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ठाकुरद्वारा कलां नौरंगराय तालाब ट्रस्ट का मामला:रामजी की जमीन लौटाने के लिए 1 साल पहले तहसीलदार को लिखा था, अब तक नहीं मिली

अम्बाला11 दिन पहले
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अम्बाला | सिटी का पंचायत भवन। - Dainik Bhaskar
अम्बाला | सिटी का पंचायत भवन।
  • कार्रवाई अभी सरकारी फाइलों में ही अटकी

अम्बाला सिटी में अरबों रुपए कीमत की 291 कनाल (36 एकड़ से ज्यादा) जमीन श्रीरामचंद्र जी की मूर्ति के नाम ट्रांसफर करने की कार्रवाई अभी सरकारी फाइलों में अटकी है। इसका संचालन व देखरेख करने वाले ठाकुरद्वारा कलां तालाब नौरंगराय ट्रस्ट के सचिव विनोद गर्ग ने बताया कि ट्रस्ट का एक साल पहले पुनर्गठन हो गया था।

जिसके बाद ट्रस्ट ने तहसीलदार को स्थानीय और हाईकोर्ट के आदेश की पालना करते हुए 291 कनाल प्रॉपर्टी मूर्ति श्री रामचंद्र जी महाराज के नाम ट्रांसफर करने के लिए आवेदन दिया था। अभी तक इसके लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अगर जल्द ही प्रॉपर्टी ट्रांसफर नहीं हुई तो दोबारा हाईकोर्ट में दस्तक दी जाएगी।

गर्ग ने बताया कि ट्रस्ट ने 31 मार्च 2021 से पहले सभी किरायानामे व पट्टे रद्द करने का फैसला लिया, उसके बाद मंगलवार को बहुत से किरायेदारों ने ट्रस्ट से संपर्क किया। तब पता चला कि किसी दुकान की किराया 200 से किसी का 500 रुपए ही है। जबकि जमीन पर बड़े होटल, शोरूम, मार्बल मार्केट समेत बहुत सी दुकानें बनी हुई हैं। यही नहीं पंचायत भवन और बाल भवन भी इसी जमीन पर है।

जिस जगह पर पंचायत भवन बना है, वह जमीन महंतों ने सरकार को 1 रुपए गज की दर से एससी हॉस्टल बनाने के लिए पट्टे पर दी थी। जबकि इसमें पंचायत भवन बना दिया गया। यही नहीं बाल भवन के लिए भी 12 एकड़ जमीन दी गई। ट्रस्ट का दावा है कि इस जमीन की लीज बाल कल्याण परिषद को दी गई थी।

यह लीज 2012-13 में खत्म हो चुकी है। वैसे बाल भवन में एक शिलापट्ट लगा है, जिस पर लिखा है कि भवन निर्माण के लिए बड़ा ठाकुरद्वारा के महंत श्री रामनारायण दास ने 12 एकड़ जमीन उपहार स्वरूप दी।

रामजी की जमीन पर महंतों का खेल

1972-77 के दौरान ठाकुरद्वारा के तत्कालीन गद्दीनशीन रामस्वरूप नारायणदास ने मूर्ति श्री रामचंद्र महाराज की प्रॉपर्टी अपने नाम करवा ली थी। उन्होंने उस समय के गर्वनर के हस्तक्षेप से प्रॉपर्टी अपने नाम करवाई। इस कार्रवाई पर उस समय ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सरकार का विरोध किया। जिसके लिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों को जेल भी जाना पड़ा। बाद में जमानत पर उन्हें रिहा किया गया।

उसके बाद सबसे पहला पंचायत भवन का पट्टा दिया गया। सरकार ने महंत से जमीन यहां एससी छात्रावास बनाने के लिए ली थी। अब भी पुराने पट्टेनामाें व किराएनामाें के हिसाब से किराया लिया जा रहा है। उसके बाद नाैरंग राय तालाब को लीज पर दिया गया। ट्रस्ट के सेक्रेटरी विनोद गर्ग ने बताया कि बालभवन की जमीन को चाइल्ड वेल्फेयर डिपार्टमेंट को लीज पर दी गई थी जाे 2012-13 में खत्म हाे चुकी है।

पंचायत भवन में लगा पत्थर।

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