पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कागजी कमेटियां, न जांच हो रही, न ही कार्रवाई:सदन बैठक में कई कामों की जांच को बनी कमेटियां, अफसर 15 दिन में भी नहीं कर पाए साइट विजिट

यमुनानगर11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • आरोप- नियमों से परे जाकर हो रहे नगर निगम के काम, पर ऐसा कर रहे ठेकेदारों व अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं

नगर निगम के निर्माण कार्य निगम अफसरों व ठेकेदारों की मनमर्जी या नियमों से परे जाकर किए जा रहे हैं। ऐसे आरोप हर सदन बैठक में पार्षद लगाते रहे हैं। वहीं, कई निर्माण कार्यों में बड़ी गड़बड़ी भी गिना चुके हैं। बावजूद इसके कार्रवाई सदन बैठकों में जांच कमेटियां गठित करने तक सिमटी है। कई मामलाें में पिछली सदन बैठकों में पहले ही कमेटियां गठित थी, पर उनकी जांच का ब्यौरा दिए बिना अगली सदन बैठक में कमेटियों के अफसर बदल डाले गए।

ऐसा ही 24 अगस्त की सदन बैठक में भी हुआ। बूड़िया गेट पर नाले निर्माण में गड़बड़ी व कुंडी पार्क से बिछाई नई टाइलें गायब होने के मामले में पिछली सदन बैठक में कमेटियां गठित थी, पर न जांच हुई और न किसी पर कार्रवाई। बीती सदन बैठक में कमेटी में जॉइंट कमिश्नर को शामिल कर जांच का जिम्मा दिया। जिन्हें पार्षद के साथ साइट विजिट करनी थी, लेकिन वार्ड पार्षद का आरोप है कि 15 दिन बाद भी कोई साइट विजिट के लिए नहीं आया है। उधर, मेयर मदन चौहान का कहना है कि कमेटियों से रिपोर्ट लेंगे। इसमें जो भी कार्रवाई बनेगी, वो अमल में लाएंगे।

अफसराें ने नहीं की विजिट| वार्ड-4 से पार्षद देवेंद्र सिंह ने कहा कि कुंडी पार्क में इंटरलॉकिंग टाइलें कुछ समय पहले लगाईं और उन्हें निकालकर गायब कर दिया गया। ऐसे ही, बूड़िया गेट से बूड़िया चूंगी तक नाले का लेवल ठीक नहीं है। ये दोनों मामले दोनों सदन बैठक में उठाए।

दोनों में जांच कमेटियां बनी, पर न तो दोनों मामलों में जांच हुई न किसी पर कोई कार्रवाई। 24 अगस्त की सदन बैठक में भी पुरानी कमेटियों ने क्या जांच की, इसका ब्यौरा नहीं दिया। जबकि, दोनों मामलों में जांच व कार्रवाई न होने पर पर्दा डाल मेयर ने कमेटी में जॉइंट कमिश्नर को शामिल कर जांच का जिम्मा दे दिया। उनके साथ कमेटी के अफसरों को साइट विजिट करनी थी, पर 15 दिन बाद भी कोई अफसर साइट विजिट के लिए नहीं आया।

जॉइंट कमिश्नर का तबादला भी कुरुक्षेत्र हो चुका है। इस तरह लगातार दो सदन बैठकों में कमेटियां बनने के बाद भी न तो जांच आगे बढ़ पाई। न तो टाइलें गायब करने और न ही नाले के निर्माण में गड़बड़ी के जिम्मेदार ठेकेदार या अफसर पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

ऐसे ही, 24 अगस्त की सदन बैठक में वार्ड-11 में सुंदर विहार पार्ट-2 अनधिकृत कॉलोनी होने के बाद भी वहां सड़क निर्माण हो गया, इस मामले में भी जांच कमेटी बनी थी, पर इस मामले में भी अफसरों ने न तो उनके साथ साइट विजिट की और न ही उन्हें किसी तरह की जांच में शामिल किया।

कमेटियां नहीं हटवा पाई नालों से कब्जे : निर्मल
बीती तीन सदन बैठकों में नालों पर अवैध कब्जे के मामले भी पार्षदों ने उठाए। हर बैठक में कमेटियों के अफसर बदल जांच व कार्रवाई का जिम्मा सौंप दिया। अभी भी कमेटियां नालों पर कब्जों का पता लगाने के लिए सर्वे से आगे कुछ नहीं हो पाईं। 24 अगस्त की सदन बैठक में डीएमसी ने नालों पर 16 जगह अवैध कब्जे की रिपोर्ट दी, पर उन पर 30 सितंबर तक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

इसमें 20 दिन शेष है, किंतु अभी तक किसी भी नाले पर अवैध कब्जे नहीं हटाए जा सके। जबकि, पार्षदों का कहना है कि नालों पर 16 जगह नहीं बल्कि सही सर्वे किया जाए तो सौ से ज्यादा अवैध कब्जे मिलेंगे। वार्ड-13 से पार्षद निर्मल चौहान ने कहा कि गत मंगलवार की बरसात में भी नाले शहर के निचले इलाकों में जलभराव की वजह बने। अब बरसाती सीजन खत्म होने को है, तब भी अफसर नालों से कब्जे नहीं हटवा पाए हैं।

खबरें और भी हैं...