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नगर निगम:कोरोना काल में कम हुई निगम की आय, फंड की कमी से करोड़ों रुपए के काम अटके

यमुनानगर13 दिन पहले
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  • पार्षदों का आरोप- रिकवरी में नाकाम अफसर हर काम में बनाते फंड कमी का बहाना
  • न 69 कॉलोनियों में लगा गलियों-नालियों का काम, न वार्डों में एलईडी लाइट्स लगे

बीते वित्तवर्ष (2020-21) में नगर निगम काे उम्मीद से आधी भी आय नहीं हो पाई। इसमें एक वजह कोरोना भी रहा। बीते तीन वर्षों में नगर निगम को कोरोना काल में सबसे कम आय हुई। इसका असर विकास कार्यों पर पड़ने लगा है, क्योंकि इसके लिए एमसी फंड से ज्यादा दूसरी स्कीमों के फंड पर निर्भर रहना होगा। क्योंकि बीते वर्षों की तरह चालू वित्तवर्ष (2021-22) में विकास कार्याें के लिए 1.10 करोड़ कटौती कर 5.20 करोड़ खर्च का ही बजट है।

वार्ड पार्षदों का कहना है कि आय की पूरी रिकवरी में नाकाम अफसर हर काम में बताते फंड कमी का बहाना गिना रहे हैं। न 69 कॉलोनियों में 22.44 करोड़ से गलियों-नालियों का काम लग पाया न वार्डों में करोड़ों का एलईडी लाइट्स प्रोजेक्ट पूरा हो पाया वहीं, अगामी बरसाती सीजन के लिए तैयारी भी शून्य है।

बता दें कि सरकार से नगर निगमों को आ रहे फंड पर कैंची चलने के बाद से कोरोना काल में आय के संसाधनाें से आय की रिकवरी भी लगातार कम हुई। साथ ही कोरोना काल में आय तय लक्ष्य से आधी भी नहीं हो पा रही। इससे स्टाफ के वेतन-भत्ते व ऑफिस के खर्च के बाद विकास कार्यों के लिए एमसी फंड कम पड़ रहा है, जिसमें तीन वर्षों में चार करोड़ कटौती हो चुकी है।

साथ ही विकास कार्यों पर तय बजट से महज 20 से 30 फीसदी राशि ही खर्च हुई। हालात ये है कि तीन वर्षों से एमसी फंड से दुकानों, पार्कों, स्ट्रीट लाइट, ऑटो-रिक्शा चालकों के पुनर्वास पर एक भी रुपया खर्च नहीं लग पाया है।

तीन वर्षों में विकास कार्यों के लिए बजट व खर्च की स्थिति वित्तवर्ष 2018–19 में विकास कार्यों के लिए 9.17 करोड़ बजट रखा और खर्च महज 1.55 करोड़ ही हुए। इसी तरह 2019-20 में 7.95 करोड़ में 37.21 लाख व 2020-21 में 6.30 करोड़ में जनवरी माह तक 1.53 करोड़ ही खर्च हुए। अब 2021-22 के लिए 1.10 करोड़ की कटौती कर विकास कार्यों के लिए 5.20 करोड़ खर्च का बजट तय है।

आरोप -स गैर-जरूरत के कामों पर करोड़ों खर्च

वार्ड-13 से पार्षद निर्मल चौहान, वार्ड-4 से देवेंद्र सिंह ने कहा कि ज्यादा जरूरी कामों में अफसर फंड की कमी का बहाना गिना रहे हैं, किंतु गैर-जरूरत के कामों पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। डेढ़ साल पहले वैध हुई 69 कॉलोनियों में 22.44 करोड़ के बजट में बनने वाली गलियों नालियों का काम अभी भी एस्टिमेट व टेंडर में अटका है।

करोड़ों रुपए का एलईडी लाइट्स प्रोजेक्ट भी आठ वार्डों के अलावा अन्य वार्डों में नहीं हो पाया। अब बरसाती सीजन सिर पर है, जिसकी तैयारी के लिए न कोई काम हो रहा है न चर्चा के लिए हाउस मीटिंग। शहर को जलभराव की स्थिति से बचाने के लिए प्रोजेक्ट अधूरे हैं। वहीं, नाले-नालियों व सीवर की सफाई भी नहीं हुई। ऐसे में शहर को जलभराव झेलना पड़ेगा।

कोरोना काल में भी विभिन्न संसाधनाें से ज्यादा से ज्यादा आय जुटाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि विकास कार्यों पर अन्य खर्च पूरे हो सकें।
- धर्मवीर सिंह, कमिश्नर, नगर निगम।

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