना अब अच्छा लगता है, बचपन में खूब पड़ती थी डांट

अम्बाला2 महीने पहले
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  • बाएं हाथ का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों ने बताए अपने अनुभव

शहर में ऐसे सैकड़ों लेफ्ट हैंडर्स हैं, जिन्होंने बचपन में लेफ्ट हैंड से लिखने की आदत की वजह से टीचर्स और पेरेंट्स की खूब डांट सुनी है। वीरवार को इंटरनेशनल लेफ्ट हैंडर्स-डे के माैके पर ऐसे कुछ लाेगाें से बातचीत जिन्हाेंने अपने पेरेंट्स व टीचर से डांट भी खाई, लेकिन अब उन्हें लेफ्ट हैंडर्स हाेना अच्छा लगता है।

हाथ नहीं चलते थे, फिर लेफ्ट हैंड सबसे पहले चला : तुषार
मैं 4 साल का था। मेरे हाथ चलते नहीं थे। फिर मेरी दादी ने मुझे क्ले देकर दाेनाें हाथाें से खेलने काे कहा। मुझसे वे राेज प्रैक्टिस करवाती कि अचानक एक दिन मेरा लेफ्ट हैंड चलने लग गया। लिखने की आदत व हर काम मैं बाएं हाथ से करने लगा। मुझे पेरेंट्स ने राेका नहीं क्याेंकि बड़ी मुश्किल से मेरा हाथ काम करने लगा था। अब भी राइट से ज्यादा मेरा लेफ्ट हैंड एक्टिव है। मुझे याद है मेरा बैचमेट आशीष हुआ करता था। बाएं हाथ से लिखने के कारण मेरी आंसर शीट से वाे पूरी नकल कर लेता था और डांट मुझे पड़ती थी। याद है मैं एसडी विद्या मंदिर में पढ़ता था ताे निबंध लेखन कंपीटिशन के दाैरान मेरी हैंड राइटिंग के लिए टीचर नीलम ठुकराल ने मेरी खूब तारीफ की थी।-तुषार मित्तल, बिजनेसमैन

मम्मी मुझे बेहद डांटती थी : रिंपल
बचपन में मैं लेफ्ट हैंड से लिखा करती थी। मेरी राइटिंग खराब हाे जाती, कई बार शब्दाें में फॉर्मेशन नहीं बन पाती थी ताे मम्मी बेहद डांटती थी। उन्हाेंने मुझे काफी बार राेका। प्रैक्टिस करवाने पर मैंने राइट हैंड से लिखना शुरू किया। लिखना छाेड़कर बाकी सभी काम लेफ्ट हैंड से करती हूं। मेरी छाेटी बेटी अनाहिता गुप्ता ने लिखना शुरू किया ताे मैंने देखा कि वाे लेफ्ट हैंडर है। मैंने उसे नहीं राेका, बल्कि अच्छा लगा कि मेरी आदत उसमें भी है। उसकी राइटिंग सुंदर है। -रिंपल गुप्ता, हाउसिंग बाेर्ड निवासी

कार्ड मेकिंग में मिला था प्राइज : अमरजीत
पेरेंट्स ताे खूब डांटते थे जब मैं बाएं हाथ से लिखा करती थी। लेकिन आदत छूटी नहीं। कई बार अजीब भी लगता था जब गुरुद्वारे में लंगर छक रहे हाेते थे ताे मेरी बाजू दूसरे लाेगाें काे लग जाती थी। तब बुरा लगता था। स्कूल के समय में भी लंच टाइम में ऐसा हाे जाता था। मुझे याद है जब मैं एयरफाेर्स पब्लिक स्कूल में 10वीं में पढ़ती थी ताे डिस्कवरी चैनल की तरफ से कार्ड मेकिंग कॉन्टेस्ट हुआ।

मैंने पार्टिसिपेट किया और मुझे प्राइज भी मिला। उसके बाद मेरे हाथ से बनाए गए कार्ड का डिजाइन गैलरी में सेल के लिए भी किया गया। उस समय मुझे अच्छा लगा कि मैं लेफ्ट हैंडी हूं। मैं पेंटिंग, कूकिंग व आर्टएंड क्राॅफ्ट सबकुछ अपने बाएं हाथ से करती हूं। -अमरजीत काैर, टीचर

जब 9 लिखता हूं तो लोग 4 पढ़ लेते हैं : राेहित
जब काेई कहता है कि लेफ्ट हैंडर हूं ताे सुनकर अच्छा लगता है। लाेगाें से सुना है कि लेफ्ट हैंडर लकी हाेते हैं। लेफ्ट हैंडर बहुत कम हाेते हैं ताे खुशी हाेती है कि मैं कुछ खास लाेगाें में आता हूं। बचपन में मम्मी काे लगता था कि लेफ्ट हैंड से काम ना किया करूं क्याेंकि अच्छा नहीं हाेता है। वैसे ताे अच्छा लगता है लेकिन अक्सर जब मैं 9 लिखता हूं ताे लाेग 4 पढ़ लेते हैं। -राेहित काेछर, बिजनेसमैन

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