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2 दिन बाद खुल रहे स्कूल:असमंजस में विद्यार्थी; बच्चों के खाते में पैसे आएंगे या स्कूलों से मिलेगी किताबें, अभी स्थिति स्पष्ट नहीं

यमुनानगर16 दिन पहले
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  • नए सत्र में हुए एडमिशन के बाद सरकारी स्कूलों में बढ़ी बच्चों की संख्या के कारण अधिकतर को नहीं मिली किताबें

कोरोना काल के चलते सरकार की ओर से पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिल पाई हैं। छठी से आठवीं तक के स्कूल दो दिन बाद खुल रहे हैं। अभी तक सरकार की ओर से यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है कि बच्चों काे किताबें दी जाएगी या उनके खाते में पैसे डाले जाएंगे। नए सत्र में सरकारी स्कूलों में बढ़ी विद्यार्थियों की संख्या के कारण सभी बच्चों को पारस्परिक आदान प्रदान से भी किताबें नहीं मिल पाई हैं।

सरकार 23 जुलाई से छठी से आठवीं तक के स्कूल खोल रही है। विद्यार्थी दुविधा में इसलिए हैं क्योंकि इनके पास न तो किताबें आई हैं न ही इनकेे खाते में सरकार ने पैसे डाले हैं। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से बच्चों के खाते में किताबों के लिए पैसे डालने का निर्णय लिया गया था। बाद में अध्यापक यूनियनों ने इसका विरोध प्रदेश स्तर पर किया था।

पदाधिकारियों ने अपना तर्क दिया था कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर विद्यार्थी आर्थिक रुप से सुदृढ़ नहीं हैं। ऐसे में अगर इनके खाते में किताबों के नाम के पैसे डाले जाते हैं ताे यह पैसा परिवार के लोग अन्य कार्यों में खर्च कर देेंगे। इससे विद्यार्थी फिर से बिना पुस्तकों के रह जाएंगे। पैसे देने के बाद भी विद्यार्थी पुस्तकें नहीं ले पाएंगे। यह फैसला सरकार को वापस लेना चाहिए।

अभी न पैसे आए न किताबें | अध्यापक आएस सिंह ने बताया कि स्कूल खुलने में 2 दिन रह गए हैं। छठी से आठवीं वाले विद्यार्थी स्कूल आकर पढ़ाई कर सकेंगे। कई विद्यार्थी ऐसे हैं जिनके पास किताबें नहीं हैं। सरकार ने एक पत्र जारी किया था जिसमें बताया गया था कि पारस्परिक आदान प्रदान से किताबें दी जाएं। ऐसा किया गया, लेकिन 60 से 62 प्रतिशत ही विद्यार्थी ऐसे रहे जिनके पास पुरानी किताबें पहुंच गई।

अभी भी ऐसे विद्यार्थी कम नहीं है जिनको किताबों की जरूरत है। बड़ी बात तो यह है कि बाजार में भी किताबें नहीं है। ऐसे में दुविधा यह है कि बिना किताब के स्कूल जाकर कैसे विद्यार्थी पढ़ाई कर पाएंगे। वहीं अध्यापक रमेश ने बताया कि नए सत्र में स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। पारस्परिक आदान-प्रदान होने के बाद भी सभी को इसी के चलते किताबें नहीं मिल पाई। किताबें कम पड़ रही हैं।

डिप्टी डीईओ बोले- विभाग की ओर से अभी स्थिति स्पष्ट नहीं

डिप्टी डीईओ पृथ्वी सैनी ने बताया कि सरकार बच्चों को किताबों के लिए पैसे देगी या किताबें भेज रही है। इसके बारे में मुख्यालय की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है ।अध्यापक अपने स्तर पर इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाई करा रहे हैं।

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