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तख्तापलट का असर:म्यांमार में तख्तापलट; प्लाईवुड इंडस्ट्री में 20% तक बढ़े दाम, बर्मा से 70 प्रतिशत फेस विनियर की सप्लाई होती है

यमुनानगर15 दिन पहले
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  • जो आधी रह गई, फेस के बिना तैयार नहीं हो पाती प्लाइवुड

बर्मा (म्यांमार) में सेना के तख्ता पलट से यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री पर विपरीत असर पड़ा है। क्योंकि बर्मा से आने वाले फेसविनियर से प्लाईवुड तैयार होता है। करीब 70 प्रतिशत फेसविनियर वहीं से आता है, लेकिन वहां पर बिगड़े हालात से फेसविनियर नहीं आ पा रहा है। दूसरे देशों के फेसविनियर से खपत पूरी नहीं हो रही है। इससे फेस विनियर के रेट 20% से ज्यादा बढ़ गए हैं।

बर्मा के हालात नहीं सुधरे तो यमुनानगर की प्लाईवुड इंडस्ट्री बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगी। पहले यमुनानगर में हर दिन 10 कंटेनर फेसविनियर के आते थे, लेकिन अब 4 से 5 आ रहे हैं। फेसविनियर के बढ़ते रेट से परेशान व्यापारियों की दिक्कत गेहूं के सीजन ने बढ़ा दी है, क्योंकि कटाई के लिए लेबर नहीं मिल पाती और मंडी में डिमांड के अनुसार लकड़ी नहीं पहुंचती, जिससे पोपुलर के रेट 10 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। बता दें कि दो फरवरी को बर्मा में तख्तापलट हुआ था।

फेस बिना प्लाईवुड नहीं हो पाती तैयार

प्लाईवुड तैयार करने के लिए फेसविनियर जरूरी है। पोपुलर से पहले सीट तैयार की जाती है। उसके दोनों तरफ फेसविनियर लगाया जाता है। तब प्लाईवुड तैयार होता है। फेसविनियर बर्मा, चीन समेत अन्य कई देशों से आता है। यमुनानगर प्लाईवुड का हब है। यहां से 100 ट्रक हर दिन प्लाईवुड तैयार होकर देश के कई हिस्सों में जाते हैं।

कई राज्यों में लॉकडाउन का डर

कोरोना के बढ़ते केसों के चलते महाराष्ट्र से लेकर कई राज्यों में लॉकडाउन लगने लगा है, जिसका असर यमुनानगर की इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि महाराष्ट्र में काफी माल जाता है। वहां लॉकडाउन लगने से व्यापारी माल नहीं मंगवा रहे हैं। पुरानी पेमेंट फंसने का डर है। लेबर भी डर रही है कि कहीं लॉकडाउन न लग जाए।

फेस विनियर नहीं आ पा रहा: फेस विनियर एसोसिएशन के पदाधिकारी रजनीश छाबड़ा ने बताया कि फेसविनियर को लेकर हम पूरी तरह से बर्मा के भरोसे हैं। वहां पर सेना ने तख्ता पलट कर दिया है। इससे वहां व्यापार धंधे बंद हैं। हर दिन विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जिससे वहां से फेसविनियर नहीं आ रहा है। इसलिए रेट बढ़े हैं। अगर ये ही हाल रहे तो दिक्कत और बढ़ेगी। करीब 70 प्रतिशत फेसविनियर बर्मा से आता है। चीन और अन्य देशों से 20 से 30% ही आता है।

चारों तरफ से मार पड़ रही: चोपाल

हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के वाइस प्रेजिडेंट सतीश चोपाल ने बताया कि बर्मा में तख्ता पलट के चलते फेस विनियर नहीं आ रहा है। इससे मार्केट में कमी के चलते फेस विनियर के व्यापारी मनमाने रेट पर फेस दे रहे हैं। इसका असर प्लाईवुड बिजनेस पर पड़ रहा है। पिछले दिनों चार दिन तक फैक्ट्रियां भी बंद करनी पड़ी थी।

इन दिनों हर साल रेट बढ़ते हैं

लक्कड़ मंडी एसोसिएशन के पदाधिकारी बलदेव पंवार ने बताया कि गेहूं कटाई के सीजन में लकड़ी की आवक कम हो जाती है। इससे रेट बढ़ते हैं। हर साल ये रेट बढ़ते हैं। पिछले सप्ताह तक पोपुलर का रेट प्रति क्विंटल 850 रुपए तक था, लेकिन अब 950 रुपए तक चला गया है। गेहूं के सीजन के बाद रेट फिर कम होंगे।

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