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सीसीटीवी मेंटेनेंस से पीछे हट रही निगम:उद्योगपतियों ने ~20 लाख के सीसीटीवी लगवाए, 70-80 लाख के चालान करने वाली पुलिस और निगम मेंटेनेंस से पीछे हट रहे

यमुनानगरएक महीने पहले
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  • सीसीटीवी चालान योजना शुरू करने वाला पहला जिला बना था यमुनानगर, एडीजीपी तब खुद आए थे इनका उद्घाटन करने
  • ट्रैफिक एसएचओ का तर्क- मेंटेनेंस निगम की होती है, निगम कमिश्नर बोले- न हमने लगवाए और न ही मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ली

कहते हैं कि फ्री में मिली चीज की कद्र लेने वाले को नहीं होती। ऐसा ही हुआ है उद्योगपतियों के सहयोग से शहर के मुख्य चौकों पर लगाए सीसीटीवी का। करीब 20 लाख रुपए के सीसीटीवी प्रशासन को फ्री में मिल गए लेकिन इनकी मेंटेनेंस अधिकारी नहीं कर पाए। रिजल्ट यह हुआ कि मेंटेनेंस न होने से एक-एक कर सभी सीसीटीवी खराब हो गए। कुछ तो गायब भी बताए जा रहे हैं।

इस तरह से प्रदेश में सीसीटीवी चालान सिस्टम शुरू करने वाले यमुनानगर में अधिकारियों की नाकामी के चलते योजना दम तोड़ गई। पुलिस मेंटेनेंस की जिम्मेदारी नगर निगम पर डाल रही है तो निगम अधिकारी कह रहे हैं कि न तो उन्होंने सीसीटीवी लगाए और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ली। इस योजना को सिरे चढ़ाने में तत्कालीन एसपी राजेश कालिया और तत्कालीन ट्रैफिक एसएचओ ने दिनरात काम किया था।

शहर के बड़े उद्योगपतियों को अपने साथ जोड़ा। उद्योगपतियों को बताया गया था कि इस सिस्टम के लगने से ट्रैफिक सिस्टम तो कंट्रोल होगा ही, साथ ही अपराधियों को भी पकड़ने में मदद मिलेगी जिससे शहर में हर व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस करेगा लेकिन अधिकारियों के ट्रांसफर के बाद ये दावे हवा हवाई हो गए। एएमसी (एनुअल मेंटेनेंस सर्टिफिकेट) सिरे न चढ़ने से मेंटेनेंस नहीं हो पाई। निगम का सालाना बजट 115 करोड़ और ट्रैफिक पुलिस 70 से 80 लाख के चालान करती है हर साल| लोगों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी लगाने में कुछ ऐसे लोग थे जिनकी सालाना कमाई 10 से 20 लाख रुपए है। उन्होंने अपनी तरफ से डोनेशन दिया और करीब 20 लाख रुपए से सीसीटीवी लगकर सिस्टम चल पड़ा।

मेंटेनेंस की जिम्मेदारी या तो पुलिस की होती है या फिर निगम की। नगर निगम का सालाना बजट 115 करोड़ रुपए है जबकि अगर ट्रैफिक पुलिस की ही बात करें तो पिछले साल 71 लाख रुपए चालान से आए। इसमें सीसीटीवी सिस्टम से हुए चालान का बड़ा हिस्सा था। हर साल 70 से 80 लाख रुपए के पुलिस चालान करती है।

लॉकडाउन में तो यह एक करोड़ पार कर चुका था। इस तरह से इतना बजट और चालान से वसूली होने के बाद भी नगर निगम और पुलिस इस सिस्टम को नहीं चला पा रहे जबकि इन पर करीब चार से पांच लाख रुपए का खर्च ठीक होने पर आना है। इतना खर्च भी तब है जब शुरुआत से मेंटेनेंस नहीं की गई। ऑप्टिकल केबल टूट चुकी है। यह काफी महंगी है।

ट्रैफिक रूल फालो करने लगे थे वाहन चालक, फिर वही हाल| सीसीटीवी सिस्टम से जब चालान होने लगे तो इसमें नेताओं से लेकर पुलिस कर्मियों, अधिकारियों और सरकारी वाहनों तक के चालान कट गए। इससे शुरुआत में काफी अच्छे रिजल्ट आए।

जिस तरह से चंडीगढ़ में ट्रैफिक नियमों के प्रति लोग जागरुकता दिखाते हैं, ठीक उसी तरह से यहां भी रूल फालो करने लगे थे लेकिन अब फिर वही सिस्टम हो गया क्योंकि टेक्निकल तरीके से चालान नहीं हो रहे। फिजिकल चालान होने से नियम तोड़ने वाले ज्यादातर सिफारिश लगाकर या फिर अपने पद का परिचय देकर बच जाता है।

हाई क्वालिटी के लगाए गए थे एएनपीआर कैमरे

शहर कमानी चौक, बाइपास चौक, अग्रसेन चौक, जगाधरी बस स्टैंड चौक, फव्वारा चौक पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर (एएनपीआर) कैमरे लगवाए गए हैं। ये कैमरे हाई टेक्नोलॉजी के हैं जोकि सीधे वाहन का नंबर रीड कर कैद कर लेते हैं।

जैसे ही चौक पर पहुंचने पर किसी वाहन चालक ने ट्रैफिक रूल तोड़ा तो वह सीसीटीवी से कंट्रोल रूम में पहुंच जाता था। वहां पर कर्मचारी तैनात रहते थे और देखते रहते थे कि किस वाहन चालक ने क्या रूल तोड़ा है। इस पर उसका चालान किया जाता था। चालान घर पर जाता था। उसमें उसकी फोटो तक होती थी कि उसने क्या रूल तोड़ा। इस तरह से हर दिन 100 से 200 तक चालान होते थे।

मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निगम की है
सीसीटीवी चालान सिस्टम पुलिस ने जनता के सहयोग से लगवाया था। सीसीटीवी की मेंटेनेंस नहीं हो पाई। इससे वह सिस्टम बंद हैं। मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निगम की है। हम लगातार पत्राचार कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही मेंटेनेंस होगी।
अजीत कुमार, एसएचओ, ट्रैफिक थाना

न हमने लगवाए और न ही मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ली
शहर के चौकों पर सीसीटीवी पुलिस की ओर से लगवाए गए थे। निगम ने इनकी मेंटेनेंस की जिम्मेदारी नहीं ली जिन्होंने लगवाए, जिम्मेदारी उन्हीं की है इसलिए पुलिस ही इन्हें ठीक कराए।
धर्मवीर सिंह, कमिश्नर, नगर निगम

मेंटेनेंस के अभाव में बंद है, इसका दुख है
हमने पुलिस का सहयोग करते हुए आमजन की सुरक्षा और शहर में ट्रैफिक सिस्टम सुधारने के लिए सीसीटीवी सिस्टम लगवाने के लिए पैसे दिए थे। अधिकारियों ने जो जिम्मेदारी लगाई थी, उन्होंने निभाई लेकिन ये सीसीटीवी मेंटेनेंस के अभाव में बंद है तो इसका दुख है। मेंटेनेंस की जिम्मेदारी अधिकारियों को लेनी चाहिए।
सीसीटीवी सिस्टम लगवाने के लिए पैसे देने वाले व्यापारी।

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