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कार्रवाई:पुलिस भर्ती परीक्षा की आंसर-की लेकर पेपर देने का शक, युवक को ले गई कैथल सीआईए टीम

अम्बाला सिटी3 महीने पहले
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तुलसी पब्लिक स्कूल में युवक से पूछताछ करती पुलिस। - Dainik Bhaskar
तुलसी पब्लिक स्कूल में युवक से पूछताछ करती पुलिस।
  • कैथल में मुख्य सरगना के पकड़े जाने के बाद अम्बाला के तुलसी पब्लिक स्कूल पहुंची पुलिस

पुलिस भर्ती की परीक्षा का पेपर लीक होने की खबरों के बीच सीआईए कैथल की टीम अम्बाला पहुंची, जो अम्बाला के तुलसी पब्लिक स्कूल में पेपर देने आए युवक को अपने साथ ले गई। पुलिस की जनरल ड्यूटी के लिए हुई सुबह के सत्र में परीक्षा दी थी। पहले पुलिस ने युवक से पेपर खत्म होने के बाद पूछताछ भी की। जानकारी मुताबिक युवक की पहचान कैथल के करनाल रोड निवासी राजेश के तौर पर हुई, जो अपना ही पेपर देने आया हुआ था। इससे पहले कैथल पुलिस ने इस गिराेह का सरगना रमेश काे पकड़ लिया था, जिसके वाट्सएप ग्रुप में वे सब युवा जुड़े हुए थे, जिनसे पैसे लेकर पेपर कराया जा रहा था।

पुलिस ने कैथल के माता गेट के पास तीन युवक कार से पकड़े थे, जिनके पास पुलिस भर्ती परीक्षा की आंसर-की थी। युवक इस आंसर-की को उन लड़कों के पास भेज रहे थे जिनसे डील हुई थी। इनके पकड़े जाने के बाद पुलिस ने मुख्य सरगना कोचिंग सेंटर संचालक रमेश को पकड़ा। फिर सूचना पाकर टीमें अलग-अल जिलों में उन युवकों तक पहुंची जिनको आंसर-की दी गई थी। इसी संदर्भ में अम्बाला के तुलसी पब्लिक स्कूल में सीआईए कैथल की टीम पहुंची। टीम ने युवक राजेश से उसका पेपर खत्म हाेने के बाद पूछताछ की और उसे अपने साथ ले गई। सदर एसएचओ सुरेश सैनी ने बताया कि सीआईए कैथल सेंटर पर आई थी। जिसने युवक से पेपर लीक होने के सिलसिले में ही पूछताछ की और बाद में अपने साथ ले गई।

परीक्षार्थी से 12 लाख रुपए में आंसर-की देने का सौदा हुआ

पुलिस भर्ती परीक्षा को लीक करवाने में कोचिंग सेंटर संचालक रमेशचंद्र गिरोह का अब तक सबसे बड़ा किरदार है। 12 लाख में आंसर-की देने वाला रमेशचंद्र जींद जिला के गांव थुआ का रहने वाला है। पहले गांव उचाना के प्राइवेट स्कूल में कुछ हजार रुपए की नौकरी करता था, सपने बड़े थे इसलिए नौकरी छोड़कर कैथल में कोचिंग सेंटर शुरू करने की योजना बनाई। करीब 8 साल पहले करनाल रोड पर जाट स्कूल के नजदीक बालाजी डिफेंस एकेडमी शुरू की। जहां पुलिस, आर्मी समेत अन्य सुरक्षाबलों की कोचिंग दी जाती है। रमेशचंद्र ने कोचिंग सेंटर पर खूब रुपए खर्च किए, लेकिन बिजनेस नहीं चला। इसके बाद सेंटर को करनाल रोड सर छोटूराम चौक पुलिस नाका के नजदीक शुरू किया।

रमेशचंद्र ने बिजनेस में हुए खाटे से उबरने व शॉर्ट में रुपए कमाने के लालच में पेपर लीक करने वाले गिरोह से खुद को जोड़ लिया। परीक्षार्थियों को पेपर पास करवाने के नाम पर 10 से 15 लाख रुपए लिए जाते थे। सीआईए-वन पुलिस ने तीन युवकों को काबू किया तो उन्होंने भी खुलासा किया कि रमेशचंद्र 12 लाख रुपए लेकर एक परीक्षार्थी को आंसर-की देता है। छोटे शहर में एकेडमी चलाने वाले व्यक्ति के पास सीधे आंसर-की नहीं आ सकती, इसलिए गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस प्रदेशभर के जिलों में रेड कर रही है। पुलिस उस प्रथम व्यक्ति तक पहुंचने के प्रयास में है जिसने परीक्षा शुरू होने से पहले ही रमेशचंद्र को पेपर उपलब्ध करवाया था। पुलिस जांच में परीक्षा प्रणाली से जुड़े कई बड़े नामों पर कानून का शिकंजा कस सकता है।

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