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डेयरी कांप्लेक्स के सस्ते प्लॉटों से मुनाफे का खेल:डेयरी व्यवसाय न होने पर भी सस्ते प्लॉट लेकर रेंट पर देने और कीमत बढ़ने की जुगत में लोग

यमुनानगर2 महीने पहले
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यमुनानगर | दड़वा डेयरी कांप्लेक्स में ट्यूबवेल खराब होने पर जलघर पर लगा ताला व दड़वा डेयरी कांप्लेक्स में बंद स्ट्रीट लाइट। - Dainik Bhaskar
यमुनानगर | दड़वा डेयरी कांप्लेक्स में ट्यूबवेल खराब होने पर जलघर पर लगा ताला व दड़वा डेयरी कांप्लेक्स में बंद स्ट्रीट लाइट।
  • दड़वा के हालात- 262 प्लॉट में 110 प्लॉट पर ही चल रहीं डेयरियां

डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट के नाम पर नगर निगम ने चार जगह डेयरी कांप्लेक्स पर दो दशक में 5 करोड़ खर्च दिए, पर जमीनी स्तर पर हकीकत ये है कि अब भी न यहां पूरी सुविधाएं हैं न सभी आबंटित प्लॉटों में डेयरियां शिफ्ट हुईं। दड़वा कांप्लेक्स में प्लॉटों से आधी संख्या में ही डेयरी संचालक शिफ्ट हुए। जबकि रायपुर, कैल, औरंगाबाद कांप्लेक्स में संख्या और भी कम है।

यानि, कांप्लेक्स में आधे से ज्यादा प्लॉट खाली हैं, किंतु निगम की नोटिस व चालान कार्रवाई से परेशान डेयरी संचालकों को आवेदन करने पर भी कांप्लेक्स में प्लांट नहीं मिल रहे। उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने ईक्का-दुक्का पशु दिखाकर या अफसरों से सेटिंग कर कांप्लेक्स में सस्ते प्लॉट ले लिए, जो इन्हें रेंट पर देकर या कीमत बढ़ने पर बेच कमाई की जुगत में है जबकि असल डेयरीवाले यहां प्लॉट से वंचित हैं।

वर्ष-2001 से 2020 तक दड़वा में 20 एकड़ जमीन खरीदने के लिए 77 लाख 75902 रुपए व सड़कों, बिजली, नालियों जैसी सुविधाओं पर 89.57 लाख रुपए खर्च किए। रायपुर में 56.52 लाख रुपए से 9 एकड़ पांच कनाल जमीन खरीदी और विकास कार्यों पर 51.65 लाख रुपए खर्च किए। औरंगाबाद में 58.84 लाख से नौ एकड़ दो कनाल जमीन खरीदी और विकास कार्यों पर 42.54 लाख रुपए खर्च किए। कैल में 50 लाख से 12 एकड़ 19 मरले जमीन खरीदी व 50 लाख के विकास कार्य हुए। इसके बाद भी लगातार खर्च के बावजूद प्रोजेक्ट का लक्ष्य अधूरा है।

अभी तक यह है स्थिति: वर्ष 2004 से 2006 में डेयरियों को कांप्लेक्स में प्लॉट आबंटित किए, पर यहां असुविधा देख 8-10 साल डेयरी संचालक नहीं आए। सख्ती के बाद 2018 में अधिकांश डेयरियां शिफ्ट हुईं, पर निगम की ढील देख आधी वापस शहर लौट आईं। बीते सर्वे में शहर में चल रहीं डेयरियों की संख्या 375 निकली थी। निगम में शामिल गांवों की डेयरियों की संख्या मिलाएं तो यह 500 से अधिक होगी। 2020 में निगम से शहर में चल रहीं 250 को सीलिंग नोटिस भी गए, पर कार्रवाई के नाम पर पशु जब्त कर कुछ देर बाद छोड़ दिए गए। अब भी शहर में 45 फीसदी डेयरियां हैं।

दड़वा के हालात- 262 में 110 प्लॉट में ही डेयरियां: यहां 262 प्लॉट में 110 में ही डेयरियां चल रही हैं। जबकि बाकी खाली पड़े खंडहर हो रहे हैं। सुविधा की बात करें तो 136 लाइटों में 30 पिछले साल चोरी हो गईं और 130 बंद होने पर महज छह ही चल रही है। सरकारी ट्यूबवेल भी 3 साल से बार-बार खराब हो रहा है, जिस पर 1 साल से ताला लटका है। अस्पताल भी बिना चिकित्सक के महज पार्किंग स्पेस बनकर रह गया है। डेयरी संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दूध का काम नहीं करते, उनके भी यहां प्लॉट हैं। इनमें कोई ईंट भट्टा चलाता है तो कोई निगम कर्मी है, जो प्लॉट रेंट पर देकर या जमीन की वेल्यू बढ़ने पर बेचने की जुगत में हैं अाैर असल हकदार डेयरीवालों को यहां प्लॉट नहीं मिल रहे।

प्लॉट के लिए किया आवेदन, तब भी हो गया चालान: सुभाष
कांसापुर के सुभाष ने बताया कि डेयरी कांप्लेक्स में प्लॉट लेने के लिए आवेदन कर रखा है। इसके बाद भी निगम की टीम ने उनका चालान कर दिया। ऐसे ही, क्षेत्र में अन्य कई डेयरी संचालक हैं, जो कांप्लेक्स में प्लॉट के लिए आवेदन कर चुके हैं, पर उन्हें नहीं मिल रहा। निगम अफसर तर्क दे रहे हैं कि सभी प्लॉट आबंटित हैं, किंतु कांप्लेक्स में आधे से ज्यादा प्लॉट खाली हैं।

डेयरी संचालकों की यूनियन से बैठक कर उनकी सभी समस्याएं जानेंगे, जिनका समाधान किया जाएगा। जहां तक अन्य व्यवसाय से लोगों के डेयरी में प्लॉट होने की बात है, इस बारे कोई शिकायत नहीं है। इसका पता करांएगे।
सुरेंद्र चोपड़ा, सीएसआई, नगर निगम।

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