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रेवेन्यू ने सभी रिकॉर्ड तोड़े:जिले में अवैध शराब की बिक्री पर लगाम से नौ माह में 178 करोड़ सरकार के खाते में गए

यमुनानगर16 दिन पहले
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  • हर साल जिले में बिकती थी 50 से 80 करोड़ रुपए की अवैध शराब, डिस्टलरी पर पुलिस के पहरे और नए एक्ट ने रोकी, पिछली बार एक साल में 136 करोड़ ही सरकार को मिले थे
  • इस बार अभी ढाई माह का रेवेन्यू और आना है, 200 करोड़ के पार होने का अनुमान

जिले में हर साल 50 से 80 करोड़ रुपए की अवैध शराब बिकती थी। जिस पर इस साल काफी हद तक रोक लगी है। जिससे नौ माह में ही रेवेन्यू ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। नौ माह में ही 178 करोड़ रुपए का रेवेन्यू आया है। जबकि पिछले साल मात्र 136 करोड़ रुपए ही सरकार के खाते में आए थे। इस तरह से रेवेन्यू में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल दो माह का रेवेन्यू सरकारी खाते में आना बाकी है।

इस तरह से 200 करोड़ रुपए के पास जाने की उम्मीद है। इतना रेवेन्यू तब आया है, जब साल 2020 में हर आदमी कोरोना की मार से जूझता रहा। इसमें शराब ठेकेदार भी थे। काफी दिन शराब के ठेके बंद भी रहे। पहले की तरह शादियों में लोग भी कम बुलाए गए। वहीं अन्य कई कार्यक्रम लोेगों ने कोरोना के चलते टाल दिए। जिससे उसमें भी शराब कम ही इस्तेमाल हुई।

इसके बाद भी सरकारी रिकॉर्ड में शराब की बिक्री पिछले सालों से कहीं ज्यादा हुई। यमुनानगर में शराब ठेकों को लेकर 53 जोन हैं । पिछले साल जब ठेको की नीलामी हुई थी तो रिजर्व प्राइस 121 करोड़ रुपए था। लेकिन ठेके 12 प्रतिशत ज्यादा में 136.37 करोड़ रुपए में नीलाम हुए थे।

अगस्त 2020 से बढ़नी शुरू हुई कमाई

एक्साइज विभाग के अनुसार लॉकडाउन के चलते साल 2020 में जुलाई तक सरकार के खाते में कम पैसा आया। यानी कमाई माइनस में थी। लेकिन अगस्त से कमाई बढ़नी शुरू हुई। अगस्त में 4.50 प्रतिशत, सितंबर में 15, अक्टूबर में 22, नवंबर में 21.5, दिसंबर में 22, जनवरी में 27 और फरवरी में 30 प्रतिशत प्लस में रेवेन्यू आया। बताते हैं कि जैसे-जैसे अवैध शराब के स्त्रोतों पर लगाम लगती गई वैसे-वैसे रेवेन्यू बढ़ा गया।

रेवेन्यू बढ़ने के पीछे ये वजह

सरकार ने साल 2020 में ही नया एक्साइज एक्ट लागू किया है। इससे अब अवैध शराब में केस दर्ज होता है। पहले एक्साइज विभाग चालान करता था और जुर्माना लगा देता था। वहीं लॉकडाउन से पहले तक प्रदेश की विभिन्न शराब डिस्टलरी में पुलिस तैनात नहीं होती थी।

वहां से एक परमिट पर कई बार दो से तीन गाड़ियां निकाल दी जाती थी। जबकि सरकारी रिकार्ड में एक परमिट में एक ही गाड़ी निकलती थी। शराब ठेकेदार रिकार्ड में एक गाड़ी मंगवाता था, लेकिन असल में वह दो से तीन गाड़ियां मंगवा चुका होता था। लेकिन अब वहां पर पुलिस तैनात कर दी गई।

वहां से एक परमिट पर एक ही गाड़ी निकल रही है। डिस्टलरी से शराब की अवैध सप्लाई पर काफी हद तक रोक लगी। वहीं प्रदेश में कई जगह नकली शराब बनाने की फैक्ट्रियां पकड़ी गई। इससे शराब ठेकोें पर अवैध शराब पर रोक लगी है।

पिछले साल जगाधरी में पकड़ी गई थी नकली शराब की फैक्ट्री

जगाधरी में पिछले साल नकली शराब बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई थी। यहां बनी शराब वैध लीगल ठेकों पर बिकती थी। वहीं पुलिस ने रादौर, खेड़ी लक्खा सिंह एरिया से बड़ी मात्रा में शराब पकड़ी थी। यह अवैध शराब थी। इसके अलावा इंडस्ट्री एरिया में भी एक ट्रक अवैध शराब का पकड़ा गया था। अवैध और नकली शराब पर अंकुश लगने से शराब ठेकों पर शराब डिस्टलरी से बनकर वैध तरीके से आई शराब ही बिकी। जिससे रेवेन्यू में इतना उछाल आया।

हालांकि इसके पीछे पिछले साल से शराब महंगी होने और कोरोना सेस भी लगाया गया। इससे भी रेवेन्यू बढ़ने में मदद मिली। लेकिन जिस तरह से पिछले साल लॉकडाउन रहा, शादियों में कम लोग पहुंचे अन्य कार्यक्रम कम हुए, इसे वहां पर शराब की खपत कम हुई, लेकिन इसके बाद भी रेवेन्यू में बढ़ोतरी होना कहीं न कहीं सरकार के लिए काफी फायदे में रहा।

पिछले साल 136.67 करोड़ रुपए का शराब से रेवेन्यू आया : अमित

डीईटीसी एक्साइज अमित खनगवाल ने बताया कि पिछले साल 136.67 करोड़ रुपए का शराब से रेवेन्यू आया था। इस बार अब तक 178.24 करोड़ रुपए सरकारी खजाने में गए हैं। अभी दो माह का रेवेन्यू और आना है। उनका कहना है कि अवैध शराब पर रोक लगाने और ठेकेदारों से समय पर सरकारी फीस जमा कराने से रेवेन्यू बढ़ा है।

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