नहीं रुक रहा अवैध खनन:एक साल से खनन का काम बंद, फिर भी 7 माह में अवैध खनन के 41 मामले दर्ज

नारायणगढ़2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
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  • खनन जोन की बोली न करने से सरकार काे हाे रहा राजस्व का नुकसान

क्षेत्र में एक साल से खनन का काम बंद है। इसके बावजूद खनन विभाग की शिकायत पर पुलिस ने 7 महीने में अवैध खनन करने वालों के खिलाफ 41 केस दर्ज किए हैं। लाख दावों के बाद भी सरकार अवैध खनन पर रोक नहीं लगा सकी है। वहीं, एक साल बाद भी खनन जोन की बोली नहीं की जा सकी।

पिछले साल 2 जुलाई को सरकार ने खनन कंपनी को टर्मिनेट किया था, जिसके बाद रेत-बजरी के दाम आसमान छूने लगे और खनन माफिया क्षेत्र में सरकारी तंत्र पर हावी हो गया। सरकार और अधिकारियों के बड़े-बड़े दावे फेल हो गए। इसी साल जनवरी से 31 जुलाई तक खनन विभाग ने 41 मामले भी दर्ज करवाए हैं। इनमें अधिक्तर वह लोग हैं जिनके वाहन अवैध खनन करते पकड़े गए थे। विभाग द्वारा लगाए गए भारी जुर्माने को वह भर नहीं सके, जिसके बाद विभाग ने उनके खिलाफ माइनिंग एक्ट के तहत केस दर्ज करवाया है।

एमडीएल दिया लेकिन कच्चे माल का इंतजाम नहीं

खनन जोन में लगे स्क्रीनिंग प्लांटों को विभाग ने एमडीएल जारी किया है जिसकी विभाग 2 साल की फीस 1.03 लाख रुपए और प्रदूषण विभाग 60 हजार रुपए वसूल करता है। यानि इस कारोबार को एक तरह से इंडस्ट्री के रूप में घोषित किया गया है, जबकि इन प्लांटों के लिए कच्चे माल का इंतजाम सरकार या विभाग नहीं कर रहा है। इससे सरकार को राजस्व की हानि हो रही है और जनता को महंगे दामों में रेत-बजरी खरीदने पड़ रहे हैं।

3 गुना बढ़ गए दाम

जुलाई 2020 से पहले धुले हुए रेत की कीमत प्लांट पर 8 रुपए फुट थी। यह अब 20 रुपए फुट हो गई है। वहीं बजरी 6 रुपए फुट से 18 रुपए पर पहुंच गई है। इसके बावजूद सरकार जनता को राहत पहुंचाने के प्रयास नहीं कर सकी।

खनन जोन का सर्वे करवाया जा चुका है, जिसकी रिपोर्ट भी आला अधिकारियों को भेज दी है। जल्द ही आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
भूपेंद्र सिंह, जिला खनन अधिकारी।

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