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स्वामित्व योजना:कलेक्टर रेट पर आपत्ति, हाईकोर्ट पहुंचे लीज हाेल्डर

अम्बालाएक महीने पहले
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याेजना काे लेकर आपत्ति जताते इनेलाे नेता ओंकार सिंह। - Dainik Bhaskar
याेजना काे लेकर आपत्ति जताते इनेलाे नेता ओंकार सिंह।
  • ऑनलाइन पोर्टल पर लीज कब्जाधारकों को आवेदन अपलोड करने में आ रही परेशानी

नगर परिषद की दुकानों के 20 साल से ज्यादा पुराने किराएदार एवं लीज प्राॅपर्टी कब्जाधारकों के लिए शुरू की गई शहरी निकाय की स्वामित्व योजना में पेंच फंस गया है। कैंट के लीज प्राॅपर्टी कब्जाधारक पहले ही दबी जुबान में योजना में और रियायत की मांग सरकार से कर रहे थे, मगर अब उन्होंने हाईकोर्ट का याचिका लगा दी है। जल्द इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई भी हो सकती है।

बुधवार इनेलो ने खुलकर इस योजना का विरोध जताया और कहा कि हाईकोर्ट से मुख्य तौर पर कलेक्टर रेट में रियायत देने की मांग की जाएगी ताकि लोग जमीन का मालिकाना हक हासिल कर सकें। उन्होंने कहा हाईकोर्ट में अभी केस दायर होना है जिसके बाद ही सुनवाई की तारीख तय होगी।

वहीं, ऑनलाइन पोर्टल लीज प्राॅपर्टी कब्जाधारकों के लिए आफत बन गया है। बार-बार पोर्टल पर अप्लाई करने के बावजूद भी आवेदन अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। केवल नप दुकानों के किराएदारों के आवेदन ही अपलोड हो रहे हैं।

इनेलो ने योजना पर जताई आपत्ति, कहा- करोड़ों रुपए देने होंगे प्राॅपर्टी अपने नाम कराने के लिए

इनेलो के प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह ने कहा कि योजना में कई विसंगतियां हैं। अर्बन लोकल बॉडी के पोर्टल में कैंट का कॉलम खुलते ही यह ओल्ड ग्रांट या लीज प्राॅपर्टी की कोई जानकारी नहीं देता। पोर्टल में 1 हजार आवेदन ही प्रति सप्ताह लिए जाते हैं जिसके बाद पोर्टल अपने आप नया आवेदन नहीं लेता। यानि पूरे प्रदेश में एक माह में केवल 4 हजार आवेदन ही पोर्टल पर किए जा सकते हैं जोकि कम हैं।

पोर्टल की समय सीमा पर भी कुछ स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा इनेलो सरकार के समय सन् 1999-2004 के समय कैंट से अनिल विज विधायक थे। तब 13 कॉलोनियां जो सरकारी सी क्लास लैंड पर बसी हुई थी, जिनमें बाजीगर कॉलोनी, मूड़ा मंडी, गुजराती कॉलोनी, डेह काॅलोनी, धक्का बस्ती, 4 नंबर,6 नंबर आदि शामिल हैं, वो मात्र 140 रुपए जमीन की कीमत व 160 रुपए विकास शुल्क लेकर कब्जाधारियों को हस्तांतरण कर दी गई थी।

मगर अब कलेक्टर रेट इतना ज्यादा है जिससे आम व्यक्ति जमीन को फ्री होल्ड कराने बारे सोच नहीं सकता। उन्होंने कहा यह नीति हरियाणा के लिए है, लेकिन कैंट की स्थिति अलग है और इनमें सरकार को विशेष रियायत यहां के लोगों को प्रदान करनी चाहिए। इनेलो ने कलेक्टर रेट में ज्यादा छूट देने, वैध कब्जाधारियों को निशुल्क या मात्र 200 रुपए प्रति वर्गगज लेकर उन्हें मालिकाना हक देने, शिक्षण संस्थानों व धर्म स्थानों के लिए पॉलिसी स्पष्ट करने की मांग की है।

उन्होंने कहा यह नीति शास्त्री कॉलोनी, कस्तूरबा कॉलोनी, ट्रिब्यून कॉलोनी व शिक्षण संस्थान जैसे एसडी कॉलेज, जीएमएन कॉलेज, खालसा स्कूल व अन्य स्कूलों पर लागू होगी या नहीं स्पष्ट नहीं है। यदि इन पर योजना लागू होगी तो एसडी कॉलेज जिसके पास लगभग 16 एकड़ जमीन है, उसको कलेक्टर रेट 42 हजार रुपए प्रति वर्गगज के हिसाब से 50 प्रतिशत छूट के पश्चात लगभग 175 करोड़ रुपए जमा करवाने होंगे जोकि अपने आप मे एक मजाक है। ऐसी स्थिति में कई कब्जाधारक प्राॅपर्टी को फ्री होल्ड ही नहीं कराना चाहेंगे।

लीज कब्जाधारक नहीं कर पा रहे आवेदन
कैंट में लीज प्राॅपर्टी के कब्जाधारकों के लिए ऑनलाइन पोर्टल ही परेशानी का सबब बन गया है। प्राॅपर्टी होल्डरों के अनुसार पोर्टल पर जमीन से जुड़े पूरे दस्तावेज अपलोड करने के बाद पोर्टल पर प्राॅपर्टी की स्थिति पूछी जाती है कि वह किराएदार है या कुछ और है। इसके बाद जब वह दूसरे ऑप्शन पर क्लिक करते हैं तो उनके आवेदन अपलोड ही नहीं होते। मामले को लेकर नप अधिकारियों से भी कब्जाधारकों ने जानकारी ली, मगर आवेदन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कब्जाधारकों ने मैन्युअल आवेदन लेने की भी मांग की है।

1 जुलाई से शुरू हुआ पोर्टल
बता दें कि 20 साल से पुरानी किराए या लीज प्राॅपर्टी को फ्री होल्ड करने के लिए सरकार ने 1 जून से योजना की शुरुआत की थी जबकि 1 जुलाई से आवेदन के लिए पोर्टल लाॅन्च किया था। लीज प्राॅपर्टी कब्जाधारकों को शुरू से ही कलेक्टर रेट को लेकर आपत्ति थी और इसमें छूट देने की मांग को लेकर गृह मंत्री अनिल विज से भी उन्होंने गुहार लगाई थी।

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