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साइबर फ्रॉड:डॉक्टर के खाते से साइबर ठगों ने ‌2.42 लाख निकाले, बैंक मैनेजर पर केस, आरोप-ठगों के साथ मिलकर निकाले

यमुनानगर8 दिन पहले
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आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजर ने साइबर ठगों के साथ मिलकर उसके साथ धोखाधड़ी की - Dainik Bhaskar
आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजर ने साइबर ठगों के साथ मिलकर उसके साथ धोखाधड़ी की
  • मैनेजर बोले- कस्टमर ने ठगों को ओटीपी शेयर किया
  • ठगी के बाद बैंक ने डॉक्टर के खाते में 2.42 लाख जमा किए, बाद में इन्हें निकाला, यहीं से विवाद हुआ, इसी आधार पर केस भी दर्ज किया गया

आर्मी से रिटायर्ड डॉक्टर रविंद्र इंद्रा के साथ 2.42 लाख रुपए की ठगी हो गई। उन्होंने आरोप लगाया है कि आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजर ने साइबर ठगों के साथ मिलकर उसके साथ धोखाधड़ी की। उसने शिकायत की तो बैंक ने उनके खाते में 2.42 लाख रुपए वापस भेज दिए। लेकिन वे उस पैसे को निकाल नहीं सकते थे। उनका बैंक मैनेजर से विवाद हुआ तो जो पैसे अकाउंट में आए तो उसे वापस बैंक ने निकाल लिया।

हुडा थाना पुलिस ने मैनेजर पर केस दर्ज किया है। वहीं बैंक मैनेजर हिमांशु भटनागर का कहना है कि सभी आरोप गलत हैं। बैंक ने जांच रिपोर्ट पुलिस को दी है। उसमें सामने आया है कि कस्टमर ने ओटीपी शेयर किया है। वे खुद या फिर बैंक का कोई भी कर्मचारी ठगी करने वालों से नहीं मिला हुआ है।

शेयर मार्केट में पैसा लगाने के लिए खोला था अकाउंट, पैसे ट्रांसफर करते समय आई थी दिक्कत

इंद्रा अस्पताल के डॉक्टर रविंद्र इंद्रा ने पुलिस को शिकायत दी है कि वह आर्मी से रिटायर्ड हैं। उन्होंने अब ईएसआई के सामने अस्पताल खोला हुआ है। उनका आईसीआईसीआई पटियाला में 16-17 साल से अकाउंट है। 16 दिसंबर 2020 को उन्होंने ग्रो कंपनी के एप से डिमेट अकाउंट खोला। उन्हें अपने अकाउंट के एप से 9 हजार रुपए ट्रांसफर करने थे। जैसे ही पैसे ट्रांसफर किए तो उसके खाते से पैसे कट गए, लेकिन ग्रो कंपनी के खाते में नहीं गए। उन्होंने ग्रो कंपनी का गूगल से हेल्प लाइन नंबर तलाशा।

उन्होंने उस नंबर पर कॉल किया तो कॉल रिसीव नहीं हुई। कुछ देर बाद बैक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ग्रो कंपनी का कर्मचारी बताया। उन्होंने काॅल करने वाले को पूरी बात बताई। उसने कहा कि बैंक के एप से पेमेंट की है इसलिए दिक्कत है। इसे ठीक करने में कुछ समय लगेगा। इसके बाद फिर कॉल कर उन्हें कहा कि वे बैंक का एप ओपन करें। उसके कहने पर एप ओपन किया लेकिन उन्होंने कोई ओटीपी उन्हें नहीं बताया।

उसके अकाउंट से 42 हजार एक और दूसरी बार में 2 लाख रुपए की राशि निकल गई। तब उसने कॉल करने वाले से कहा कि 2.42 लाख रुपए खाते से निकल गए तो उसने कहा कि उनके अकाउंट से निकली पेमेंट जल्द वापस आ जाएगी, लेकिन पेमेंट नहीं आई। वह बैंक गया। वहां पूरी बात बताई तो उससे शिकायत ली गई। वहीं उसका अकाउंट, एटीएम और एप फ्रीज कर दिया और आश्वासन दिया कि उनका जो पैसा कटा है, वह वापस मिल जाएगा।

कुछ समय बाद उनके पास बैंक के अधिकारी का फोन आया। उसने कहा कि उनकी समस्या का समाधान किया जा रहा है। वे अपना मोबाइल बैंक में जाकर चेक कराएं। इसके बाद वह बैंक के डिप्टी मैनेजर से मिला। उन्होंने मोबाइल चेक कर बताया कि उनका कोई दोष नहीं है। आपकी पेमेंट मिल जाएगी। तब उनके अकाउंट में 2.42 लाख रुपए की पेमेंट आ गई। लेकिन वे उसे निकाल नहीं सकते थे। बैंक मैनेजर ने उन्हें कहा कि 6 सप्ताह में बैंक जांच पूरी कर लेगा। लेकिन छह सप्ताह होने पर किसी का कोई कॉल बैंक से नहीं आया। वह बैंक में कई चक्कर लगा चुका था।

एक दिन उसने बैंक मैनेजर को कहा कि वह उनकी शिकायत करेगा ताे मैनेजर ने कहा कि जो चाहे कर लो, अब वह अपने अकाउंट से पेमेंट नहीं निकवा पाएगा। इसके बाद 11 फरवरी को उसके खाते में जो 2.42 लाख रुपए आए थे वे कट गए। डॉक्टर ने शिकायत में बताया कि उन्होंने अकाउंट की जांच की तो उनके अकाउंट से पैसा पश्चिम बंगाल निवासी आनुरुल मंडल के खाते में गई। इस शिकायत पर हुडा थाना पुलिस ने आईसीआईसी बैंक मैनेजर पर केस दर्ज किया है।

शैडो बैलेंस जांच के बाद क्लियर होता है कि कस्टमर को जाएगा या फिर बैंक को

आईसीआईसीआई बैंक के काॅरपोरेट कम्यूनिकेशन टीम के अुनसार जब किसी कस्टमर के साथ ऑनलाइन ठगी होती है तो उसकी जांच होती है कि कस्टमर की गलती नहीं हाे ताे इस जांच के बीच शैडो बैलेंस बैलेंस कस्टमर के अकाउंट में भेज देते हैं। इसे कस्टमर निकाल नहीं सकता। जब तक जांच पूरी नहीं हो पाती। जांच पूरी होने पर अगर कस्टमर की गलती मिलती है तो शैडो बैलेंस वापस ले लिया जाता है। शैडो बैलेंस वापस लेने से पहले कस्टमर को लेटर भेजा जाता है, जिसमें पूरी बात होती है। अगर कस्टमर की गलती न हो तो उसे कस्टमर को दे दिया जाता है।

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