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मेडिकल काॅलेज बनाने के तैयारी:मेडिकल काॅलेज के लिए चाहिए 20 एकड़ से ज्यादा जमीन, मिशन अस्पताल के पास 32 एकड़

अम्बाला9 दिन पहले
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  • 137 साल पुराने फिलाडेल्फिया मिशन अस्पताल को मेडिकल काॅलेज बनाने के लिए जल्द होगी गवर्निंग बॉडी की बैठक
  • काॅलेज बना तो मेडिकल पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों व मरीजों को मिलेगा लाभ

फिलाडेल्फिया मिशन अस्पताल को मेडिकल काॅलेज में तब्दील करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने तैयारी शुरू कर दी है। आगामी दिनों में अस्पताल की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग बुलाई है ताकि अस्पताल को काॅलेज में तब्दील करने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जा सके। मिशन अस्पताल को मेडिकल काॅलेज का दर्जा मिलता है तो यहां मेडिकल विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा और साथ ही चिकित्सीय सुविधाओं में इजाफा होगा।

बता दें कि शनिवार को मिशन अस्पताल के निदेशक डाॅ. सुनील सादिक के नेतृत्व में चर्च ऑफ नार्थ इंडिया राइट रेवरेंड के चेयरमैन एवं बिशप डॉ. वारिस मसीह ने गृह मंत्री विज से मुलाकात कर मेडिकल काॅलेज बनाने की मांग रखी थी। गृह मंत्री ने सहमति जताते हुए अस्पताल प्रबंधन को आवेदन करने को कहा था। अब गवर्निंग बॉडी की मीटिंग बुलाई जाएगी। डाॅ. सादिक ने बताया कि मिशन अस्पताल में मेडिकल काॅलेज के लिए कम से कम 20 एकड़ जमीन की जरूरत होती है। मिशन अस्पताल के पास इस समय 32 एकड़ जमीन है। व्यापक जगह होने की वजह से यहां बिल्डिंग व अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर भी भविष्य में बढ़ाया जा सकता है। अस्पताल परिसर में ही इस समय नर्सिंग स्कूल भी चलाया जा रहा है।

ये सुविधाएं चाहिए मेडिकल काॅलेज के लिए

मेडिकल काॅलेज स्थापित करने के लिए सोसाइटी या चैरिटेबल संस्था का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, मेडिकल काॅलेज में 250 से 300 बेड की सुविधा जरूरी ढांचे के साथ उपलब्ध होनी चाहिए। इसके अलावा काॅलेज के लिए टीचिंग कैंपस होना चाहिए। काॅलेज में लेक्चर थियेटर, परीक्षा हॉल कम ऑडिटोरियम, सेंट्रल लाइब्रेरी, होस्टल, रेजिडेंट क्वार्टर, ओपीडी, क्लीनिकल मेटीरियल होना चाहिए। इसके अलावा पैरामेडिकल व नॉन टीचिंग स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ व टीचिंग फैकल्टी पूरी होनी चाहिए।

ऐसे मिलेगी मेडिकल काॅलेज के लिए अनुमति

मेडिकल काॅलेज के लिए पहले प्रदेश सरकार से एनओसी और स्थानीय यूनिवर्सिटी से अनुमति जरूरी है। अनुमति मिलने पर केंद्र सरकार के अधीन मेडिकल काउंसिल कमेटी से भी अनुमति चाहिए। इनकी अनुमति मिलने पर ही काॅलेज को प्रारंभ किया जा सकता है। मेडिकल काॅलेज की शुरुआत 250 बेड स्ट्रेंथ से हो सकती है जबकि आगामी एक वर्ष में यह 300 होनी चाहिए।

1883 में फिलाडेल्फिया अमेरिकन मिशनरी ने डिस्पेंसरी से की थी शुरुआत

सन् 1883 में ब्रिटिश हुकूमत के समय डाॅ. जेसिका कार्लटन की देखरेख में फिलाडेल्फिया अमेरिकन मिशनरी द्वारा 2 कमरों में स्थित डिस्पेंसरी से इसकी शुरुआत की गई थी। स्थापना के 2 वर्ष बाद ही इसे बड़ी बिल्डिंग में से शिफ्ट किया गया। 1894 में डाॅ. कार्लटन द्वारा एक छोटा अस्पताल बनाया गया जोकि बाद में पुराना अस्पताल के नाम से जाना गया। बाद में इसे फिलाडेल्फिया हॉस्पिटल फॉर वुमेन का नाम दिया गया जोकि 1901 में बनना शुरू हुआ। 1924 में नर्सिंग स्कूल व 45 बेड का अस्पताल स्थापित किया गया। यहां तब 2 मिशनरी डॉक्टर, नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट व 10 हिंदुस्तानी स्टाफ था। 1934 में पुरुषों का इलाज भी अस्पताल में आरंभ किया गया। विभाजन के समय अस्पताल में रिफ्यूजी कैंप तक लगाए गए और चिकित्सीय सुविधा प्रदान की गई। 1951 में अस्पताल को 150 बेड का किया गया। 1970 तक फिलाडेल्फिया अस्पताल का पूरा प्रबंधन भारतीय निदेशकों द्वारा संभाल लिया गया था।

अस्पताल को मेडिकल कालेज में तब्दील करने के लिए गवर्निंग बॉडी की मीटिंग जल्द बुलाई गई है। तमाम औपचारिकताएं पूरी कर जल्द आवेदन किया जाएगा। मिशन अस्पताल इस समय कोरोना महामारी के समय बेहतर इलाज दे रहा है। डा. सुनील सादिक, निदेशक, फिलाडेल्फिया अस्पताल, अम्बाला सिटी।

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