गीतानंद महाराज की 18वीं पुण्यतिथि कल:वीर, वीर के लिए प्यारा नहीं वीर आत्मा के कारण प्यारा है

अम्बाला9 दिन पहले
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गीतानंद महाराज का फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
गीतानंद महाराज का फाइल फोटो।
  • }90 साल की वीरजी की भक्त पुष्पावती ने साझा किए उनसे जुड़े किस्से

16 जनवरी काे गीतानंद महाराज की 18वीं पुण्यतिथि है। वीरजी ने अपना जीवन श्री गीता सत्संग भवन वीर जी की कुटिया में बिताया। उन्हाेंने जब अपने वैराग्य जीवन काे शुरू किया ताे उनके साथ 25 से 30 भक्त थे लेकिन अब सैकड़ाें भक्त उनसे जुड़े हुए हैं। उनकी भक्त 90 साल की पुष्पावती ने उनके जीवन से जुड़े कुछ किस्से साझा किए।

राज बहन और पुष्पावती ने सबसे पहले बुलाना शुरू किया वीरजी
पुष्पावती ने बताया कि रिपुदमन काॅलेज नाभा से एमए करने के बाद वीरजी ने 9 महीने 13 दिन का माैन रखा था। उस समय पहली बार राज बहन अपने पिता के साथ वीर जी से मिलने गई ताे उन्हाेंने वीरजी से पूछा कि उन्हें वैराग्य कैसे मिलेगा स्वामी जी। इस पर उन्हाेंने स्लेट पर लिखा मुझे स्वामी जी नहीं बल्कि वीरजी कहाे। उसके बाद जब पुष्पावती उनसे मिलीं ताे उनकाे भी उन्हाेंने यही आज्ञा दी। तब से हर काेई उन्हें वीरजी कहकर बुलाता है।

जब पुष्पावती की वीरजी से हुई मुलाकात: पुष्पावती ने बताया कि मेरे चाचा का लड़का बलराम वीरजी का भक्त था। उसने एक दिन महाराज जी से मिलने के लिए कहा। तब पुष्पावती ने मना कर दिया। कुछ समय बाद मन में विचार आया कि महाराज जी काे मिलकर आऊं ताे अनाज मंडी में उनके घर में मिलने गई। वहां कुछ भक्त बैठे थे। वीरजी ध्यान में थे जब उन्हाेंने आंख खाेली ताे मुझे देखते ही कहा- बहन तू आ गई। बस तभी उसी दिन से वीरजी से जुड़ गई। उन्हाेंने उन्हें भी वीरजी ही कहने के लिए कहा।

अनाज मंडी से वीरजी की कुटिया तक
गीतानंद महाराज के पिता नंद लाल गोसाई मुनीम थे। वहीं मंडी में ही उन्हें दाे कमराें का घर मिला हुआ था। वहीं पर सत्संग हुआ करता था। बाद में उनके सहपाठी बालकृष्ण ने उन्हें रामा मंदिर में सत्संग करने के लिए बुलाया। उसके बाद से राेज सुबह वहां वैराग्य शत्तक का पाठ हुआ करता था। रामा मंदिर के बाद गीता नगरी में वीरजी कुटिया बनाकर रहने लगे। लेकिन बरसात में पानी आ जाता था। तब वहां एक नंबरदार जिसकी संतान नहीं थी उसने वीरजी काे जगह दी। उसके बाद वहां एक कमरा और चारदीवारी बनाई गई। वहीं पर सुबह के समय सत्संग हुआ करता था। वीरजी काे बसंत पंचमी के दिन प्रभु का साक्षात्कार हुआ था। वहीं पर बसंत पंचमी के दिन ही वीर जी कुटिया की चारदीवारी का उद‌्घाटन हुआ।

पहली बार गीता का पाठ
पुष्पावती ने बताया कि अनाज मंडी में नाैहरियाण का मंदिर है। वहां किसी भक्त ने उन्हें गीता का पाठ करने के लिए कहा। वाे पहला दिन था जब गीता जयंती के दिन वीरजी ने पहली बार गीता पकड़कर सुबह 8 बजे पहला श्लाेक धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे पढ़ा। तब से गीता का प्रचार शुरू हुआ।

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