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स्वास्थ्य विभाग की टीम लगा रही कैंप:यूनिक हेल्थ आईडी कार्ड से मिलेगी मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, अब तक 3 हजार आईडी बनीं

अम्बाला5 महीने पहले
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लोगों के यूनिक आईडी के फार्म भरती विभाग की टीम। - Dainik Bhaskar
लोगों के यूनिक आईडी के फार्म भरती विभाग की टीम।
  • मरीज को एक अस्पताल से दूसरे जाने के लिए नहीं संभालना पड़ेगा रिकॉर्ड

जिस व्यक्ति की आईडी बनेगी उसके पास आधार लिंक मोबाइल नंबर होना जरूरी, खुद भी कर सकते हैं जनरेट

आधार कार्ड, पैन कार्ड व फैमिली आईडी जैसे जरूरी दस्तावेजों की तरह अब एक अहम दस्तावेज यूनिक हेल्थ आईडी (यूएचआईडी) कार्ड होगा। केंद्र सरकार के डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत बनाए जा रहे इस कार्ड में व्यक्ति की सेहत से जुड़ी सभी जानकारियां रहेंगी। मरीज को सिविल अस्पताल, पीजीआई या अन्य किसी भी हेल्थ संस्थान इलाज के लिए जाना हो तो उसे अपनी ओपीडी की हिस्ट्री व टेस्ट की रिपोर्ट साथ लेकर जाने की जरूरत नहीं रहेगी।

इस कार्ड में ही ये सारी जानकारियां रहेंगी। अस्पताल में इस आईडी काे डालते ही डाॅक्टर के सामने मरीज के पूरी मेडिकल हिस्ट्री आ जाएगी। इस यूनिक हेल्थ आईडी कार्ड से सेहत का एक डाटा बेस तैयार हो जाएगा। जिले में इसके लिए तेजी से काम चल रहा है। अभी तक जिले में 3 हजार यूनिक आईडी कार्ड बनाए भी जा चुके हैं।

सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि पीएचसी, सब सेंटर व हेल्थ सेंटर स्तर पर ऐसे कार्ड बनाए जा रहे हैं। सिविल अस्पताल में एनसीडी विंग में यूएचआईडी कार्ड बनाए जा सकते हैं। जिले में घूम रही स्वास्थ्य विभाग व मेदांता की मल्टीस्पेशियलिटी मेडिकल यूनिट की बसाें में भी ये कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा नेशनल हेल्थ डिजिटल हेल्थ मिशन (एनडीएचएम) की वेबसाइट htpps://healthid.ndhm.gov.in/ register पर जाकर भी यूएचआईडी कार्ड बनवाया जा सकता है। डॉ. कुलदीप सिंह के मुताबिक जब सभी लोगों की यूएचआईडी बन जाएंगी तक स्वास्थ्य विभाग का स्वरूप बदला नजर आएगा।

14 अंकाें की डिजिटल यूनिक आईडी हाेगी

नेशनल हेल्थ मिशन ऑफिस की डॉ. नीनू गांधी ने बताया कि फैमिली आईडी की तर्ज पर यह आईडी बन रही है। इसमें मरीज को 14 डिजिट का यूनिक आईडी नंबर मिलेगा। इसके लिए आधार लिंक मोबाइल नंबर होना जरूरी है। आईडी बन जाने के बाद अगर किसी मरीज को सिविल अस्पताल से पीजीआई रेफर किया जाएगा तो वहां सिर्फ उसकी यूएचआईडी ही देखी जाएगी। जिसमें मरीज की सारी मेडिकल हिस्ट्री रहेगी। ऐसे मरीज को अपने दस्तावेज लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

डॉक्टर को यूएचआईडी से ही पता चल जाएगा कि मरीज ने पहले किस डॉक्टर को दिखाया, कौन सी दवाई ली, क्या टेस्ट हुए और क्या इलाज चलाया है। इससे हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल हो जाएगा। आगे चलकर आयुष्मान जैसी सरकार की दूसरी योजनाएं इस कार्ड से जुड़ेंगी। इस आईडी से पता चल जाएगा कि मरीज को पहले आयुष्मान भारत मिशन योजना का लाभ मिल रहा है या नहीं।

डॉ. नीनू गांधी ने बताया कि सोमवार को ऐसी 2 हजार आईडी बनाई गई हैं। ये आईडी अस्पताल में एनसीडी विंग व फील्ड में कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर के द्वारा, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर व सब सेंटरों पर आईडी बनाई जा रही हैं। सीएससी व कैपों में भी आईडी जनरेट की जा रही है। डॉ. गांधी ने बताया कि इसे कोविन एप के साथ जोड़ने की कोशिश भी चल रही है।

ऐसे बना सकते हैं अपना यूनिक हेल्थ आईडी कार्ड

  • नेशनल हेल्थ डिजिटल हेल्थ मिशन(एनडीएचएम) की वेबसाइट htpps://healthid.ndhm.gov.in/ register पर जाकर भी यूएचआईडी कार्ड बनवाया जा सकता है। वेबसाइट पर क्लिक करने के बाद जनरेट वाया आधार व जनरेट वाया ड्राइविंग लाइसेंस का ऑप्शन खुलेगा। जनरेट वाया आधार पर क्लिक करते ही आधार कार्ड का नंबर डालने का ऑप्शन मिलेगा। साथ ही आपसे सहमति मांगी जाएगी। सहमत हैं तो आई एग्री पर क्लिक करके सब्मिट कर दें।
  • सबमिट करने के बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। ओटीपी वेरिफाई करना होगा। साथ ही मोबाइल नंबर को भी वेरिफाई करना होगा। इसके बाद मोबाइल पर एक और ओटीपी आएगा। इस ओटीपी कोड को डालकर एक बार फिर वेरिफाई करना पड़ेगा। इसके बाद मोबाइल पर 14 अंकों की हेल्थ आईडी नंबर के साथ एक और मैसेज मिलेगा।
  • मैसेज में दिए लिंक के जरिए लॉग-इन कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित का नाम, जन्म तिथि जैसी जानकारियां मांगी जाएगी। सभी जानकारियां भरने के बाद सबमिट पर क्लिक करें। इसके बाद हेल्थ आईडी कार्ड जनरेट हो जाएगा। इस कार्ड में आधार कार्ड पर लगी फोटो खुद ही आ जाएगी।
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