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यमुनानगर:एक भी किरायेदार को दुकान नहीं बेच पाया निगम, 6 फाइलें आई, वाे भी जांच से पहले गुम

यमुनानगर3 दिन पहले
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  • निगम का ऑफर- 20 साल पुराने किरायेदार कलेक्टर रेट देकर बनें दुकानों के मालिक
  • यमुनानगर व जगाधरी में निगम की 1152 दुकानें जिन्हें अलॉट हैं, उनमें ज्यादातर ने आगे किसी और को की सबलेट

नगर निगम डेढ़ साल से ऑफर दे रहा है कि 20 साल पुराने किरायेदार कलेक्टर रेट देकर नगर निगम की दुकान के मालिक बन सकते हैं। जबकि हकीकत ये है कि अभी तक निगम एक भी किरायेदार को दुकान नहीं बेच पाया है। क्योंकि अभी तक स्कीम के कई बिंदु डाउटफुल हैं, जिन पर अफसरों को भी कुछ क्लीयर नहीं हैं। ऐसी स्थिति में स्कीम के पात्र होते हुए भी किरायेदार रुझान नहीं दिखा रहे। अभी तक छह आवेदन फाइलें ही आईं, उन्हें सबमिट करने वाले दुकानदारों की मानें तो रेंट ब्रांच से फाइलें कमेटी की जांच से पहले ही गुम हो गई हैं।

नगर निगम की यमुनानगर व जगाधरी शहर में 1152 दुकानें किराये पर हैं। मार्केट की अन्य दुकानों के रेंट की तुलना में निगम की दुकानों का किराया नाम मात्र है, जिन्हें ये दुकानें अलॉट हुईं, उन्होंने इन्हें आगे सबलेट कर दिया। ऐसे में 20 वर्ष या उससे अधिक पुराने किरायेदारों को कलेक्टर रेट पर दुकान देने की स्कीम में अलॉटी या सबलेटी में कौन पात्र होगा, इसको लेकर पेंच फंस गया है।

स्कीम के अन्य कई नियम-शर्ते भी उलझन में डाल रहे हैं। जिन पर अफसरों के पास भी स्पष्ट जवाब नहीं है। हालांकि निदेशालय से दिसंबर-2018 में जारी पत्र के बाद निगम की ओर से मांगे मार्गदर्शन में कई बिंदु क्लीयर कर दिए गए, लेकिन अलॉटी व सबलेटी में कौन पात्र होगा, ये अभी क्लीयर नहीं है। फाइलों का ही नहीं लग रहा पता: रिशु, अशोक गोयल ने बताया कि रेंट ब्रांच में तमाम कागजात लगाकर स्कीम में अप्लाई किया था। लेकिन पहले कर्मचारी कई बिंदू पर मार्गदर्शन लेने की बात कहते रहे और अब फाइलों का ही पता नहीं लग रहा।

निदेशालय ने ये बिंदु किए क्लीयर

  • यदि किरायेदार दुकान का किराया 20 वर्ष से जमा करा रहा है तो ऐसी दुकान असल अलॉटी को कलेक्टर रेट पर अलॉट की जा सकती है या नहीं?
  • निदेशालय: ऐसी दुकान असल अलॉटी के नाम ही है व उसने सिर्फ किराये पर दी है तो असल अलॉटी को ही कलेक्टर रेट पर दी जा सकती है।
  • कुछ किरायेदारों ने दुकानों के ऊपर प्रथम तल का निर्माण कर लिया है। ऐसे में कलेक्टर रेट की फीस केवल भूमि तल के लिए ली जाए या प्रथम तल के लिए भी?
  • निदेशालय: भूमि तल की कीमत ली जाएगी। बशर्ते अलॉटी/किरायेदार पहले प्रथम तल तोड़ेगा और अनुपालना रिपोर्ट देगा, तभी उसे दुकान बेची जाएगी।

अफसरों की उलझन

  • जिन्हें दुकानें अलॉट की, उन्होंने किसी और को सबलेट कर दिया। सबलेटी को दुकान लिए 20 वर्ष पूरे नहीं हुए और असल अलॉटी को 20 वर्ष से ज्यादा हो गए, लेकिन असल अलॉटी के पास दुकान का कब्जा नहीं है। ऐसे में दुकान असल अलॉटी या सबलेटी में किसी बेची जाए?
  • अलॉटी ने दुकान को आगे सबलेट कर दिया, लेकिन अब भी दुकान उसके नाम ही है। सबलेटी को दुकान लिए 20 वर्ष पूरे हो चुके हैं। ऐसे में दुकान असल अलॉटी या सबलेटी में किसे बेची जाए?

मीराबाई मार्केट एसोसिएशन के प्रधान प्रेमसागर शर्मा ने कहा कि स्कीम को लागू नहीं किया जा रहा। मार्केट के कुछ किरायेदारों ने अप्लाई किया, लेकिन अभी कुछ स्पष्ट नहीं हुआ। इसीलिए दूसरे किरायेदार भी आवेदन नहीं कर रहे। इस बारे में मेयर मदन चौहान से मिले थे, जिन्होंने स्कीम का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया है।

स्कीम को लेकर पूरी गाइडलाइन आ चुकी है। इसमें किस स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं किया जा रही, इस बारे में संबंधित ब्रांच अधिकारी से बात करेंगे। धर्मवीर सिंह, कमिश्नर, नगर निगम।

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