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टि्वनसिटी में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा टैक्स पेंडिंग:बकाया टैक्स वसूली में अब होगी सख्ती, निगम आयुक्त व नप ईओ को मिले कलेक्टर के अधिकार

अम्बालाएक महीने पहले
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नगर परिषदों के ईओ को सहायक कलेक्टर द्वितीय श्रेणी के अधिकार प्रदान किए गए हैं । - Dainik Bhaskar
नगर परिषदों के ईओ को सहायक कलेक्टर द्वितीय श्रेणी के अधिकार प्रदान किए गए हैं ।
  • बकायादारों पर अब निगम व नप अधिकारी कर सकेंगे सख्त कार्रवाई, जुर्माने से लेकर जेल भेजने तक के अधिकार मिले

टि्वन सिटी में बकाया टैक्स वसूली अब पहले से ज्यादा सख्ती से होगी। प्राॅपर्टी टैक्स, दुकानों का किराया व अन्य बकाया शुल्क को वसूलने के लिए प्रदेश सरकार ने निगम आयुक्तों व नगर परिषद के ईओ को कलेक्टर के अधिकार प्रदान कर दिए हैं।

इसका सीधा असर टैक्स कलेक्शन पर पड़ेगा क्योंकि अब तक निगम आयुक्तों व ईओ के पास टैक्स या अन्य शुल्क अदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की सीमित पॉवर होती थी जोकि अब पहले से ज्यादा बढ़ जाएगी।

वीरवार को ही प्रदेश के मुख्य सचिव ने हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने पंजाब भू-राजस्व अधिनियम 1887 की विभिन्न धाराओं के तहत राज्य के सभी जिला नगर निगम आयुक्तों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में कलेक्टर के अधिकार प्रदान किए हैं, ताकि हरियाणा नगर पालिका अधिनियम 1973 के तहत भू-राजस्व के बकाया करों, शुल्कों की वसूली कर सके।

नए आदेशों के तहत नगर निगम कमिश्नर को कलेक्टर प्रथम श्रेणी के अधिकार प्रदान किए हैं जबकि इसी प्रकार नगर परिषदों के ईओ को सहायक कलेक्टर द्वितीय श्रेणी के अधिकार प्रदान किए गए हैं । इसके अलावा निगम के अतिरिक्त और संयुक्त आयुक्त को सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी की शक्तियां दी हैं।

नए अधिकार मिलने से अब निगम कमिश्नर और ईओ टैक्स डिफाल्टरों पर सीधी कार्रवाई कर पाएंगे साथ ही उनके खिलाफ पहले से ज्यादा सख्त फैसले ले सकेंगे। अब तक वह केवल नोटिस देने तक ही सीमित थे, जबकि पेनेल्टी या सीलिंग आदि की प्रक्रिया के लिए उन्हें जिला कलेक्टर या संबंधित क्षेत्र के एसडीएम की अनुमति लेनी पड़ती थी जिसमें काफी समय व्यर्थ तक हो जाता था।

ज्यादा कलेक्टर पावर से ज्यादा अधिकार

  • कलेक्टर एक सिविल अदालत लगाकर मामले की सुनवाई कर सकता है।
  • बकाया वसूली के लिए संपत्ति की सीलिंग, संपत्ति की बिक्री, बकाया राशि पर ब्याज लगाना कर सकता है।
  • किसी मामले में जांच बिठाना व सुनवाई का प्रावधान है।
  • सजा देने का प्रावधान है।

कितनी प्राॅपर्टी, कितनी कलेक्शन

  • सिटी नगर निगम कैंट नगर परिषद
  • किराए की दुकानें 953 933
  • दुकानों का किराया मासिक 15 लाख 14 लाख
  • प्रापर्टी रिहायशी व कॉमशिर्यल 99 हजार 80 हजार
  • प्राॅपर्टी टैक्स 20 करोड़ 9 करोड़

सिटी और कैंट में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया

सिटी निगम व कैंट परिषद में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा प्राॅपर्टी टैक्स पेंडिंग है। बीते वर्ष डिफाल्टरों पर लॉकडाउन की वजह से मामले में कार्रवाई अधर में लटक गई। अभी डिफाल्टरों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए निगम व परिषद को एसडीएम या डीसी से अनुमति लेनी पड़ती थी, मगर अब कलेक्टर पॉवर मिलने से सीधे कार्रवाई कर सकेंगे।

20 तक तैयार होगा पोर्टल, कर सकेंगे आवेदन

लीज प्राॅपर्टी कब्जाधारकों को उनकी जमीन फ्री होल्ड करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल खुलने का इंतजार है। बताते हैं कि आगामी 20 जून तक पोर्टल ओपन हो जाएगा जिस पर लीज प्राॅपर्टी के कब्जाधारक व 20 साल से ज्यादा पुराने किराएदार प्राॅपर्टी हो फ्री होल्ड कराने के लिए आवेदन कर पाएंगे। बता दें कि सरकार ने एक जून से 20 वर्ष से ज्यादा पुरानी लीज व किराए की प्राॅपर्टी को फ्री होल्ड करने की घोषणा की थी।

अधिकार मिलने पर यह बोले पूर्व पार्षद

  • पूर्व पार्षद कमल किशोर जैन ने कहा कि कलेक्टर अधिकार मिलने पर डिफाल्टर को सजा देने तक का प्रावधान मिलेगा। बकाया वसूली पहले से बेहतर होगी व रिकवरी रेट तेज होगा। नप अधिकारियों अनुमति लेने के लिए डीसी व एसडीएम कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
  • बकाया वसूली के लिए कलेक्टर पॉवर मिलने से रिकवरी तेज होगी। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पॉवर मिलने पर अधिकारी इसका गलत उपयोग न करें। रिकवरी रेट को मॉनिटर करना होगा और जहां बकाया राशि की रिकवरी नहीं वहां अधिकारियों पर कार्रवाई का भी प्रावधाना रखना चाहिए।
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