निजी अस्पताल डेंगू पेशेंट से भरे पड़े:डेंगू वार्ड में सिर्फ एक बेड होने से जनरल वार्ड में एक-एक बेड पर 2-2 पेशेंट भर्ती

यमुनानगर2 महीने पहले
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यमुनानगर| डेंगू पीड़ित पेशेंट को दूसरे पेशेंट के साथ लेटाया गया। - Dainik Bhaskar
यमुनानगर| डेंगू पीड़ित पेशेंट को दूसरे पेशेंट के साथ लेटाया गया।
  • सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में एक बेड का डेंगू वार्ड, सरकारी रिकाॅर्ड में 30 डेंगू मरीज मिल चुके

इन दिनों डेंगू कहर बरपा रहा है। सरकारी रिकॉर्ड में पांच दिन में डेंगू के पेशेंट तीन गुना बढ़े हैं। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयारी की बात कह रहा है। इसमें एक तैयारी है डेंगू वार्ड बनाने की। जिले में एकमात्र सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में डेंगू वार्ड बनाया गया है। इसमें मात्र एक बेड है। वैसे तो यह डॉक्टर रेस्ट रूम है।

डॉक्टर के रेस्ट करने के हिसाब से यहां सब सुविधाएं हैं। इसलिए शायद यहां पर डेंगू के पेशेंट नहीं लेटाए जा रहे हैं। डेंगू के पेशेंट को जनरल वार्ड में भेजा जा रहा है। वहां बेंड नहीं है। वहां उसे पहले से लेटे मरीज के पास लेटाया जा रहा है। यानी कि एक बेड पर दो पेशेंट।

इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा रहा है कि सरकारी स्तर पर डेंगू से निपटने और डेंगू की चपेट में आए पेशेंट के लिए सरकारी स्तर पर क्या इंतजाम हैं। शायद इसलिए सरकारी रिकाॅर्ड में अभी तक जिले में डेंगू की चपेट में आने वाले 30 ही लोग हैं। जबकि प्राइवेट अस्पताल डेंगू के पेशेंट से भरे पड़े हैं।

वार्ड के नाम पर लिखकर चस्पाया डेंगू वार्ड| सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में जो डेंगू वार्ड बनाया गया है, उसे नाम के लिए ही बनाया गया। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है कि यमुनानगर के सिविल अस्पताल में डेंगू वार्ड है। यहां वार्ड के दरवाजे पर एक पेज डेंगू वार्ड लिखकर चस्पा दिया गया है। हालांकि अंदर एक बेड से लेकर एसी लगा है और शौचालय तक है। लेकिन शायद यह पेशेंट के लिए नहीं है। क्योंकि यह डॉक्टर का रेस्ट रूम है।

ट्राॅमा सेंटर के वार्ड में बन सकता है डेंगू वार्ड| कोरोना काल में ट्रॉमा सेंटर के दो वार्ड को आइसोलेशन वार्ड में बदल दिया गया था। वहीं, सिविल अस्पताल की एक बिल्डिंग में आईसीयू बनाया गया था। अब कोरोना के इतने पेशेंट नहीं आ रहे।

इसलिए ट्रॉमा सेंटर के दोनों वार्ड को सामान्य ऑपरेशन के पेशेंट के लिए खोल दिया गया। लेकिन इनमें से किसी को डेंगू वार्ड नहीं बनाया गया। जबकि इनमें से एक वार्ड को डेंगू वार्ड में बदला जा सकता है। डेंगू के गंभीर पेशेंट का इलाज करने के लिए फिजिशियन मात्र सिविल अस्पताल में ही है।

डेंगू वार्ड पेशेंट के लिए ही बनाया| सिविल अस्पताल के पीएमओ डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि सिविल अस्पताल में डेंगू के पेशेंट के लिए ही डेंगू वार्ड बनाया गया है, लेकिन वहां जगह कम होने से एक बेड लगा। इसलिए पेशेंट को जनरल वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। जहां तक एक बेड पर दो पेशेंट की बात है, अस्पताल में बेड भी कम है। इसलिए दो पेशेंट को एक बेड दिया गया है।

गांधी नगर निवासी दीपक को कई दिन से बुखार था। प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने टेस्ट कराने पर बताया कि डेंगू है। इस पर वे सिविल अस्पताल में आ गए। उनके प्लेटलेट्स 50 हजार तक आ गए हैं। उन्हें हर दूसरे दिन प्लेटलेट्स चढ़ाए जा रहे हैं। जिस बेड पर दीपक हैं, उस बेड पर गांव बलाचौर निवासी चूहड़मल को भी लेटाया गया है।

उन्हें भी कई दिन से बुखार आ रहा है। हालांकि उन्हें डेंगू की पुष्टि नहीं हुई। लेकिन प्लेटलेट्स डाउन बताए जा रहे हैं। इसी तरह से गांधी नगर निवासी दीपनारायण के भी प्लेटलेट्स डाउन चल रहे हैं। 59 हजार तक गिर चुके हैं। उन्हें भी अलग से बेड नहीं मिला। उनके साथ एक बुजुर्ग को लेटाया गया है। बुजुर्ग को चेस्ट मेें दिक्कत है।

पांच दिन में तीन गुना बढ़े डेंगू केस| कोरोना डेंगू के केस लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक सरकारी रिकाॅर्ड में 30 केस मिल चुके हैं। वहीं, करीब 200 संदिग्ध केस आ चुके हैं। पांच दिन में डेंगू के तीन गुना मरीज मिले हैं। डेंगू का सीजन अभी शुरू हुआ है, जो नवंबर तक रहता है। इसलिए माना जा रहा है कि इस बार पिछले सालों से ज्यादा पेशेंट आ सकते हैं। पिछले साल 42 डेंगू के पेशेंट मिले थे। इस साल स्वास्थ्य विभाग की टीमों को जांच में 3800 जगह डेंगू-मलेरिया के मच्छर का लार्वा मिल चुका है।

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