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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:18 दिन ऑक्सीजन पर रहा, खुद काे दिलासा दिया ताे हुई रिकवरी, दोस्तों ने भी साथ दिया

अम्बाला25 दिन पहले
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इलाज के दौरान संजय सेठी। - Dainik Bhaskar
इलाज के दौरान संजय सेठी।
  • कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां
  • आज पढ़ें संजय सेठी की कहानी

मुझे एक दिन बुखार हाे गया था। मैंने साेचा हल्का फीवर है। दवाई लेने से ठीक हाे जाएगा। दवाई लेने के बाद भी तबीयत में सुधार नहीं हुअा। मैंने काेराेना टेस्ट करवाया ताे रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई। मेरा ऑक्सीजन लेवल भी कम हाे रहा था। मैं सिटी मिशन अस्पताल में दाखिल हाे गया।

पहले 4 से 5 दिन तक तेज बुखार व खांसी हाेने से परिवार से वीडियाे कांफ्रेंस से भी बात नहीं कर पाया। इशाराें में भी परिवार से बातचीत हाेती थी। मेरी मां की तबीयत भी काफी दिन से खराब रहती है। जिससे मेरी चिंता ज्यादा बढ़ गई थी, लेकिन मैंने खुद काे दिलासा दिया और अपनी साेच काे सकारात्मक रखा।

मेरे दाेस्ताें ने काफी साथ दिया। मेरा हालचाल पूछने के लिए भी आते थे। धीरे-धीरे दिन बीतते गए। 18 दिन मिशन अस्पताल में ऑक्सीजन सपाेर्ट पर रहना पड़ा। मेरा ऑक्सीजन लेवल ठीक हाे गया। मैं घर छुट्टी लेकर आ गया, लेकिन मेरे शरीर में काफी कमजाेरी आ गई थी। वजन भी 12 किलाे कम हाे गया।

घर आने के करीब 1 महीने बाद भी मैं घर से नहीं निकल पाया था, क्याेंकि कमजाेरी ज्यादा आने से चला भी नहीं जाता था। घर आकर डाइट प्लान बनाया और अब मेरा वजन 10 किलाे तक बढ़ गया है। मेरा मानना है कि अगर काेराेना से लड़ना है ताे खुद काे अकेला फील न हाेने दें।

इससे अंदर से इच्छाशक्ति कमजाेर हाेती है। जिससे रिकवरी में ताे टाइम लगता है और मन में भी नकारात्मक विचार आते हैं। भगवान पर भराेसा रखते हुए खुद काे स्ट्रांग बनाएं।
संजय सेठी, निवासी इंद्रनगर, अम्बाला सिटी

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