1857 की क्रांति को समर्पित पंक्तियां:शहीद स्मारक में इतिहास को डिजिटल, वर्चुअल व रियल तरीके से प्रदर्शित करेगी मुंबई की टीम

अम्बालाएक महीने पहले
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कैंट में मुंबई से आई टीम की प्रस्तुति देखते गृहमंत्री अनिल विज। - Dainik Bhaskar
कैंट में मुंबई से आई टीम की प्रस्तुति देखते गृहमंत्री अनिल विज।
  • फिल्म कलाकार अतुल तिवारी के नेतृत्व में आई टीम ने गृहमंत्री विज को दी वीडियो प्रस्तुति

जीटी रोड पर निर्माणाधीन शहीद स्मारक में इतिहास को प्रदर्शित करने के लिए शनिवार को मुंबई से फिल्म कलाकार व लेखक अतुल तिवारी के नेतृत्व में आई टीम ने गृहमंत्री अनिल विज को अपनी प्रस्तुति दी। वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से गृहमंत्री को उनके निवास पर जानकारी दी गई कि स्मारक में इतिहास को डिजिटल, वर्चुअल व रियल तरीके से कैसे प्रदर्शित किया जाएगा। अतुल तिवारी ने 1857 की क्रांति को समर्पित पंक्तियां ‘बात-बात में भारत जुड़ गया बंधे, सभी एक सूत, रोटी और कमल का फूल बन गए क्रांति के दूत’ सुनाई, जिसे गृहमंत्री ने सराहा। अतुल बॉलीवुड की चर्चित फिल्म थ्री इडियट व अन्य फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। मुंबई से आई टीम ने बताया कि स्मारक में अलग-अलग तरीकों से कैसे क्रांति के इतिहास को प्रदर्शित किया जा सकता है।

विज ने कहा कि 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम को कभी सैनिक विद्रोह तो कभी कुछ और नाम दिया गया, लेकिन वास्तव में यह पूरी तरह सुनियोजित अभियान था। रोटी और कमल इस अभियान की खासियत थे, जिससे अंग्रेज भी हैरान रह गए थे।

वे कमल और रोटी के निहितार्थ समझ ही नहीं सके थे। शहीदी स्मारक में इसी ‘रोटी और कमल’ को बखूबी तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मेमोरियल टावर कमल के आकार का होगा जिस पर बड़ी स्क्रीन के जरिए इतिहास की जानकारी दी जाएगी। शहीद स्मारक में इतिहास को 3 चरणों में प्रदर्शित किया जाएगा। पहले चरण में दिखाया जाएगा कि अम्बाला में 1857 की क्रांति कैसे उत्पन्न हुई।

उस समय सियालकोट, अम्बाला व अन्य स्थान पर कारतूस डिपो होते थे। अम्बाला में दूर से सैनिक चर्बी वाले कारतूस लेने आते थे। ऐसे प्रमाण मौजूद हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि मेरठ से पहले ही अम्बाला में सैनिकों ने जंग शुरू कर दी थी। मुंबई से आई टीम में डिजाइनर हिमांशु, पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन रितेश अग्रवाल, निर्माण एजेंसी के कांट्रेक्टर अभिमन्यु मौजूद थे।

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