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नाेटबुक व किताबें देकर रसीद तक नहीं दे रहे विक्रेता:निजी स्कूलों की चयनित दुकानों पर 10 की नोटबुक किताबों के सेट में जोड़ 25 में बेची जा रही

यमुनानगर14 दिन पहले
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  • अभिभावक deosecynr@gmail.com व 01732 237812 पर कर सकते हैं शिकायत

हर बार की तरह इस सत्र में भी स्कूल एडमिशन के नाम पर मोटी फीस के साथ अधिकतर निजी स्कूलों में कमीशन के लालच में प्राइवेट किताबों का खेल शुरू हो गया है। जो नोट बुक अन्य दिनों में बाजार से 10 में मिलती है। वही किताबों के साथ सेट लगाकर 20 से 25 रुपए में बेची जा रही है। किताबें देने के बाद कई निजी स्कूलों के चयनित दुकानदार अभिभावकों को कोई रसीद तक नहीं दे रहे हैं।

पेरेंट्स की सहूलियत के लिए डीईओ नमिता कौशिक ने हेल्पलाइन नंबर 01732-237812 जारी किया है। साथ ही ईमेल आईडी deosecynr@gmail.com जारी की है। इस पर प्रूफ के साथ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि रसीद नहीं बिल की मांग करें।

अभिभावक संजीव मेहता का कहना है कि सरकार ने तो एनसीईआरटी की किताबें लगाने को कहा है, लेकिन स्कूल यहां मनमानी कर रहे हैं। निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई जा रही हैं। इनकी कीमत में 3 से आठ गुणा ज्यादा देनी पड़ रही है। शिक्षा विभाग इस तरफ कार्रवाई करे, जिससे इनकी दुकानदारी सिमट जाए।

बड़ी बात तो यह है कि कोई भी विक्रेता किताबों के सेट बेचने के बाद रसीद तक नहीं दे रहा। जबकि बिल काट कर देना चाहिए। हर साल सही खेल खेला जाता है।

सिलेबस हर साल चेंज कर रहे|अभिभावक सुरेंद्र का कहना कहना है कि निजी स्कूल हर साल सिलेबस बदलने के नाम पर प्राइवेट किताबें लगवाते हैं। इसका बड़ा कारण यही है कि एसीईआरटी की किताबें काफी कम कीमत की होती हैं। जबकि प्राइवेट किताबें तीन गुणा महंगी होती हैं। इसमें स्कूल से लेकर बुक विक्रेता तक काे मोटा कमीशन मिलता है। उनकी सरकार से मांग है कि नए सत्र में अभिभावकों से स्कूल की फीस किस्त में ली जाए।

किताबों के रेट में अंतर

कक्षा पहली की एनसीईआरटी की 185 में तो प्राइवेट की 1115 रुपए में मिल रही है। इसी तरह दूसरी कक्षा की 200 में तो प्राइवेट की 1500, तीसरी की 225 ताे निजी की 1700, चौथी की 250 ताे निजी की 2 हजार में, पांचवीं की 400 में तो निजी 2120 में बेची जा रही है। छठी की 500 ताे निजी की 2232, सातवीं की 520 में ताे निजी की 2430, आठवीं की 560 में ताे निजी की 2825, नौंवी की 710 में ताे निजी की 3125, दसवीं कक्षा का सेट 750 में तो निजी का 3515 रुपए में बेचा जा रहा है।
अभिभावक किताबें लेने के बाद विक्रेता से रसीद नहीं बिल देने की मांग करें। स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लगानी अनिवार्य है। अगर किसी पेरेंट्स को कोई शिकायत है तो वह हेल्प ई मेल पर दर्ज करा सकता है। मामले में कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हेल्प लाइन नंबर पर फोन भी कर सकते हैं।
नमिता कौशिक, डीईओ, यमुनानगर

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