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प्लानिंग:कॉमन स्टीम बाॅयलर लगेंगे, नई प्लाईवुड फैक्टरी लगाने व पहले से लगी फैक्टरी चलाने का खर्च घटेगा

यमुनानगर20 दिन पहले
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यमुनानगर|प्लाइवुड फैक्ट्री में सर्वे करने पहुंची टीम। - Dainik Bhaskar
यमुनानगर|प्लाइवुड फैक्ट्री में सर्वे करने पहुंची टीम।
  • एक कॉमन प्लांट से 10 किमी दूर तक सप्लाई की जा सकेगी स्टीम, 30 से 300 टन का प्लांट लग सकता है
  • अभी इस तरह के प्लांट गुजरात में चल रहे, यमुनानगर और पानीपत में लगाने की प्लानिंग

प्लाईवुड इंडस्ट्री लगाने और चलाने का खर्च कम करने के लिए कॉमन स्टीम बायलर लगाए जाएंगे। इसे लेकर सोमवार को केंद्र सरकार के एमएसएमई और प्लांट लगाने वाली स्टीम हाउस कंपनी की टीम यमुनानगर सर्वे करने पहुंची। टीम ने कई जगह सर्वे कर प्लांट के लिए जमीनी हकीकत तलाशी।

इस दौरान पाया कि यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री के लिए यह प्लांट जरूरी है। जिस तरह से यमुनानगर प्रदूषण के मामले में बदनाम है, इसके पीछे हर फैक्टरी में लगा बायरल भी जिम्मेदार है क्योंकि हर मिनट फैक्टरियों की चिमनियां हवा को दूषित कर रही हैं। कॉमन स्टीम बायलर लगने से काफी हद तक प्रदूषण कम होगा।

दावा है कि 99 प्रतिशत कम पॉल्यूशन होगा। लघु उद्योग भारती प्लाईवुड चैप्टर के जिलाध्यक्ष मेहंत गुप्ता ने बताया कि टीम ने कई जगह सर्वे किया है। प्लाईवुड व्यापारी कॉमन प्लांट के लिए तैयार हैं। प्लांट वहां पर लगाने की योजना है जहां पर एक जगह 15 से 20 फैक्टरियां हैं। प्लांट की क्षमता डिमांड के हिसाब से होगी।

फिलहाल हरियाणा में इस तरह का कहीं भी कोई प्लॉट नहीं है। सरकार हरियाणा में पानीपत और यमुनानगर में प्लांट लगाना चाहती है। इस तरह के प्लॉट अभी गुजरात में चल रही है। सरकार और कंपनी नया प्लांट लगाने का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार हैं। जरूरत पड़ी तो उद्योगपतियों से इसके लिए जमीन मांगी जा सकती है।

इससे बिजली भी बनेगी, जिससे फैक्टरी तक चलाई जा सकती है| स्टीम हाउस कंपनी के एमडी विशाल बुदिया ने बताया कि जो स्टीम प्लांट लगेगा उससे बिजली भी बनाई जा सकेगी। इस बिजली से फैक्टरी तक चलाई जा सकती हैे। उनका कहना है कि अगर 30 टन का प्लांट लगता है तो उस पर 15 से 20 करोड़ का खर्च आएगा।

इस प्लांट में एक मेगावॉट तक बिजली बन सकेगी। टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि कॉमन प्लांट से 10 किलोमीटर दूर तक फैक्टरी में स्टीम पाइप के जरिए सप्लाई की जा सकेगी। कॉमन प्लांट में तैयार की गई स्टीम की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। 10 से 15 फैक्टरियों को वहां से जरूरत के हिसाब से स्टीम सप्लाई करने की प्लानिंग है।

अभी इतने पैसे खर्च करने पड़ते हैं बायलर लगाने के लिए| बायलर लगाने पर लाखों रुपए का खर्च है। अगर किसी फैक्टरी में 8 से 10 टन प्रति दिन स्टीम की जरूरत है तो वहां 35 से 40 लाख रुपए में बायलर लगता है। बायलर लगाने के लिए 400 से 500 गज से ज्यादा जमीन चाहिए होती है। वहीं वहां पर अलग से कर्मचारी तैनात किए जाते हैं।

हर दिन बायलर चलाने के लिए इंधन की जरूरत होती है। वहीं सबसे बड़ा बायरल से हादसा होने का भी डर रहता है। बहुत सी फैक्टरियां बायलर में आग लगने से खाक हो जाती हैं। इस तरह का डर हर समय बना रहता है। इसकी मेंटिनेंस पर भी लाखों रुपए खर्च होते हैं।

ये फायदे गिनाए कॉमन स्टीम बायलर के
एमएसएमई-डीआई करनाल के डायरेक्टर संजीव चावला और स्टीम हाउस कंपनी के एमडी विशाल बुदिया ने बताया कि कॉमन स्टीम बायलर लगाने का सबसे बड़ा फायदा प्लाईवुड व्यापारियों को अपनी फैक्टरी में बायलर लगाना नहीं पड़ेगा। इससे उनका लाखों रुपए का फायदा होगा।

वहीं शहर में पॉल्यूशन कम होगा क्योंकि हर फैक्टरी में बायलर लगने से पॉल्यूशन काफी बढ़ता है। कॉमन प्लांट लगने से 99 प्रतिशत तक पॉल्यूशन कम होने का दावा है। विशाल बुदिया के अनुसार अभी जो फैक्टरियों में बायलर लगे हैं, उससे बनने वाली स्टीम पर करीब डेढ़ रुपए प्रति किलो का खर्च आता है। कॉमन प्लांट लगने से उसी रेट में उन्हें स्टीम सप्लाई की जाएगी।

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