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आइडिया रुपया हकीकत चवन्नी:नगर निगम 23 करोड़ का प्रॉपर्टी टैक्स आने की उम्मीद कर रहा, संस्थान कह रहे ये सर्वे ही गलत

अम्बाला2 दिन पहले
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  • नगर निगम ने प्राइवेट एजेंसी के सर्वे के आधार पर तैयार की 100 बड़े डिफॉल्टरों की लिस्ट
  • इस लिस्ट में कई ट्रस्ट, शिक्षण संस्थान, अस्पताल और सरकारी भवनों के नाम शामिल

प्राइवेट एजेंसी के सर्वे के आधार पर नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स के लिए 100 बड़े डिफॉल्टरों की लिस्ट बनाकर बैठा है। इनसे 23 करोड़ रुपए आने का अनुमान है, लेकिन हकीकत अलग है। इस लिस्ट में शामिल कई बड़ी संस्थाएं इस सर्वे से हैरान-परेशान हैं। ज्यादातर ने निगम के पास आपत्ति जता दी है। डीएवी काॅलेज की तरफ 45 लाख टैक्स दिखाया है जबकि प्रबंधन का कहना है कि गलती से संस्थान की 2 आईडी बना दी। वहीं, मिशन अस्पताल की तरफ 29 लाख का टैक्स नोटिस दिखाया है जबकि प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल चैरिटेबल है और कोई टैक्स नहीं बनता। सैनी हाई स्कूल 75 हजार टैक्स भर चुका है लेकिन 24 लाख का नोटिस दिया है।

डीएवी कॉलेज-56 लाख- प्रिंसिपल बोले-कॉलेज की 2 आईडी बना दी

डीएवी काॅलेज के प्रिंसिपल डॉ. सलिल दोसाज बताते हैं कि उनके संस्थान की पहले एक ही आईडी होती थी, लेकिन सर्वे के दौरान 2 आईडी बना दी गई। जब उनके पास इनका 56 लाख का नोटिस आया तब हैरानी हुई। जब कागजात देखे तो हकीकत सामने आई। सरकार की पाॅलिसी है कि जिस संस्थान के पास 5 एकड़ से ज्यादा जमीन है तो उसका एकमुश्त 3.75 लाख रुपए ही प्रॉपर्टी टैक्स आ सकता है। टैक्स की एक आईडी डिलीट करने के लिए उन्होंने नगर निगम कमिश्नर को रिप्रेजेंटेशन दिया है।

सैनी हाई स्कूल-24 लाख- प्रधान बोले-हम तो 75 हजार टैक्स जमा करा चुके

अम्बाला सैनी सर्कल सभा के प्रधान सतीश सैनी कहते हैं कि पिछले साल उनके पास स्कूल का भारी भरकम प्रॉपर्टी टैक्स का नोटिस आया था। सभा कमिश्नर से मिली तो यह टैक्स 75 हजार रुपए रह गया था। उन्होंने इसे पिछले साल ही भर दिया था। सैनी सभा व स्कूल की अलग-अलग आईडी बनाई है। सैनी स्कूल गरीब बच्चों का स्कूल है। विदेश में समाज के जो लोग रहते हैं, वे ही चंदा भेजते हैं। तभी स्कूल टीचर्स को सैलरी दी जाती है।

मिशन अस्पताल-29 लाख- निदेशक बोले-चैरिटेबल अस्पताल का तो शून्य टैक्स
मिशन अस्पताल के निदेशक डॉ. सुनील सादिक कहते हैं कि उनका अस्पताल चैरिटेबल है, इसलिए प्रॉपर्टी टैक्स हमेशा शून्य होता है, लेकिन पिछले साल सर्वे के दौरान गलती से अस्पताल का प्रॉपर्टी टैक्स 29 लाख से ज्यादा दिखा दिया है। जबकि इससे पहले कभी प्रॉपर्टी टैक्स नहीं आया। वे कमिश्नर से मिले थे। उन्होंने आश्वस्त किया था कि जो तकनीकी गलती हुई है, उसे ठीक कर दिया जाएगा।

