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  • The Condition Of The Daughter And Husband Became Critical After Kareena, Both Were In Hospitals, The Son Spent Many Days And Nights In The Car Outside The Hospital: Neeru

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:काेराेना हाेने पर बेटी व पति की हालत गंभीर हाे गई, दाेनों अस्पतालों में थे, बेटे ने अस्पताल के बाहर कार में काटे कई दिन-रात : नीरू

अम्बाला8 दिन पहले
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अम्बाला | बेटे शिवम, पति इंद्र शर्मा अौर बेटी शायना के साथ नीरू शर्मा। - Dainik Bhaskar
अम्बाला | बेटे शिवम, पति इंद्र शर्मा अौर बेटी शायना के साथ नीरू शर्मा।
  • आज पढ़ें दयालबाग निवासी टीचर नीरू शर्मा की कहानी
  • बोलीं- मई के वे 15 दिन मुश्किल भरे थे, परिवार के लिए दुआएं की, डोनर के लिए गुहार लगाई, खुद भी बीमार हुईं, मगर हौसला कभी नहीं छाेड़ा

काेराेना ने जब मेरी 20 साल की बेटी शायना व पति इंद्र शर्मा काे चपेट में ले लिया ताे दहशत सी फैल गई। परिवार एकदम बिखर सा गया था। हर काेई अकेला और डरा हुआ महसूस कर रहा था। पति इंद्र शर्मा पंजाब नेशनल बैंक में मैंनेजर हैं। पब्लिक डीलिंग के दाैरान अदृश्य वायरस ने उन्हें चपेट में ले लिया। उन्हें फीवर हाे गया। टेस्ट करवाया ताे पाॅजिटिव आए। वे हाेम आइसोलेशन में रहने लगे।

दाे दिन बाद मेरी 20 साल की बेटी शायना शर्मा काे 103-104 पर फीवर हाेने लगा। मैं उसको ठंडे पानी की पट्टियां करती व दवाई देती रही। लेकिन बुखार कम नहीं हुआ। बेटी के प्लेटलेट्स डाउन हाेने लगे। डाॅक्टर ने कह दिया कि जल्द हॉस्पिटल में काेविड वाॅर्ड में भर्ती करवाओ। मई की शुरुआत थी और काेराेना पीक पर था। बेड के लिए हॉस्पिटल में दिक्कत थी।

किसी न किसी तरह बेटी काे एमएम अस्पताल मुलाना में भर्ती करवाया। 29 साल का बेटा शिवम हाॅस्पिटल से बाहर कार में रहता। बेटी काे वहां खून की जरूरत थी, बड़ी मुश्किल हाे रही थी। एसडी स्कूल में टीचर हूं ताे वहां से मदद मांगी, फ्रेंड्स ग्रुप व कई लाेगाें से डाेनर के लिए हेल्प मांगी। डाेनर मिला। बेटी काे ब्लड मिल गया लेकिन सेहत में काेई सुधार नहीं।

ईधर बेटी की हालत देखकर पति इंद्र शर्मा की हालत खराब हाेने लगी उन्हें फीवर दोबारा से चढ़ने लगा। ए सिमटोमेटिक लक्षण मुझे भी थे ताे मैंने बेटे शिवम काे फाेन करके कहा कि पापा काे भी हाॅस्पिटल में एडमिट करवाओ। पति काे गाॅर्डियन हास्पिटल में भर्ती करवाया गया। अब मैं घर में बिल्कुल अकेली थी। मुझे कमजाेरी भी थी और पति और बेटी की हालत देखकर मन में डर भी बैठा हुआ था।

दिन-रात मैं उनके बारे में चिंतित रहती। बहुत डर लग रहा था। घंटे-घंटे में दाेनाें से वीडियाे काॅल करती रहती। उनकाे हौसला देती कि यह मुश्किल दाैर है इससे निकल जाएंगे, बस हार नहीं माननी। भगवान से उनके ठीक हाेने की दुआ मांगती रहती। बेटे शिवम ने कार काे ही घर बना लिया था। वाे रात काे भी कार में ही साेता। बहन काे जूस, खाना व जरूरत की सभी चीजें पहुंचाता।

बहन की देखभाल और परिवार काे संभालने में उसने अहम भूमिका निभाई। लेकिन वहां हाॅस्पिटल में लगातार हाे रही माैताें काे देखकर वाे भी कभी-कभी इतना डिप्रेस हाे जाता कि, राेते हुए फाेन पर कहता बस मम्मी बहन ठीक हाेकर घर आ जाए। बेटी की सेहत में भी सुधार नहीं हाे रहा था। डाॅक्टर ने कहा कि प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ेंगे।

प्लेटलेट्स मिलने के बाद बेटी की सेहत में सुधार हाेने लगा। जब बेटी की सेहत में सुधार हाेने लगा ताे बेटा राेज सुबह घर आता। फ्रेश हाेकर कपड़े व बेटी के लिए खाना लेकर चला जाता। इस बीच मेरे परिवार के लाेग, मेरे भाई, दीपक भसीन, प्रिंसिपल नीलइंद्रजीत संधु, डाॅ. देशबंधु व सभी सगे-संबंधियाें ने हमारा हाैसला बढ़ाया और मदद की।

जब 15 दिन बाद बेटी ठीक हाेकर घर लाैटी ताे मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पहले वाे बहुत हेल्दी थी लेकिन जब घर लाैटी ताे बहुत कमजाेर हाे गई। पति भी घर आ गए। अब मैं घर पर फ्रूट्स, प्राेटीन रिच डाइट व इम्युनिटी बढ़ाने वाली सभी चीजें देती हूं। मेरी लाेगाें से अपील है कि घर पर रहे सुरक्षित रहे। काेराेना काे कमजाेर समझने की काेशिश मत करें। इससे बचना है ताे सभी हिदायतों का पालन करें।

नीरू शर्मा | काेराेना वाॅरियर

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