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25 वर्षीय युवक ने फंदा लगाकर की आत्महत्या:मारपीट मामले में ठोस कार्रवाई न होने से 25 वर्षीय युवक ने फंदा लगाकर दी जान, पुलिस व आरोपी पक्ष के खिलाफ लिखा सुसाइड नोट

राजौंदएक महीने पहले
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  • सात युवकों को मौत का जिम्मेदार ठहराया} जवान बेटे की मौत के बाद परिजनों ने शव सड़क पर रखकर लगाया जाम

गांव जाखौली में दो पक्षों के बीच चल रहे मारपीट विवाद के बाद एक पक्ष के 25 वर्षीय पीड़ित युवक बिट्टू ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। बिट्टू की जेब से एक पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उसने मारपीट करने वाले सात युवकों को मौत का जिम्मेदार ठहराया।

तितरम थाना पुलिस पर भी कार्रवाई न करने की बात लिखी गई है। जवान बेटे की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। परिजनों ने कहा कि बिट्टू से गंभीर मारपीट के बाद पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की।

इसके उल्ट दूसरा पक्ष के लोग फर्जी मेडिकल बनवा लाए। पुलिस ने बिटू पर धारा 326 के तहत केस दर्ज कर दिया। फिर एचएचओ व जांच अधिकारी ने समझौते का दबाव बनाया। प्रताड़ित होकर बिट्टू ने जान देने का बड़ा कदम उठाया। जाम लगने की सूचना के बाद डीएसपी दलीप सिंह मौका पर पहुंचे। ठोस कार्रवाई करने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया।

मृतक के चाचा प्रदीप की शिकायत पर सात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने व जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज किया गया है। गांव जाखौली निवासी बिट्टू मजदूरी करता था। उसके चाचा ने प्रदीप ने पांच छह महीने पहले गांव के ही युवक सुनील से बाइक खरीदी थी।

बाइक खरीदने के मामले में पैसों के लेनदेन को लेकर दोनों पक्षों में विवाद चल रहा था। 14 सितंबर को बिटू की शिकायत पर गांव के ही 7 लोगों पर मारपीट करने का केस दर्ज हुआ था। जिसमें चार आरोपियों को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। दूसरे पक्ष ने भी अंगुली काटने के आरोप लगाते हुए बिट्टू, प्रदीप व मटरू के खिलाफ शिकायत दी थी। जिसमें 25 सितंबर को गंभीर चोट मारने का केस दर्ज हुआ।

बिटू के चाचा प्रदीप ने कहा कि पुलिस ने हमलावर युवकों पर कार्रवाई करने की बजाय पीड़ित पर ही धारा-326 के तहत मामला दर्ज कर दिया था। युवक तभी से मानसिक तौर पर परेशान रहता था। आक्रोशित परिजनों ने गांव जाखौली में कैथल असंध मार्ग पर जाम लगा दिया।

परिजनों ने मांग थी कि थाना प्रभारी, जांच अधिकारी व आरोपियों पर केस दर्ज किया जाए। मृतक के चाचा प्रदीप ने कहा कि वे कई बार थाना प्रभारी और जांच अधिकारी से मिले, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।

14 सितंबर को ये दर्ज हुआ था केस
बिट्टू ने थाना तितरम पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसके चाचा प्रदीप कुमार ने पांच-छह महीने पहले सुनील उर्फ मन्नी निवासी जाखौली से बाइक खरीदी थी। जिसके कुछ रुपए बकाया था। 11 सिंतबर को वह अपने चाचा की दुकान पर खड़ा था।

वहां सुनील उर्फ मन्नी, छोटा, प्रदीप आए और उसके साथ व उसके चाचा के साथ गाली-गलौज करने लगे। आरोपियों ने हाथापाई भी की। बिट्टू का आरोप था कि 13 सितंबर को वह भैंसों को रजवाहे पर लेकर जा रहा था। सुनील उर्फ मन्नी, सोनू, प्रदीप, ग्यासू, छोटा, सुभी व बंटी हलवाई तीन बाइकों पर सवार होकर आए। आरोपियों ने उस पर गंडासी, लाठी व ईंटों के साथ हमला कर दिया।

ज्यादा चोट लगने की वजह से डॉक्टरों ने उसे सरकारी अस्पताल कैथल से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मारपीट व जान से मारने की धमकी देने की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। बाद में केस में धारा 326 जोड़ी गई थी।

बिट्टू के खिलाफ ये थे आरोप

आरोपी पक्ष की ओर से सुनील उर्फ मुन्नी ने 25 सितंबर को तितरम थाना में बिट्टू, प्रदीप व मटरू पर केस दर्ज करवाया था। आरोप था कि 13 सितंबर को वह बाइक लेकर रजवाहे की तरफ गया था। बाइक खरीदने के मामले में पैसे के लेनदेन को लेकर बिट्टू, प्रदीप व मटरू ने लाठी, डंडा व गंडासी से हमला कर दिया। पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 323, 324, 326, 34 व 506 के तहत केस दर्ज किया था।

बिट्टू ने सुसाइड नोट में ये लिखा

मैं बिट्टू पुत्र नवाब आत्महत्या कर रहा हूं। जिसमें की मेरा मेरे गांव झगड़ा हुआ था और दूसरे लोगों ने मुझे जान से मारने की धमकी दी और कोशिश की है। जिसमें हाथ और माथा पर ज्यादा चोट आई। मैं चंडीगढ़ रेफर कर दिया और दूसरे लोग गैर कानूनी तरीके से डॉक्टरी करवाकर मेरे ऊपर केस कर दिया है और मुझे जान से मारने की धमकी देते हैं।

वो सात सात लड़के हैं। उनके नाम सुनील, ज्ञासू, सोनू, प्रदीप, छोटा, सुभी, बंटी। इन्होंने मुझ पर हमला किया, मेरे खिलाफ तितरम थाना में कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा मुझे तंग करते रहे। तितरम थाना वाले हर रोज मुझे तंग करते रहे। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मैं इससे तंग आकर आत्महत्या कर रहा हूं।

बिट्टू से मारपीट मामले में डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर धारा 326 जोड़ दी थी। सुनील, प्रदीप, राकेश व ग्यासू को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश कर दिया था, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 22 अक्टूबर से आरोपी जेल में हैं। दूसरे पक्ष ने मेडिकल दिया है। एमएलआर डॉक्टर बनाते हैं, पुलिस नहीं बनाती। पुलिस के लिए सभी समान हैं। मामले की निष्पक्ष जांच की गई है।
राजकुमार, एसएचओ थाना तितरम

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