जीआरएसडी स्कूल-45 लाख- प्रबंधन बोला-हमने निगम को सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग दे दी

जीआरएसडी स्कूल प्रबंधन से जुड़े विनोद गर्ग कहते हैं कि निगम ने 45 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स बनाया है। स्कूल में बच्चे गरीब व मध्यम परिवार से आते हैं। कमिश्नर को सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग दी गई है। इस रूलिंग में स्पष्ट है कि स्कूली शिक्षण संस्थानों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूल नहीं किया जा सकता। इसी तरह पंचायत भवन के 26.64 लाख के प्रॉपर्टी टैक्स पर उन्होंने कहा कि यह जगह सरकार को एक रुपए की लीज पर दी गई है। टैक्स तो सरकार को ही अदा करना है।

खालसा हाई स्कूल-11.45 लाख- उपप्रधान बोले-लंबे समय से स्कूल का चार्ज सरकार के पास था
सिटी में कोर्ट रोड स्थित खालसा हाई स्कूल प्रबंधक कमेटी के वाइस प्रधान हरपाल सिंह पाली ने बताया कि पिछले लम्बे समय से स्कूल का चार्ज सरकार के पास था। उनके पास लाॅकडाउन से पहले ही चार्ज आया है। काेराेना के कारण स्कूल अभी तक बंद ही था। निगम के प्रॉपर्टी टैक्स काे लेकर उन्हें काेई नाेटिस अभी तक नहीं मिला है। वहीं, निगम की सूची में स्कूल का टैक्स 11,45,638 लाख दर्शाया गया है।

ठाकुरद्वारा ट्रस्ट-52 लाख- सचिव बोले-दुकानों से कुछ सौ किराया आता है, टैक्स लाखों का

मूर्ति श्री रामचंद्र जी महाराज ट्रस्ट ठाकुरद्वारा कलां तालाब नौरंगराय अम्बाला शहर सचिव विनाेद गर्ग ने बताया कि ट्रस्ट की करीब 200 दुकानें हैं, जाेकि लीज पर दी गई हैं। निगम का जाे भी प्रॉपर्टी टैक्स बनता है, वह दुकानाें के किरायेदाराें पर ही देय बनता है। अगर दुकानदार प्रॉपर्टी टैक्स अदा नहीं करते ताे निगम उनकी प्रॉपर्टी कल ही बजाए आज ही सील कर दें, इससे ट्रस्ट काे काेई आपत्ति नहीं हाेगी, क्याेंकि दुकानदार मंदिर काे काफी कम किराया दे रहे हैं और उनका लाखाें रुपए का टैक्स ट्रस्ट क्याें देगा। निगम की सूची अनुसार तीन जगह टैक्स दर्शाया गया है, जाेकि 52,33,788 बनता है।

कांग्रेस भवन-9 लाख- प्रवक्ता बोले-रि-असेस्मेंट के लिए लिखा था, नहीं हुआ

कांग्रेस के प्रवक्ता ने बताया कि निगम ने सिटी के कांग्रेस भवन काे 9,22,613 लाख का प्रॉपर्टी टैक्स नाेटिस भेजा था, जाेकि काफी ज्यादा भेज दिया था। टैक्स काे रि-असेस्मेंट करवाने के लिए निगम काे लिखकर दिया था। मगर अभी तक निगम ने रि-असेस्मेंट करके नहीं दिया।

एजेंसी ने जो सर्वे किया है, उसी के आधार पर प्राॅपर्टी टैक्स के बिल भेजे गए हैं। अगर किसी के पास गलत बिल आ रहे हैं तो वह नगर निगम कमिश्नर के पास अपील कर सकते हैं।-बलबीर सिंह, टैक्स सुपरिंटेंडेंट, नगर निगम, सिटी

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