विधायक असीम गोयल के प्रयासों से सर्वसम्मति:सबसे बड़े वामन द्वादशी मेले का संचालन करने वाली एसडी सभा का ‘शांत चुनाव’

अम्बालाएक महीने पहले
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विधायक से मिलने पहुंची सनातन धर्म सभा की नई कार्यकारिणी। - Dainik Bhaskar
विधायक से मिलने पहुंची सनातन धर्म सभा की नई कार्यकारिणी।
  • उन्हीं के करीबी नरेश अग्रवाल एसडी सभा और अरविंद लक्की एमडीएसडी गर्ल्स कॉलेज के प्रधान बने

अम्बाला के सबसे प्रसिद्ध वामन द्वादशी मेले व कई शिक्षण संस्थाओं का संचालन करने वाली सनातन धर्म सभा का पदाधिकारी बनने के लिए हर बार सिर-धड़ की बाजी लगती थी, इस बार उसके चुनाव बिना शोर-शराबे के सर्वसम्मति से हो गए। हर पद के लिए एक-एक नामांकन आया। सोमवार को निर्विरोध चयन की घोषणा कर दी गई। 3 साल के लिए नरेश अग्रवाल को सनातन धर्म सभा और अरविंद अग्रवाल को एमडीएसडी गर्ल्स कॉलेज प्रबंधन समिति का प्रधान चुना गया। दोनों सिटी विधायक असीम गोयल के करीबी हैं।

बताते हैं कि चुनावी शोर-शराबे को खामोशी में बदलने में विधायक की भूमिका रही। पिछले दिनों विधायक ने कुछ पुराने पदाधिकारियों की अच्छी खासी क्लास ली। जिसके बाद नए नामों के विरोध में किसी ने जुबान नहीं खोली। पुरानी कार्यकारिणी के लगभग सभी पदाधिकारियों का पत्ता साफ कर इस बार नए चेहरे लाए गए। विधायक के चचेरे भाई रितेश गोयल ने ही प्रेसवार्ता बुलाकर सभी नए पदाधिकारियों का परिचय कराया और बोले-सब विधायक के आशीर्वाद से हुआ। नरेश अग्रवाल ने कहा कि इस बार 5 से 7 सितंबर को होने वाला वामन द्वादशी मेला देखने लायक हाेगा। सभी सदस्यों को साथ लेकर चलेंगे। मेले के समापन के बाद नए मेंबर बनाए जाएंगे। वहीं अरविंद अग्रवाल लक्की ने कहा कि कोरोना काल में एमडीएसडी कॉलेज में दाखिले कम हुए थे। इस बार दाखिले बढ़ाने और नए कोर्स लाने पर जोर होगा।

998 के बाद से विवादों में रहे सभा के चुनाव

आज तक रजिस्ट्रार जनरल के पास चल रहा केस | सनातन धर्म सभा यूं तो काफी पुरानी है लेकिन 1963-64 में मौजूदा स्वरूप में आई। शुरू में सभा का सदस्य बनने के लिए 2 रुपए वार्षिक फीस थी, जिसे फिर 11 रुपए किया गया। वर्ष 2012 में नया एक्ट लागू होने के बाद कई बदलाव हुए। सदस्यता फीस 500 रुपए की गई। हालांकि 1998 के बाद से सभा के चुनाव व सदस्यता को लेकर विवाद उठते रहे हैं। 1998 से लाला ओमप्रकाश और जीतराम अग्रवाल के बीच कुर्सी को लेकर दो धड़े बने और अलग-अलग कार्यकारिणी बनी। दोनों धड़ों के बीच वर्चस्व की लड़ाई रही। कई बार तो मेला आयोजन की अनुमति के लिए भी दोनों धड़े अलग-अलग अर्जी लगाते थे। नए बने सदस्यों को रजिस्ट्रार के पास चुनौती दी गई।

तर्क यह था कि सदस्यता फीस चेक के माध्यम से नहीं ली गई। अभी भी यह विवाद रजिस्ट्रार जनरल के पास लंबित है। सूत्र बताते हैं कि पिछली कार्यकारिणी के कई फैसलों पर सवाल उठे। नियमों की अनदेखी कर कुछ ठेके जारी हुए व सभा के अधीन संस्था में नियुक्तियां सवालों के घेरे में हैं। सभा एमडीएसडी कॉलेज, जीआरएसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जीआरएसडी मॉडल स्कूल व एक प्राइमरी मॉडल स्कूल का संचालन देखती है।
जो बाहर हुए वो बोले-नए का स्वागत

15 साल तक सभा की सेवा की है। अब नए लोगों को आगे आना चाहिए ताकि वह सभा के कार्यों को आगे बढ़ा सकें। जीतराम अग्रवाल, निवर्तमान प्रधान कई साल सभा की कमान संभाली, अब दूसरों को मौका मिले। एमडीएसडी कॉलेज में 2 करोड़ से नया ब्लॉक बन रहा है। -विनोद गर्ग, पूर्व पदाधिकारी

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