शिकायतकर्ताओं ने कर्मचारियों पर लगाया तस्करों से मिलीभगत का आरोप:सरस्वती विहार जंगल में 20 से ज्यादा पेड़ कटे मिले, डीएफओ अम्बाला की टीम करेगी जांच

पिहोवा18 दिन पहले
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कुरुक्षेत्र-कैथल की सीमाओं से लगता है 11000 एकड़ में फैला सरस्वती विहार वन - Dainik Bhaskar
कुरुक्षेत्र-कैथल की सीमाओं से लगता है 11000 एकड़ में फैला सरस्वती विहार वन
  • रेंज ऑफिसर का तर्क- कोई मिलीभगत नहीं

सरस्वती विहार जंगल में लकड़ी की तस्करी का मामला सामने आया है। सूचना के बाद चंडीगढ़ मुख्यालय के आदेश पर डीएफओ अंबाला ने मौके का मुआयना किया। डीएफओ राजेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने जंगल का निरीक्षण करके चेकिंग की। इसमें 20 से ज्यादा कटे पेड़ मौके पर मिले। बता दें कि मामले को लेकर पास के गांव से बलबीर सिंह व लखविंदर ने विभाग को इस पूरे प्रकरण की सूचना दी थी।

उन्होंने आरोप लगाया था कि कर्मचारी मिलीभगत करके जंगल से रात को तस्करों के साथ मिलकर लकड़ी निकलवा रहे हैं। सरस्वती विहार जंगल का जो एरिया कैथल जिला में पड़ता है। उसमें हर रात को ऐसे ही पेड़ काटे जा रहे हैं। लेकिन कर्मचारी मिलीभगत करके उन्हें रोकने की बजाय पिछली डेट में रसीदें काटकर खानापूर्ति कर देते हैं। करीब 16 से ज्यादा पेड़ तीन दिन में काटकर उनकी लकड़ी बेच दी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि अब तक करोड़ों रुपए की लकड़ी की तस्करी यहां से की जा चुकी है। यह रिजर्व फॉरेस्ट है। जो लगभग 11000 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें कुरुक्षेत्र में कैथल दो जिलों की सीमाएं लगती हैं। लेकिन बावजूद इसके यहां तस्कर और महिलाएं पूरा दिन बेरोकटोक घूमते रहते हैं। पास के गांव में लकड़ी इकट्ठा करके बाद में उसे सप्लाई किया जाता है। जबकि नियमानुसार इस जंगल में कुल्हाड़ी व माचिस आदि लेकर जाना भी प्रतिबंधित है। बावजूद इसके लकड़ी तस्करी का कार्य धड़ल्ले से जारी है।

आलाधिकारियों को सौंपेंगे जांच रिपोर्ट

डीएफओ अम्बाला राजेश कुमार ने बताया कि टीम जांच कर रही है। यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी मिलीभगत में शामिल मिला तो उसकी रिपोर्ट बनाकर आला अधिकारियों को भेजी जाएगी।

फॉरेस्ट गार्ड की कम संख्या से आ रही दिक्कत: उधर, वन रेंज ऑफिसर बलजीत सिंह का कहना है कि जंगल में कोई पेड़ कटाई नहीं की गई। जंगल की निगरानी के लिए यहां कम से कम 11 गार्ड चाहिए। जबकि इस समय मौके पर तीन ही गार्ड तैनात हैं। कर्मचारियों की संख्या कम होने के चलते पेड़ों की सुरक्षा में दिक्कत आ रही है। जो लोग अभी तक लकड़ी चुराने के आरोप में पकड़े गए हैं। उनसे नियमानुसार जुर्माना वसूल करके कार्यवाही की गई है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के कर्मचारियों पर मिलीभगत के आरोप सरासर गलत हैं।

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