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देश के लिए अम्बाला का जवान शहीद:एलओसी पर शहीद हुए जनसूई के हवलदार निर्मल सिंह, कुछ दिन बाद छुट्‌टी पर घर आना था

अम्बालाएक महीने पहले
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शहीद हवलदार निर्मल सिंह परिवार के साथ। -फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
शहीद हवलदार निर्मल सिंह परिवार के साथ। -फाइल फोटो
  • जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पाकिस्तान की गोलीबारी में हुए शहीद
  • पैतृक गांव में आज सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार, पिछले साल मई से नहीं आए थे घर

भारत-पाक सीमा पर जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पाकिस्तान की गोलीबारी में अम्बाला का जवान शहीद हो गया। जनसूई गांव के रहने वाले 37 वर्षीय हवलदार निर्मल सिंह 10 जम्मू-कश्मीर राइफल में तैनात थे जोकि क्राॅस फायरिंग में शहीद हो गए। वीरवार दोपहर उनकी शहादत की जानकारी परिवार को मिली तो गांव में मातम छा गया। परिवार में बेटी-बेटा व पत्नी हैं। शुक्रवार को सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा।

सेना के अनुसार पुंछ सेक्टर के कृष्णा सेक्टर में भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तान ने सीज फायर का उल्लंघन किया। इस दौरान क्राॅस फायरिंग में हवलदार निर्मल सिंह शहीद हो गए। वीरवार दोपहर को उनके पैतृक गांव जनसूई में इसकी जानकारी सेना ने दी। 10 जम्मू-कश्मीर राइफल में तैनात रह चुके रिटायर्ड हॉनरी कैप्टन वजीर सिंह को सेना ने सबसे पहले मामले की जानकारी दी जिसके बाद वजीर सिंह ने परिवार को सूचना दी।

घटना की जानकारी मिलते ही शहीद निर्मल सिंह की पत्नी व उनकी मां बेहाल हो गईं। गांव के लोग भी परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंच गए। परिवार के सदस्य सदमे में हैं, इसलिए लोगों ने तुरंत डाॅक्टर को फोन कर बुलाया।

दादा थे फौज में, उन्हीं से मिली प्रेरणा

शहीद हवलदार निर्मल सिंह के दादा भगवान सिंह सेना में थे। दादा से ही उन्हें सेना में जाने की प्रेरणा मिली। उनके दादा ने ही निर्मल सिंह की पूरी परवरिश की थी। निर्मल सिंह के पिता त्रिलोक सिंह का देहांत कई वर्ष पहले हो गया था जब वह मात्र 5 साल के थे। दादा को देख निर्मल सिंह ने भी सेना में भर्ती होने की ठानी। साल 2003 में वह सेना में भर्ती हुए थे और अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहे। पिछले साल वह छुट्टी पर आए थे और मई में वापस ड्यूटी पर चले गए थे। अब उन्होंने फरवरी में छुट्टी पर घर आना था।

परिवार का इकलौता सहारा थे निर्मल सिंह

हवलदार निर्मल सिंह परिवार की आमदनी का इकलौता सहारा थे। उनकी 3 बहनें हैं जोकि शादीशुदा हैं जबकि घर में वृद्ध मां के अलावा एक भाई है जोकि शारीरिक रूप से अक्षम है। उनकी पत्नी गुरविंद्र कौर गृहिणी हैं जबकि बेटी 5 साल की है और बेटा 3 साल का है। 2 साल पहले ही हवलदार निर्मल सिंह के दादा भगवान सिंह की मृत्यु हुई थी।

आज दोपहर तक गांव पहुंचेगा पार्थिव शरीर

अम्बाला स्थित सेना की खड्ग कोर की देखरेख में शुक्रवार को शहीद निर्मल सिंह का अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ होगा। कोर के अधिकारियों ने बताया कि शहीद का पार्थिव शरीर दोपहर तक अम्बाला में पहुंचेगा जिसके बाद उनका संस्कार होगा।

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