मोरनी गैंगरेप / आरोपी विष्णु के पिता व भाई को पीटने का मामला आयोग के पास

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  • जस्टिस ने एसपी को 10 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

अम्बाला. मोरनी गैंगरेप के आरोपी विष्णु की गिरफ्तारी एसटीएफ के गले की फांस बनती नजर आ रही है। विष्णु की गिरफ्तारी के समय नियमाें की धज्जियां उड़ाने के आरोप पुलिस पर लगे हैं। विष्णु के भतीजे कपिल ने मानव अधिकार आयोग के समक्ष पुलिस द्वारा दादा व चाचा की पिटाई करने की फुटेज पेश की है। आयोग के जस्टिस एसके मित्तल ने मामले में संज्ञान लेते हुए एसपी अम्बाला अभिषेक जोरवाल को 4 हफ्ते में जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई के लिए 10 जुलाई निर्धारित की है।
जस्टिस मित्तल ने एसपी को दिए आदेश में कहा कि पुलिस द्वारा सरेआम मारपीट करना गंभीर मानवीय अधिकारों की उल्लंघना है। पुलिस अपनी शक्ति और शारीरिक क्षमता का दुरुपयोग निर्दोष नागरिकों पर नहीं कर सकती। जस्टिस ने कहा कि 1 मई को पुलिस बिना वर्दी के गांव लोटो के आरोपी विष्णु को गिरफ्तार करने गई। जब आरोपी के परिजनों ने पूछा कि तुम कौन हो, कहां से आए हो तो पंचकूला सेक्टर-5 के थाना प्रभारी नवीन सारण ने अपना नाम बताया। मानव अधिकार आयोग को शिकायत करने वाले कपिल ने गिरफ्तारी के सरकारी दस्तावेजों के बारे में पूछा तो चाचा अाैर दादा की पिटाई करने लगे। यही नहीं पुलिस ने शिकायतकर्ता की गाड़ी को भी कब्जे में लिया, जिसमें 50 हजार कैश था। यह सारी घटना नजदीक लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। जस्टिस ने कहा कि शिकायतकर्ता ने एक पेन ड्राइव, सीसीटीवी फुटेज की सीडी और एमएलआर की काॅपी पेश की है।
शिकायतकर्त्ता को लगी थी चोटें: आदेश में कहा गया है कि 2 मई को निजी मुचलके पर रिहा होने के बाद शिकायतकर्ता ने डॉक्टरी मुआयना करवाया था। जिसमें उसके शरीर पर चोटों के कई निशान पाए गए।

आरोप- पुलिस ने झूठा मुकदमा दर्ज किया

जस्टिस मित्तल ने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाए हैं कि पुलिस ने उसके चाचा के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का झूठा केस दर्ज किया है। जबकि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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