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मांगों को लेकर प्रदर्शन:डीसी आॅफिस का घेराव करने पहुंचे कर्मचारियों की पुलिस के साथ धक्का-मुक्की, डीसी को सौंपा ज्ञापन

यमुनानगर9 दिन पहले
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  • बेरिकेड तोड़कर अंदर पहुंचे कर्मचारियों ने एसडीएम को नहीं दिया ज्ञापन

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विभिन्न कर्मचारी संगठनों के सदस्य व पदाधिकारी मंगलवार को डीसी ऑफिस का घेराव करने पहुंचे। यहां डीसी ऑफिस में प्रवेश को लेकर उनकी पुलिस कर्मचारियों से जमकर गरमागरमी हुई। पुलिस के साथ धक्का-मुक्की कर कर्मचारी बेरिकेड तोड़कर अंदर घुस गए।

उन्हें किसी तरह पुलिस ने पार्किंग एरिया में रोका। कर्मचारियों से उनकी मांगों का ज्ञापन स्वीकार करने जब एसडीएम मौके पर पहुंचे तो कर्मचारियों ने उन्हें ज्ञापन देने से मना कर दिया। उन्होंने डीसी को मौके पर बुलाने की मांग की। इस पर पांच कर्मचारी नेताओं को डीसी से मिलने की बात कही गई। 5 कर्मचारी नेताओं ने डीसी से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा और मांगें पूरा कराने की बात कही। डीसी ने उन्हें जिला स्तर की मांगों पर गहनता से विचार करने का आश्वासन दिया।

इससे पहले सर्व कर्मचारी संघ, रिटायर्ड कर्मचारी संघ व सीटू से संबंधित सभी विभागों के कर्मचारी जिला प्रधान महिपाल सोडे, सीटू जिला प्रधान मतलूब हुसैन की अध्यक्षता में केंद्र व प्रदेश सरकार की कथित कर्मचारी, मजदूर व किसान विरोधी नीतियों के विरोध में डीसी कार्यालय के घेराव के लिए अनाज मंडी के गेट पर एकत्रित पहुंचे।

यहां से नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में डीसी ऑफिस पर पहुंचे जहां पर उनकी पुलिस से भी तकरार हुई। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा लगातार प्रदेश सरकार से कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान के लिए अनुरोध कर रहा है। सरकार न तो रेगुलराइजेशन नीति बना रही है और न ही ठेका प्रथा खत्म कर कर्मचारियों को विभाग के पैरोल पर लेकर समान काम समान वेतन लागू कर रही है।

सरकार ने एनपीएस को खत्म कर पुरानी पेंशन बहाली की प्रमुख मांग पर चुप्पी साध ली है। कोरोना के चलते महंगाई भत्ते पर लगाई गई रोक निरंतर जारी है जबकि प्रदेश सरकार अब जनता की कोई सहायता नहीं कर रही है। आरोप लगाया कि भाजपा-जजपा दोनों के घोषणा पत्रों में कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया जा रहा।

रोजगार का वायदा करके सत्ता में आई गठबंधन सरकार किसी न किसी बहाने से नियमित व ठेका कर्मचारियों की लगातार छंटनी करने में लगी हुई है। किसान नेता जरनैल सिंह सांगवान ने बताया कि केंद्र व प्रदेश की सरकार लगातार उदारीकरण की नीतियों को आगे बढ़ाते हुए जहां जन सेवाओं के विभागों का तेजी से निजीकरण कर रहीं हैं, वहीं काॅरपोरेट के हक में श्रम कानूनों में बदलाव कर रही है।

इन्हीं नीतियों के चलते केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों में बिजली संशोधन बिल 2020 को वापस लेने की मांग को लेकर किसान लगातार 26 नवंबर से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शन का संचालन व जिला सचिव राजपाल सांगवान, सीटू जिला सचिव शरबती देवी ने किया।

मौके पर नगर पालिका से प्रवेश परोचा, राजकुमार धारीवाल, गुलशन भारद्वाज, विक्की पारचा, सीटू से कोषाध्यक्ष रामकुमार काम्बोज, अध्यापक संघ से राकेश धनखड़, जगपाल, स्वास्थ्य ठेका यूनियन के कर्मचारी, आशा वर्कर निरुबाला, गुरिंदर कौर, आंगनबाड़ी से रेखा सैनी, मीनाक्षी शर्मा, रिटायर्ड कर्मचारी संघ से शोभन सिंह, सोमनाथ, सुरजीत, बिजली निगम से विक्रम काम्बोज, सोमनाथ, जोत सिंह, पब्लिक हेल्थ से प्रेम प्रकाश, रोडवेज से राजबीर, नंद लाल, हाइडल से नरेश ढुल, अशोक, पशुपालन से देवी चंद वन विभाग से सतपाल के नेतृत्व में कर्मचारियों ने भाग लिया।

कर्मचारियों की ये हैं मुख्य मांगें

  • ईएसआई हॉस्पिटल की नीलम सहित नौकरी से निकाले गए अन्य सभी कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लिया जाए।
  • ठेका प्रथा समाप्त कर सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए, पक्का होने तक समान काम समान वेतन व सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए 3.एनपीएस रद्द कर पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
  • श्रम कानूनों की जगह बनाए गए लेबर कोड सहित तीनों कृषि कानूनों में बिजली संशोधन बिल 2020 को वापस लिया जाए।
  • डीए पर लगाई रोक को हटाया जाए और कटौती किए गए डीए का भुगतान किया जाए।
  • प्रीमेच्योर रिटायरमेंट के आदेश वापस लिए जाएं, प्रमोशन में टेस्ट की शर्त लगाने के प्रस्ताव को रद्द किया जाए।
  • वर्क लोड के अनुसार नए पद सृजित कर सभी खाली पदों को नई भर्ती से भरा जाए।
  • आरक्षित श्रेणियों के बैकलॉग को विशेष भर्ती अभियान चलाकर भरा जाए।
  • जन सेवाओं के किए जा रहे निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
  • एक्स ग्रेशिया रोजगार स्कीम में लगाई गई शर्तों को हटाया जाए।
  • नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को रद्द किया जाए।
  • ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी में संगठनों के सुझाव अनुसार संशोधन किए जाएं।
  • जनतांत्रिक अधिकारों पर किए जा रहे हमलों पर रोक लगाई जाए।

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