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  • The SHO must first file a written complaint against the accused on the lockdown violation in the court, only then a lawsuit will be held

लॉकडाउन की उल्लंघन / लॉकडाउन की उल्लंघन पर आरोपी के खिलाफ एसएचओ को पहले देनी होगी कोर्ट में लिखित शिकायत, तभी चल सकेगा मुकद्दमा

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  • आपदा विभाग के अतिरिक्त सचिव ने एसएचओ को प्राधिकारी नियुक्त किया
  • आईपीसी की धारा 188 जोड़ी तो पुलिस कर सकती है गिरफ्तार

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

अम्बाला. जिन लोगों पर केवल लॉकडाउन तोड़ने का मामला दर्ज है और उसके साथ आईपीसी की धारा 188 (गैर-जमानती) नहीं लगाई गई है तो उनके लिए राहत की खबर है। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस को पहले कोर्ट में लिखित शिकायत देनी होगी। इसके बाद ही कोर्ट में उसके खिलाफ मामला चलेगा। इसके लिए सरकार ने एसएचओ को प्राधिकारी अधिकारी नियुक्त किया है।
इस संबंध में हरियाणा सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त सचिव विजय वर्धन ने मंगलवार को गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित किया है। इसके तहत आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 60 (ए) के तहत सभी पुलिस स्टेशनों के स्टेशन हाउस अफसर (एसएचओ) जोकि सब-इंस्पेक्टर के रैंक से कम न हों, उन्हें 2005 कानून की धारा 51 से 54 तथा 57 एवं 58 तक कोर्ट में शिकायत दायर करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। 19 मई से इन धाराओं के तहत अगर उल्लंघना होती है तो कोर्ट को पहले लिखित में बताना होगा।

लॉकडाउन तोड़ने के 327 मामले दर्ज

जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, तब से पुलिस ने अब तक 327 मामले दर्ज कर 473 लोगों को गिरफ्तार किया है। एसपी अभिषेक जोरवाल के मुताबिक अब तक 349 वाहनों को जब्त किया गया है, जबकि 4239 वाहन चालकों के चालान किए हैं। चालान की एवज में अब तक 1 करोड़ 24 लाख 83 हजार रुपए जुर्माना वसूला गया है। जोरवाल के मुताबिक बेमतलब लॉकडाउन का उल्लंघना करने वालों पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
जुर्म साबित होने पर यह है सजा का प्रावधान
हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि अगर किसी के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट की उल्लंघना की धारा 51 के तहत मामला अधिकारी की ड्यूटी में बाधा पहुंचाने तथा अधिकारी के दिशा निर्देशों की उल्लंघना के तहत दर्ज किया जाता है। इसमें 1 से 2 साल तक की सजा का प्रावधान है। धारा 52 के तहत सरकार से मुआवजे के लिए झूठा क्लेम करने पर मामला दर्ज किया जाता है। इसमें 2 साल तक की सजा है। धारा 53 में अगर कोई सरकारी पैसे व राहत सामग्री का गबन करता है तो 2 साल की सजा का प्रावधान है। धारा 54 में अगर कोई अफवाह फैलाता है तो एक साल तक की सजा का प्रावधान है।

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