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बेगुनाहों को मिली सजा:बिलासपुर पुलिस ने शराब ठेकेदार की झूठी कहानी पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज कर चार बेगुनाहों को जेल में डाला

यमुनानगर8 दिन पहले
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शराब ठेकेदारों की झूठी कहानी को सच मानकर बिलासपुर पुलिस ने बिना जांच किए हत्या के प्रयास के केस में बेगुनाहों को जेल में डाल दिया। रोज-रोज घर पर पुलिस की रेड और बच्चोें के जेल में होने से परेशान परिवार एसपी के पास पहुंचा। एसपी ने जांच के लिए सीआईए वन को केस भेजा तो शराब ठेकेदारों की झूठी कहानी सामने आ गई। शराब ठेकेदारों ने कुछ ग्रामीणों पर आरोप लगाया कि ठेके पर गोलियां चलाई गईं।

लेकिन जब सीआईए की टीम ने गोलियां चलाने की शिकायत देने वाले शराब ठेकेदार कुलबीर सिंह से पूछताछ की तो सामने आया कि गोली नामजद आरोपियों ने नहीं खुद ही कुलबीर ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से चलाई थी। यह सच्चाई सामने आने में 3 माह से ज्यादा का समय लगा। बिलासपुर पुलिस आंखें बंद कर शराब ठेकेदारों की बात पर विश्वास करती गई और झूठे केस में आरोपियों को पकड़ कर जेल में डालती गई। हालांकि अब पुलिस ने केस से धारा-307 हटा दी है और सब इंस्पेक्टर मनोज वालिया की शिकायत पर कुलबीर, जगदीप सिंह, सुकराम, परमिंद्र सिंह, देव सिंह, चेतन राणा, संदीप गुर्जन पर बिलासपुर थाना में धारा-285, 211, 195, 182, 120बी और अमर्स एक्ट में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस चश्मदीद ठेके के कारिंदे कर्मवीर हैप्पी और संजीव तक पहुंची तो सारा मामला पलट गया। दोनों ने कहा कि घटना के दिन न तो वे ठेके के अंदर थे और न ही किसी ने फायरिंग की। इसके बाद स्टाफ ने कुलबीर से पूछताछ की। जांच टीम के मुताबिक कुलबीर (शिकायतकर्ता) ने माना कि उसने अपने लाइसेंस बंदूक 12 बोर से एक हवाई फायर किया था, एक फायर ठेके के शटर पर किया था। उसने बिंद्र पर बड़ा केस बनवाने के लिए यह कहानी बुनी। हालांकि यह बात सामने आई है कि जिन पर कुलबीर ने केस दर्ज कराया है उन्होंने मारपीट की थी।

मछरौली निवासी बलजीत सिंह की अग्रिम जमानत याचिका 27 अगस्त को डिसमिस हो गई। बलजीत के वकील ने कहा कि आरोप झूठे हैं। लेकिन अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ता का वकील कहता रहा मामला गंभीर है। अग्रिम जमानत नहीं बनती। वहीं बलविंद्र उर्फ बिंद्र की अग्रिम जमानत याचिका 23 अगस्त को डिसमिस हो गई। इसी तरह शमशेर को अपनी जमानत याचिका 31 अगस्त को वापस लेनी पड़ी। हालांकि सितंबर में उन्होंने दोबारा याचिका लगाई तो वह डिसमिस हो गई। इसके बाद अनिल कुमार की एक सितंबर को जमानत याचिका डिसमिस हो गई। उनके वकील वीरेंद्र सिंह ललहाड़ी की तरफ से कहा गया कि धारा-307 का आरोप फर्जी है। लेकिन कोर्ट ने जमानत नहीं दी। आरोपी राजेश ने दो बार याचिका लगाई, लेकिन वापस लेनी पड़ी। शराब ठेकेदार ने कोर्ट में अपना वकील तक खड़ा किया ताकि जमानत याचिका मंजूर न हो।

गांव बुटगढ़ निवासी कुलबीर सिंह ने शिकायत दी थी कि उसने महेंद्र सिंह राणा से गांव मछरौली, मोहड़ी, नागलपत्ती और नगली का शराब का ठेका लिया हुआ है। कुलबीर, सुखजिंद्र, गुरदेव और जगदीप कैश लेने जा रहे थे। बिंदू ने अपने साथियों के साथ उन्हें मछरौली गांव में रोक लिया। कहने लगा कि अगर उनके यहां पर शराब का ठेका चलाना है तो उसे पैसे देने पड़ेंगे। वहां पर उन पर हमला कर दिया। कार तोड़ दी। वहां से किसी तरह भागकर वे अपने ठेके पर पहुंचे। वहां पर भी हमलावर आ गए और उन पर हमला कर दिया। बाद में हमलावर वहां से चले गए थे। इसके बाद वे भी वहां से आ गए थे। तब ठेके पर कर्मवीर और संजू रह गया था। कारिंदों का रात करीब 12 बजे फोन आया कि ठेके के बाहर लोग आ गए हैं और उनके पास हथियार हैं। इसी दौरान हमलावरों ने गोली चला दी। गोली ठेके पर जा लगी। इस मामले में बिलासपुर पुलिस ने 5 जुलाई को बिंद्र, काका सिंह, बबलू व 15-20 अन्य के खिलाफ धारा-148, 149, 307, 427 और आर्म्स एक्ट में केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया विवाद जरूर हुआ था, लेकिन नामजद आरोपियों ने गोली नहीं चलाई।

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