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मंत्री पद से हटाया गया:अम्बाला से किए चुनावी वादे पूरे करने से पहले ही गया कटारिया का मंत्री पद

अम्बाला20 दिन पहले
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सांसद रतनलाल कटारिया। - Dainik Bhaskar
सांसद रतनलाल कटारिया।

अम्बाला सुरक्षित सीट से सांसद बने रतनलाल कटारिया को मोदी सरकार-2 में मंत्री बनाने का निर्णय जितना चौंकाने वाला था, अब दो साल बाद हटाने का फैसला भी हैरान करने वाला है। अपनी विवादित टिप्पणियों की वजह से अकसर सुर्खियों में रहने वाले कटारिया खुद को मोदी का हनुमान भक्त और भाजपा को अपनी मां बताते रहे हैं।

अब जल शक्ति और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बातचीत में इतना ही कहा- पार्टी जहां बैठाएगी, वहां बैठेंगे। इस्तीफा क्यों देना पड़ा? इस पर दो टूक बोले- पार्टी ने दिया था, पार्टी ने ले लिया। उनकी आंदोलनरत किसानों पर जंडली में ‘परां जा का मर लेंदे...’ वाली टिप्पणी पर खासा विवाद हुआ था। जिसके बाद कटारिया जब भी अम्बाला आए तब किसानों ने काले झंडे दिखाए।

संसदीय क्षेत्र में सक्रियता कम होने का आरोप लगा विपक्ष उन्हें ‘लापता सांसद’ कहता रहा। वो ज्यादातर सिटी विधायक असीम गोयल के कार्यक्रमों में ही दिखे। कैंट विधायक अनिल विज से पटरी कम बैठी। लिहाजा यहां कम ही दिखे। कटारिया तीसरी बार सांसद बने हैं। 2014 में कांग्रेस के राजकुमार वाल्मीकि और 2019 में कांग्रेस की कद्दावर नेता कुमारी सैलजा को हराया था।

इससे पहले सैलजा ने कटारिया को 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में लगातार दो बार हराया था। तब दोनों ही बार सैलजा यूपीए की मनमोहन सरकार में मंत्री रहीं। राज्यसभा में चले जाने की वजह से सैलजा ने 2014 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था।

कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं ला पाए कटारिया, पत्नी गेल की डायरेक्टर व बेटा एचसीएस ऑफिसर बना
पिछले 2014 व 2019 के चुनाव प्रचार के दौरान कटारिया पिंजौर की एचएमटी कंपनी को बंद होने से बचाने, नारायणगढ़ रेलवे लाइन और बड़ा औद्योगिक प्रोजेक्ट लाने के वादे करते रहे। हालांकि कोई वादा पूरा नहीं हो सका। कटारिया की पत्नी बंतो कटारिया गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में 2018 में बतौर गैर-सरकारी स्वतंत्र डायरेक्टर के रूप में मनोनीत हुईं। जबकि उनके पुत्र चंद्रकांत कटारिया दिसंबर 2019 में हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) में चयनित हुए।

केंद्रीय कैबिनेट में अब तक अम्बाला के 3 सांसद मंत्री रह चुके, मगर एक ने ही कार्यकाल पूरा किया

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि अम्बाला लोकसभा सीट का इतिहास बताता है कि यहां से सांसद रहे तीन व्यक्ति ही केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री बन पाए हैं। 1996 में भाजपा सांसद सूरजभान अटल बिहारी वाजपेयी की पहली सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री बने लेकिन वो सरकार 13 दिन में ही गिर गई थी। भान लोकसभा में डिप्टी स्पीकर बने।

1998 में हुए लोकसभा चुनाव में भान बसपा के अमन कुमार नागरा से हार गए। 1999 में भान की जगह कटारिया को टिकट मिला और वह पहली बार सांसद बने थे। भान उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन भी रहे। 2004 और 2009 में कांग्रेस की कुमारी सैलजा कटारिया को हराकर सांसद बनीं।

पहले कार्यकाल में स्वतंत्र प्रभार वाली केंद्रीय राज्य मंत्री बनीं और दूसरे कार्यकाल में भी कैबिनेट में रहीं। सैलजा 1992 से 95 में कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार में पहले केंद्रीय उप मंत्री, फिर 1995 -96 में केंद्रीय राज्य मंत्री रहीं थी। तब वो सिरसा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ीं थी।

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