• Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Ambala
  • Will Make It Again Now, Due To The Increase In The Weight Of The Stone In The Dome, The Crack Started Coming In The Beam

11 साल से बन रहा जैन समाधि मंदिर:अब दोबारा बनाएंगे, गुंबद में पत्थर का वजन बढ़ने से बीम में आने लगी थी दरार

अम्बाला21 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
11 साल में मकराना के मार्बल से ऐसा तैयार हुआ था जैन मंदिर। - Dainik Bhaskar
11 साल में मकराना के मार्बल से ऐसा तैयार हुआ था जैन मंदिर।
  • जैन मुनि विजय इंद्रदिन सुरीश्वर की स्मृति में अम्बाला सिटी में बन रहा मंदिर

पिछले 11 साल से अम्बाला सिटी की गीता नगरी में जैन मुनि विजय इंद्रदिन सुरीश्वर की स्मृति में बन रहे गाेलाकार समाधि मंदिर काे अब पूरी तरह हटा दिया गया है। सफेद पत्थरों से बने ढांचे को हटाने में ढाई महीने लगे। अब इसे नए सिरे से बनाया जाएगा। श्री विजय इंद्रदिन चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान सतीश जैन ने बताया कि मंदिर के शिखर पर गुंबद में पत्थर का वजन ज्यादा होने से नींव बैठने लग गई थी।

जिसके कारण 2 बीम में दरार आ गई थी। ऐसे में मंदिर के निर्माण कार्य काे देख रहे आचार्य गुरु श्रीमद विजय धर्मधुरंधर महाराज ने निर्णय लिया कि मंदिर विरासत के तौर पर बनाया जा रहा है, कभी किसी तरह की अनहोनी न हाे जाए, इसलिए मंदिर काे नए सिरे से बनाया जाए। जैन समाज के चंदे पर बन रहे मंदिर की लागत कभी सार्वजनिक नहीं हुई लेकिन यह करोड़ों में है।

उत्तर भारत का पहला ऐसा संगमरमर का मंदिर, जिसमें मकराना के सफेद संगमरमर का ही इस्तेमाल हुआ, लोहे की कील तक नहीं लगी

ढाई महीने में समाधि मंदिर काे हटाया गया, अब इसे नए सिरे से बनाया जाएगा।
ढाई महीने में समाधि मंदिर काे हटाया गया, अब इसे नए सिरे से बनाया जाएगा।

इस मंदिर की खासियत ये थी कि मकराना के सफेद संगमरमर का ही इस्तेमाल हुआ, लोहे की इसमें कील तक इस्तेमाल नहीं हुई। लेंटर की जगह पुरानी भारतीय निर्माण शैली डाट का इस्तेमाल किया गया है। यहां 36 गुंबदों वाली छत इसी पर टिकाई गई। जैन आचार्य के 36 गुण होते हैं, इसलिए 36 गुंबद बनाए। मंदिर उसी नक्शे पर दोबारा बनेगा और कोशिश होगी कि ये हटाए गए पत्थर भी इस्तेमाल हो सकें।

खुद जैन मुनि विजय रत्नाकर सूरीश्वर ने कागज पर परांत रख कर नक्शा तैयार कर दिया था। मार्बल पर नक्काशी राजस्थान के मकराना में हुई और अम्बाला में इसके ढांचों को एक-दूसरे से जोड़ा गया। उड़ीसा के कारीगर मंदिर में नक्काशी व शिल्प कला का काम कर रहे हैं।

2011 में शुरू हुआ था काम- चार्य श्रीमद् विजय इंद्रदिन सुरेश्वर महाराज का जिस जगह पर संस्कार हुआ था, वहीं 36 गुंबदों के मध्य उनकी समाधि बनी हुई है। उनके शिष्य व गुरु विजय रत्नाकर सुरी महाराज ने गुरु के नाम पर इस मंदिर का निर्माण साल 2011 में शुरू करवाया था। दिसंबर 2014 में रत्नाकर सूरी महाराज के देह त्यागने के बाद धर्मधुरंधर महाराज ने इसका कार्यभार संभाला।

बीच में कुछ कारणवश काम रुक गया था। पिछले 3 साल से मंदिर का काम दोबारा शुरू हुआ था। यह पहला ऐसा मंदिर है जिसमें 84 गच्छों के शासन प्रभावक आचार्य भगवंतों की 108 पाषाण प्रतिमाएं लगाई जाएंगी। ढाई एकड़ में फैले परिसर में यह मंदिर, धर्मशाला, मणिभद्र भोजनालय व उपाश्रय का निर्माण किया जाना है।

खबरें और भी हैं...