यूरिया की किल्लत:सुबह 5 बजे खाद के लिए लाइन में लगे किसान, 9 बजे खाद सेंटर खुला तो पता चला खाद आया ही नहीं

यमुनानगरएक महीने पहले
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यमुनानगर| यूरिया खाद को लेकर सुबह 7 बजे लाइन में लगे किसान। यहां सुबह 6 बजे से लाइन लगनी शुरू हो जाती है। - Dainik Bhaskar
यमुनानगर| यूरिया खाद को लेकर सुबह 7 बजे लाइन में लगे किसान। यहां सुबह 6 बजे से लाइन लगनी शुरू हो जाती है।
  • कृषि विभाग के अधिकारी बोले, दो दिन में करीब 60 हजार बैग आ जाएंगे
  • 10 दिन से जिले में खाद का रैक ही नहीं आया, इसलिए हो रही किल्लत

किसान लाइन में हैं। कुछ दिन पहले तक डीएपी खाद के लिए था तो अब यूरिया खाद के लिए। किसान सुबह चार बजे नींद से जागते हैं और खाद लेने के लिए लाइन में जाकर खड़ा हो जाते हैं जबकि खाद केंद्र सुबह नौ बजे और पैक्स दस बजे खुलते हैं। तीन से चार घंटे तक बंद शटर के आगे किसान लाइन में इस उम्मीद के साथ खड़े रहते हैं कि शटर खुलने पर उसे खाद जरूर मिलेगा। सोमवार को भी कई खाद केंद्र पर इसी उम्मीद में ठंड में किसान नींद से उठकर पहुंचे। कंबल और चादर लपेट किसान लाइन में खड़ा रहे। जब खाद केंद्र पर कर्मचारी पहुंचे तो पता चला कि खाद ताे आया ही नहीं।
किसान मायूस होकर लौट गए। वहीं, कई किसान घंटों बाहर बैठे रहे। शायद कुछ देर में खाद आ जाए, लेकिन शाम तक खाद नहीं आया। यूरिया की यह किल्लत 15 दिन से चल रही है। अब किसानों ने ऐलान किया है कि मंगलवार को किसान डीसी आॅफिस का घेराव करेंगे। जब यूरिया खाद मिलेगा, तब ही वहां से उठेंगे। वहीं, अधिकारी कह रहे हैं कि अगले दो दिन में करीब 60 हजार बैग आने हैं। इसके बाद किल्लत दूर हो जाएगी।
यहां तीन दिन से खाद ही नहीं

सोमवार को जगाधरी अग्रसेन चौक के पास स्थित इफको केंद्र पर किसान खाद लेने पहुंचे थे। किसान यहां पर सुबह छह बजे आने शुरू हो गए थे। नौ बजे तक लंबी लाइन लग चुकी थी। जब इफको केंद्र खुला तो पता चला कि आज खाद आया ही नहीं। यहां पर तीन दिन से खाद नहीं है। किसान हर दिन आते हैं और यूरिया लेने के लिए लाइन में लग जाते हैं।

गांव जयधरी निवासी साहब और साबापुर निवासी नरेंद्र कुमार ने बताया कि आठ दिन से वे चक्कर लगा रहे हैं। यहां पर नाम लिख लेते हैं और कहते हैं अगले दिन खाद लेने आना। अगले दिन आते हैं तो कहते हैं कि खाद नहीं है। इसी तरह से सुरेंद्र कुमार ने बताया कि वे अलसुबह पांच बजे आए थे और लाइन में लग गए थे, लेकिन इसके बाद भी उन्हें खाद नहीं मिला।

अब एक कट्टा भी नहीं मिल रहा| यूरिया खाद की किल्लत ऐसी है कि 20 एकड़ के किसान को खाद का एक कट्टा नहीं मिल रहा। आज से 15 दिन पहले एक किसान को 10 कट्टे यूरिया खाद के दिए जाते थे। इसके बाद पांच-पांच दिए जाने लगे, लेकिन अब एक कट्टा मिलना भी मुश्किल हो रहा है।

एक एकड़ में तीन कट्टे यूरिया चाहिए
इन दिनों गेहूं, सरसाें, लहसुन और सितंबर में लगाए गए गन्ने में यूरिया खाद डाला जाता है। एक एकड़ गेहूं में 3 कट्टे यूरिया के चाहिए लेकिन किसान को एक कट्टा नहीं मिल रहा। किल्लत की असल वजह यमुनानगर में 10 दिन से यूरिया का रैक नहीं आया। कुछ सरकारी केंद्र कुरुक्षेत्र या अन्य जगह से खाद लेकर आ रहे हैं, लेकिन वहां से ज्यादा मात्रा में खाद नहीं आ सकता।

रैक आने पर ही खाद की किल्लत दूर हो सकती है। कुछ प्राइवेट दुकानों पर यूरिया ब्लैक भी हो रहा है। भाकियू जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने बताया कि यूरिया न मिलने से फसल खराब हो रही है। किसान अपनी फसल बचाने के लिए मंगलवार को डीसी आॅफिस का घेराव करेंगे। यहां से तभी उठेंगे, जब किसानों को यूरिया खाद मिलेगा।

मंगलवार को ही एक रैक यूरिया का आ रहा है। इसमें करीब 12500 एमटी यूरिया होगा। बुधवार को 13500 एमटी यूरिया का रैक आएगा। वहीं, 100 एमटी इफको की ओर से अलग भेजा जाएगा। इस तरह से अगले दो दिन में खाद की कोई किल्लत नहीं रहेगी। अक्टूबर से मार्च तक जिले में करीब 52 हजार बैग यूरिया की डिमांड रहती है। -डॉ. बालमुकंद, कृषि विभाग के क्यूसीआई।

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