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उद्यमियों को राहत:अस्पतालों में ऑक्सीजन की मांग कम होने से 38 दिन बाद इंडस्ट्री को मिली सप्लाई

यमुनानगर19 दिन पहले
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यमुनानगर| सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में खाली पड़े बेड। - Dainik Bhaskar
यमुनानगर| सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में खाली पड़े बेड।
  • 500 यूनिट में काम ठप था, क्योंकि कोरोना संक्रमितों की सांसें बचाना जरूरी था
  • ऑक्सीजन की कमी से करोड़ों का नुकसान उठाया इंडस्ट्री ने, बहुत से वर्करों को घर बैठना पड़ा

कोरोना के केस कम होने से अस्पतालों में बनाए कोविड वार्ड खाली होने लगे हैं। जिससे ऑक्सीजन की खपत भी कम हुई है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत कम होने से 38 दिन बाद इंडस्ट्री को ऑक्सीजन मिलनी शुरू हुई है। जिससे इंडस्ट्री की चल पड़ है।

एक अनुमान के अनुसार यमुनानगर और जगाधरी की इंजीनियरिंग यूनिटों में हर दिन चार से पांच मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत रहती है। लेकिन अप्रैल में जब कोरोना के केस बढ़ने लगे तो जितनी ऑक्सीजन की खपत इंडस्ट्री में थी, उससे ज्यादा अस्पतालों में होने लगी। इससे सरकार ने सभी इंडस्ट्री की ऑक्सीजन सप्लाई बंद कर दी थी।

25 अप्रैल से इंडस्ट्री की ऑक्सीजन सप्लाई बंद थी, जो अब चली है। 38 दिन तक ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से जहां इंडस्ट्री को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ तो वहीं वर्करों को घर बैठना पड़ा। कहा जा रहा है कि इंडस्ट्री को पहले की तरफ पटरी पर आने में एक माह लगेगा। बहुत से ऑर्डर कैंसिल किए गए थे तो अब नए ऑर्डर आने पर काम पहले की तरफ किया जाएगा।

यमुनानगर में इंजीनियरिंग की कई बड़ी इंडस्ट्री है, जिनसे विदेशों तक में माल जाता है। ऑक्सीजन न मिलने से इनमें भी काम बंद था। उधर, आगे ऑक्सीजन के चलते इंडस्ट्री बंद न करनी पड़े, इसे लेकर भी काम चल रहा है। नए प्लांट लगाने की तैयारी है। मई में हर दिन 500 से ज्यादा कोरोना पेशेंट को ऑक्सीजन चाहिए थी, लेकिन अब 70 से 80 पेशेंट को ही ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है।

सरकार ने हमारी बात सुनी : विभोर

यमुनानगर जगाधरी चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव विभोर पाहुजा का कहना है कि उन्होंने सरकार से मांग की थी कि ऑक्सीजन सप्लाई शुरू की जाए। जिस पर सरकार ने जल्द फैसला लिया और सप्लाई शुरू हो गई है। इससे व्यापारियों को राहत मिली है। उनकी इंडस्ट्री अब चलने लगी है। वर्करों को भी रोजगार मिला है। जिले में बड़ी इंजीनियरिंग यूनिट करीब 50 हैं। जबकि अगर सभी छोटी-बड़ी इंडस्ट्री की बात करें तो 500 हैं। ऑक्सीजन सप्लाई न होने से करोड़ों का नुकसान हुआ है।

25 अप्रैल को बंद हुई थी इंडस्ट्री की ऑक्सीनज की सप्लाई

यमुनानगर में बड़ी संख्या में ऐसी इंडस्ट्री है, जिसमें प्रोडक्ट तैयार करने में ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। रेलवे वर्कशॉप, इज्जैक हैवी इंजीनियरिंग, चंद्रपुर वर्कस, लार्क इंजीनियर, कल्याण इंडस्ट्री, ग्रेट इंडिया फैब, कमल इंजीनियरिंग, जेके प्रेसटिंग, ओरिएंटल, ई-रोल, शिव ट्रेडर्स और अन्य फैक्ट्रियों में इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन यूज होती है।

अप्रैल में जब कोरोना के केस बढ़ने लगे तो इंडस्ट्री में ऑक्सीजन की सप्लाई पूरी तरह से बंद कर दी गई थी। 25 अप्रैल को आखिरी सप्लाई इंडस्ट्री को हुई। उसके बाद अब सप्लाई होने लगी है। यमुनानगर में फैब्रिकेशन की कई बड़ी यूनिट है। इन इंडस्ट्री का बिना ऑक्सीजन चलना मुश्किल था।

मानकपुर स्थित ऑक्सीजन प्लांट संचालक अरुण कुमार ने बताया कि इंडस्ट्री को ऑक्सीजन सप्लाई शुरू कर दी है। हालांकि अभी पहले की तरह ऑक्सीजन की डिमांड इंडस्ट्री में नहीं है। इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन सप्लायर राजकुमार कांबोज ने कहा कि इंडस्ट्री में दो-तीन दिन से सप्लाई शुरू हो गई है।

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