प्रवासियों का दर्द / प्रवासियों का खाना खाने से इनकार, बाेले- हमें घर पहुंचा दो, नहीं ताे हम भूखे मर जाएंगे

बिलासपुर|अपने घर जाने की जिद्द पर प्रशासन से सवाल जवाब करते प्रवासी मजदूर। बिलासपुर|अपने घर जाने की जिद्द पर प्रशासन से सवाल जवाब करते प्रवासी मजदूर।
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बिलासपुर|अपने घर जाने की जिद्द पर प्रशासन से सवाल जवाब करते प्रवासी मजदूर।बिलासपुर|अपने घर जाने की जिद्द पर प्रशासन से सवाल जवाब करते प्रवासी मजदूर।

  • प्रशासन के आश्वासन के बाद हुए खाना खाने काे राजी, कस्बे में चार शेल्टर होम में रह रहे करीब 500 प्रवासी श्रमिक

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

यमुनानगर. हमको खाने की इच्छा नहीं। हम तो अपने बाल बच्चन में जाना चाहत हैं। हमें सरकार किसी तरह हमारे घर तक पहुंचा दे। नहीं तो हम भूखे मर जाएंगे। यह कहना है बिलासपुर के 5 शेल्टर होम्स में रह रहे प्रवासी कामगार मजदूरों का। उन्होंने शनिवार को नाश्ता खाने से इंकार कर दिया। प्रशासन के आश्वासन पर उन्होंने नाश्ता तो कर लिया बाद में लंच न करने की जिद्द पर अड़ गए। कड़ी मशक्कत के बाद प्रशासन ने उन्हें खाना खाने के लिए राजी किया।

कस्बा के राजकीय मॉडल संस्कृति सीसे स्कूल, वेद व्यास भवन, डीएवी सीसे स्कूल कपालमोचन व बिलासपुर के सरकारी सीसे स्कूल में करीब 500 प्रवासी मजदूर रह रहे हैं। इनमें अधिकतर बिहार के सीवान व कटिहार जिला के प्रवासी हैं। 4 दिन पहले उन्हें मानकपुर लक्कड़ मंडी से यहां शिफ्ट किया गया था। उनका आरोप है कि उन्हें वहां से यह कहकर बसों में बैठाया गया था कि उन्हें अम्बाला से ट्रेन में बैठाया जाएगा, लेकिन बिलासपुर पहुंचकर उन्हें काफी हैरानी हुई। किसी तरह से उन्होंने 4 दिन तो काट लिए। प्रशासन ने उनके साथ के 96 मजदूरों को उनके गृह जिलों में भेज दिया है। जब से वे गए हैं तो इन मजदूरों की बेचैनी बढ़ गई है। अब वे बस अपने घर जाना चाहते हैं। शनिवार को प्रशासन की दिक्कत उस समय बढ़ गई जब मॉडल स्कूल में रह रहे सभी मजदूरों ने खाना खाने से मना कर दिया। उनका कहना है कि हम खाने के भूखे नहीं है। हमें तो अपने घर जाना है। 

इस पर तहसीलदार बिलासपुर तरुण सहोता, एसएचओ रवि खुड़िया व सरपंच चंद्रमोहन कटारिया स्कूल में पहुंचे। मजदूरों को मनाने के उनके तमाम प्रयास निष्फल रहे। प्रशासन ने उन्हें 12 बजे तक कोई प्रबंध करने का आश्वासन दिलाया। जिस पर मजदूरों ने नाश्ता कर लिया। लेकिन वे दोपहर के भोजन पर फिर अड़ गए। बाद में उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिलाया कि शीघ्र ही उनके भेजने की व्यवस्था हो जाएगी। इस पर वे लंच करने को राजी हुए।

हताश अाैर परेशान हो चुके हैं कामगार| कामगारों ने बताया कि वे सरकार के रवैए से पूरी तरह से हताश हो चुके हैं। 15 दिन पैदल चल कर किसी तरह लुधियाना से यूपी बॉर्डर पर पहुंचे थे। वहां से हरियाणा व यूपी पुलिस ने डंडे मार कर लौटा दिया। अब हरियाणा सरकार उन्हें कोरे आश्वासन दे रही है। उन्हें घर जाने के सिवाय और कुछ मंजूर नहीं है। सरकार उन्हें और कुछ न दे बस अपने घर जाने की अनुमति दे दे। वे किसी तरह भी अपने घर जाना चाहते हैं।

आज स्पेशल तीन ट्रेनें यमुनानगर से जाएंगी बिहार
सरकार ने यमुनानगर के लिए 3 स्पेशल ट्रेन लगाई है। जो कि आज सुबह 10 बजे से यमुनानगर रेलवे स्टेशन पर लगेंगी। इन तीन ट्रेन में करीब 5000 प्रवासियों को यहां से बिहार भेजा जाएगा। ट्रेनों में प्रवासियों को भेजने के लिए शनिवार देर तक प्रशासन की टीम लिस्ट बनाने में लग रही। वहीं प्रवासियों के चेहरे पर भी खुशी दिखी।

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