स्ट्रीट लाइट्स का मामला / मेयर, निगम कमिश्नर, एसई, एक्सईएन और एमई को ठेकेदार का लीगल नोटिस

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  • ठेकेदार ने निगम अधिकारियों के पेमेंट रोकने को लेकर कोर्ट में जाने का फैसला लिया, 50 लाख की पेमेंट क्यों रोकी, जवाब नहीं मिला तो जाएंगे कोर्ट
  • ठेकेदार की लगाई लाइट्स की जांच के लिए पांच भाजपा वर्करों की बनाई गई थी कमेटी, कमेटी ने कई कमियां बताई

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

यमुनानगर. शहर में स्ट्रीट लाइट्स लगाने वाला ठेकेदार और निगम अमले के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। ठेकेदार ने अर्बन लोकल बॉडी डायरेक्टर, मेयर, निगम कमिश्नर, एसई, एक्सईएन और एमई के खिलाफ कोर्ट जाने का फैसला ले लिया। इसको लेकर उन्होंने शनिवार को पहला कदम उठाते हुए इन्हें लीगल नोटिस भेज दिया। आरोप है कि उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। अवैध जांच कमेटी बनाई गई। टेंडर की शर्तों के अनुसार काम करने पर भी उसकी करीब 50 लाख रुपए की पेमेंट रोक दी गई। 

उन्होंने लीगल नोटिस में संतोषजनक जवाब न मिलने पर सिविल और क्रिमिनल पीटिशन हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट में फाइल करने की बात कही है। इस तरह से शहर में लगाई गई स्ट्रीट लाइट्स का मामला ठेकेदार और अधिकारियों के बीच नया दंगल शुरू करता दिख रहा है। क्योंकि अधिकारी पेमेंट करने को तैयार नहीं हैं तो ठेकेदार पेमेंट लेने पर अड़ा है। बताया जा रहा है कि इससे पहले ठेकेदार की निगम के अधिकारियों से इस मामले को लेकर बहस भी हो चुकी है। इससे बात बिगड़ती चली गई। 

जांच कमेटी में पांच भाजपा वर्कर, यहीं से शुरू हुआ असली विवाद| नगर निगम कमिश्नर ने 25 मार्च को स्ट्रीट लाइट्स की जांच के लिए एक जांच कमेटी बनाई। इसमें पांच लोग शामिल किए गए। ये पांचों भाजपा वर्कर हैं। इन्होंने फिलहाल अपनी रिपोर्ट तो नहीं दी, लेकिन कमेटी के चेयरमैन से लेकर कुछ मेंबर कह चुके हैं कि ठेकेदार ने जो स्ट्रीट लाइट्स लगाई है उसमें कई स्तर पर गड़बड़ी मिली है। यहीं से ज्यादा विवाद शुरू हुआ। ठेकेदार इस जांच कमेटी को नॉन टेक्नीकल और अवैध बता रहे हैं। जबकि इस कमेटी का कहना है कि उन्होंने निष्पक्ष तरीके से जांच की है। अभी तो जांच भी पूरी नहीं हुई है। हम चाहते हैं कि शहर में जो भी काम हो वह गुणवत्ता पूर्ण और टेंडर की शर्तों के अनुसार हो। 

पीस रही जनता| एक तरह से कहें तो स्ट्रीट लाइट्स को लेकर निगम अधिकारियों, राजनेताओं और ठेकेदार के बीच लड़ाई चल रही है। इसमें नफा नुकसान दोनों में किस का होगा, यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन इस समय जनता इस लड़ाई में पीस रही है। क्योंकि जिस कंपनी के साथ विवाद हुआ है उसे शहर में छह हजार स्ट्रीट लाइट्स लगानी है, लेकिन अभी 2300 लगी हैं। शहर में बहुत सी जगह लाइट्स खराब हैं। वे समय पर ठीक नहीं हो पा रही हैं। जबकि जनता से बिजली बिलों में उनका भुगतान लिया जा रहा है। इस तरह से नुकसान जनता का हो रहा है।

हमने नोटिस भेज दिया है, कानूनी लड़ाई लड़ेंगे

एडवोकेट हरविंद्र अनेजा ने बताया कि उनके क्लाइंट प्रवीन राणा की दस साल पुरानी फर्म है, जोकि स्ट्रीट लाइट्स लगाने का काम करती है। उनकी फर्म ने यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम एरिया में स्ट्रीट लाइट्स लगाने का टेंडर लिया था। जो शर्तें लाइट्स लगाने की टेंडर में थी, उसी के अनुसार लाइट्स लगाई गईं हैं। उनके बिल निगम में जमा कराए, लेकिन बिना वजह पेमेंट रोक दी गई। जबकि जिस भी अधिकारी ने लाइट्स लगाने की मौके पर जाकर जांच की उसने वर्क पर संतोष जताया है। इसके बाद भी पेमेंट नहीं दी। उनके क्लाइंट को परेशान किया जा रहा है। इस पर उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मेयर समेत निगम अधिकारियों को लीगल नोटिस भेजा है। जवाब आने के बाद अगला कदम उठाया जाएगा। 

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